फैक्ट चेक: होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों को गुजरने देने के अनुरोध को ईरान द्वारा ठुकराने का दावा भ्रामक

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कहा जा रहा है कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया, जिसमें भारत ने अपने जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति मांगी थी। वायरल पोस्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान ने अमेरिका और इज़रायल के सहयोगी देशों, खासतौर पर भारत को वहां से गुजरने की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है।

वायरल पोस्ट में एक यूजर ने लिखा है:

‘ईरान के राष्ट्रपति मसूद बेज़ेशकियन ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस अनुरोध को ठुकरा दिया है, जिसमें उन्होंने भारतीय जहाज़ों को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने की अनुमति देने की मांग की थी। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसकी नीति साफ़ है: हालिया विश्वासघातों के बाद, अमेरिका और इज़रायल के सहयोगी देशों—विशेष रूप से भारत—को अब वहां से गुज़रने की अनुमति नहीं दी जाएगी।’

इसी दावे के साथ एक अन्य यूजर ने अरबी भाषा में भी पोस्ट साझा की है, जिसमें वही बात दोहराई गई है। जिसे यहां देखा जा सकता है।

फैक्ट चेक

Times Headline की टीम ने वायरल दावे की जांच की। जांच के दौरान भारत और ईरान के आधिकारिक बयानों को खंगाला गया। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई थी। इस वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्र की मौजूदा स्थिति, हालिया घटनाक्रम, ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और वस्तुओं के निर्बाध पारगमन जैसे मुद्दों पर चर्चा की। साथ ही दोनों नेताओं ने आपसी संपर्क बनाए रखने पर सहमति भी जताई।

दूसरी ओर, ईरानी सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इस्लामी गणराज्य ईरान भारत को एक मित्र और महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार के रूप में देखता है। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि वह क्षेत्र में असुरक्षा पैदा करने में कोई रुचि नहीं रखता और BRICS तथा शंघाई सहयोग संगठन जैसे मंचों के जरिए भारत सहित अपने मित्र देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इन आधिकारिक बयानों में कहीं भी इस बात का उल्लेख नहीं है कि भारत ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों को गुजरने देने के लिए कोई विशेष अनुरोध किया था या ईरान ने ऐसा कोई अनुरोध ठुकराया हो।

इसके अलावा कई मीडिया रिपोर्ट्स भी सामने आईं। न्यूज 18 हिन्दी और दैनिक भास्कर सहित कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि ईरान ने भारत को अपना दोस्त बताया है और क्षेत्रीय तनाव के दौरान भारत के संतुलित रुख की सराहना की है। न्यूज 18 हिन्दी की एक रिपोर्ट में लिखा गया है, ‘ईरान ने बयान जारी कर भारत की तारीफ की है. ईरान ने खुद कहा है कि भारत उसे अपना दोस्त मानता है और जंग में उसका स्टैंड बेहतर तरीके से संतुलित था. ईरान भी भारत के इस रुख से खुश है. ईरान पीएम मोदी और भारत के संतुलित रुख से संतुष्ट है. ईरान ने खुद माना है कि भारत ने मिडिल ईस्ट तनाव में रचनात्मक भूमिका निभाई है और जंग खत्म करने की कोशिश की है।’

निष्कर्ष

Times Headline की फैक्ट चेक जांच में वायरल दावा भ्रामक पाया गया। भारत और ईरान की ओर से जारी आधिकारिक बयानों में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को गुजरने देने का अनुरोध किया था या ईरान ने उसे अस्वीकार किया है। ऐसे में सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है।

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