गाज़ा पट्टी में 10 दिन की रुकावट के बाद सोमवार को कुकिंग गैस की आपूर्ति दोबारा शुरू कर दी गई। हालांकि स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि जो मात्रा क्षेत्र में प्रवेश करने दी गई है, वह वहां के लोगों की जरूरतों के मुकाबले बेहद कम है और इससे जारी गंभीर संकट में फिलहाल कोई बड़ी राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
गाज़ा की प्राइवेट ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रमुख नाहिद शेहबार ने बताया कि सोमवार को कुकिंग गैस से भरे चार ट्रकों को गाज़ा में प्रवेश की अनुमति दी गई। वहीं उसी काफिले में शामिल दो अन्य ट्रकों को गैस उतारने की इजाज़त नहीं मिली और उन्हें खाली वापस लौटना पड़ा।
अल-अरबी अल-जदीद से बातचीत में शेहबार ने कहा कि गाज़ा में पहुंची गैस की मात्रा बेहद सीमित है और यह आबादी की जरूरतों को पूरा करने में नाकाफी है। उन्होंने कहा कि 10 दिनों तक आपूर्ति बंद रहने के कारण पहले ही लोगों और कारोबारियों की परेशानियां काफी बढ़ चुकी हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि एक दिन पहले आठ ट्रक गैस लेकर क्रॉसिंग तक पहुंचे थे, लेकिन घंटों इंतजार करने के बाद भी उन्हें अनुमति नहीं मिली और सभी ट्रकों को बिना गैस उतारे ही वापस लौटना पड़ा।
स्थानीय अधिकारियों के अनुमान के अनुसार गाज़ा की न्यूनतम जरूरतों को पूरा करने के लिए हर महीने लगभग 8,000 टन कुकिंग गैस की आवश्यकता होती है, यानी प्रतिदिन करीब 260 टन। लेकिन हालिया बंदी से पहले भी गाज़ा में आने वाली गैस की मात्रा कुल जरूरत के 20 प्रतिशत से अधिक नहीं थी।
गाज़ा की पेट्रोलियम अथॉरिटी के आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर में हुए युद्धविराम से लेकर फरवरी के मध्य तक कुल 361 ट्रक गैस लेकर गाज़ा में दाखिल हुए। इन ट्रकों के जरिए लगभग 7,000 टन गैस पहुंची, जो गाज़ा की जरूरतों के हिसाब से एक महीने से भी कम के लिए पर्याप्त है।
गैस की इस भारी कमी का असर अब स्थानीय कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। खासकर रेस्टोरेंट, बेकरी और मिठाई की दुकानों जैसे व्यवसाय, जो कुकिंग गैस पर काफी हद तक निर्भर हैं, और गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं।
व्यवसायियों का कहना है कि अगर जल्द ही गैस की आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो उन्हें अपने कामकाज को सीमित करना पड़ेगा या फिर पूरी तरह बंद करने की नौबत भी आ सकती है।
