By : त्रिभुवन प्रख्यात पत्रकार तवलीन सिंह का यह ट्वीट भाषायी चिंता नहीं, राजनीतिक पाखंड की एक बहुत महीन मिसाल है। राहुल गांधी कोटा में…
View More मुद्दों से ध्यान भटकाने का भाषायी खेल: तवलीन सिंह का ट्वीट और राजनीतिक पाखंडश्रेणी: Analysis
संघ, संविधान और रजिस्ट्रेशन: प्रियंक खरगे ने क्यों छेड़ी 100 साल पुरानी बहस?
By : Shakeel Akhtar कर्नाटक के गृहमंत्री प्रियांक खरगे ने जो मुद्दे उठाए हैं ठीक वही गांधी जी की हत्या के बाद उस समय के…
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एस आर दारापुरी आईपीएस (से. नि.) भारत के करीब बारह राज्यों में धर्मांतरण-विरोधी कानून, जिन्हें औपचारिक रूप से ‘धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम’ (Freedom of Religion…
View More भारत में धर्मांतरण-विरोधी कानून: न केवल अल्पसंख्यक-विरोधी, बल्कि दलित-विरोधी भीमीनाक्षी नटराजन केस के पेंच राहुल गांधी को विफल बनाने की राजनीति के पीछे का एक अदृश्य गठबंधन है
By : Tribhuvan मीनाक्षी नटराजन का मामला उतना सरल नहीं है, जितना उसे एक निर्वाचन-प्रपत्र की भूल बताकर प्रस्तुत किया जा रहा है। मध्य प्रदेश…
View More मीनाक्षी नटराजन केस के पेंच राहुल गांधी को विफल बनाने की राजनीति के पीछे का एक अदृश्य गठबंधन हैदल बदल, बाबा भारती और संघ का मुग़ल मॉडल
(गुरदीप सिंह सप्पल) बड़े पैमाने पर दल-बदल भारतीय राजनीति की खास पहचान है। दूसरे लोकतंत्रों में कभी-कभार कोई नेता पाला बदलता है; हमारे यहाँ पूरे…
View More दल बदल, बाबा भारती और संघ का मुग़ल मॉडलकिताब एक, संदेश अनेक: अभिजीत डिपके के हाथ में बाबा साहेब की ‘किताब’ के पीछे वैचारिक प्रेम है या कोई बड़ा सियासी गेम?
Divya Pandey भारत में आंदोलनों में तस्वीरों, नारों, और प्रतीकों का बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है. आंदोलनों के प्रतीक के तौर पर महात्मा गाँधी, आंबेडकर,…
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(अभिषेक श्रीवास्तव) आज नियुक्त काक्रोच वाले तीन प्रवक्ताओं का मामला बड़ा दिलचस्प है भाई। एक लड़का सौरव दास है जो कुछ साल तक आरटीआइ करता…
View More तीन तिलंगे : Three Musketeersटीवी स्टूडियो से गली-मोहल्लों तक: नफ़रत की राजनीति में मीडिया की भूमिका
Author : Prashant Tandon 2014 में एक खून का प्यासा मीडिया बनाया गया, रेडियो रवांडा की तर्ज पर. 2014 में गुजरात 2002 का मॉडल को…
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(Author : Kashif Qamar) धर्म, चेहरों और मीडिया के शोर में दबते जा रहे जनता के असली सवाल लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत चुनाव होते…
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2006 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में लेफ्ट फ़्रंट को 235 सीटें मिली थीं. तब लेफ्ट फ़्रंट की सरकार को करीब 30 साल हो गए…
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