मिस्र के राजदूत कमेल जलाल ने रमज़ान में मिस्री क़ारियों का किया स्वागत, भारत-मिस्र आध्यात्मिक संबंधों को बताया मजबूत पुल

भारत में मिस्र के राजदूत कमेल जलाल ने रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान भारत में क़ुरआन की तिलावत की परंपरा को जीवंत बनाने के उद्देश्य से अल-अजहर शरीफ से आए मिस्री क़ारियों का स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ये क़ारी इस्लाम के मूल्यों के प्रसार और संयम व सहिष्णुता के संदेश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बैठक के दौरान राजदूत कमेल जलाल ने कहा कि रमज़ान के महीने में मिस्र के क़ारियों को भारत लाना दोनों देशों के मुसलमानों के बीच एक मानवीय और आध्यात्मिक सेतु का कार्य करता है। उन्होंने बताया कि पवित्र क़ुरआन की तिलावत दोनों समुदायों के बीच प्रेम और निकटता के रिश्तों को और मज़बूत करती है। उन्होंने इस अवसर पर मिस्र और भारत के बीच गहरे नागरिक और धार्मिक संबंधों को भी रेखांकित किया।

राजदूत ने यह भी कहा कि क़ुरआन की सेवा और इस्लामी दुनिया में संतुलन और मध्यस्थता के मूल्यों के प्रसार में मिस्र और उसके धार्मिक संस्थानों, विशेष रूप से अल-अजहर शरीफ, की ऐतिहासिक भूमिका रही है।

इस अवसर पर मिस्र दूतावास का प्रतिनिधित्व काउंसलर मोहम्मद ख़ातिर ने किया। उन्होंने दिल्ली में भारतीय इस्लामिक सांस्कृतिक केंद्र द्वारा “फखरुद्दीन अली अहमद फाउंडेशन” के सहयोग से आयोजित क़ुरआन पाठ कार्यक्रम में भाग लिया। इस कार्यक्रम में मिस्र सहित इस्लामी दुनिया के कई क़ारी शामिल हुए।

कार्यक्रम में मौजूद भारतीय इस्लामी हस्तियों ने मिस्री क़ारियों की तिलावत की सराहना की और मिस्र की पारंपरिक शैली में क़ुरआन के पाठ को बेहद प्रभावशाली बताया। प्रतिभागियों ने अल-अजहर शरीफ और उसके धार्मिक संस्थानों के माध्यम से इस्लामी दुनिया में मिस्र की महत्वपूर्ण भूमिका के लिए भी अपनी प्रशंसा व्यक्त की।

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