लेबनान में हाल के दिनों में हिंसक टकराव में आई तेज़ी ने खाद्य सुरक्षा के मोर्चे पर हुई प्रगति को गहरी ठेस पहुँचाई है और देश की लगभग 25 प्रतिशत आबादी को आगामी महीनों में एक गहरे भूख संकट का सामना करना पड़ सकता है. यूएन एजेंसियों ने अपने एक नए विश्लेषण में कृषि के लिए आपात समर्थन देने, निर्बल आबादी को समय पर मानवीय राहत मुहैया कराने, और आजीविका सम्बन्धी सहायता प्रदान करने पर बल दिया है, ताकि इस विशाल चुनौती से बचा जा सके.
खाद्य अभाव पर नज़र रखने वाले एक नए विश्लेषण, एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण प्रणाली (IPC) के अनुसार, 12.4 लाख लोग, यानि देश की आबादी का एक-चौथाई हिस्सा अप्रैल व अगस्त 2026 के दौरान, संकट स्तर पर (चरण 3) या फिर उससे भी ख़राब खाद्य असुरक्षा का सामना करने के लिए मजबूर हो सकता है.
लेबनान के कृषि मंत्रालय ने यूएन खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO), विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के साथ मिलकर इस विश्लेषण के नतीजों को साझा किया है. IPC विश्लेषण में खाद्य असुरक्षा को पाँच चरणों में विभाजित किया जाता है.
- पहला चरण, जहाँ खाद्य सुरक्षा पर कोई दबाव ना हो
- दूसरा चरण, जब लोगों को भोजन की तलाश में कठिनाई झेलनी पड़ रही हो
- तीसरा चरण, यह खाद्य संकट की एक स्थिति है
- चौथा चरण, आपात स्थिति
- पाँचवा चरण, विनाशकारी हालात या अकाल
इस अध्ययन के निष्कर्ष, नवम्बर 2025 से मार्च 2026 की अवधि की तुलना में बिगड़ते हालात को दर्शाते हैं. उस समय 8.74 लाख लोग (कुल आबादी का 17 प्रतिशत) खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे थे.
28 फ़रवरी को ईरान और अमेरिका व इसराइल के बीच लड़ाई भड़कने के बाद, लेबनान में भी हिज़बुल्लाह और इसराइली सैन्य बलों के बीच हिंसक टकराव शुरू हो गया था, हालांकि अभी नाज़ुक स्थिति में संघर्षविराम लागू है. हिंसक टकराव, विस्थापन और आर्थिक दबावों के कारण स्थिति बिगड़ रही है.
लेबनान में कृषि, भोजन व आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जिस पर हिंसक टकरावों का बुरा असर हुआ है. 2024 में इसराइल और हिज़बुल्लाह के बीच हुई लड़ाई के प्रभावों से ही यह सैक्टर अभी पूरी तरह नहीं उबर पाया है.
गोलाबारी में खेतों को क्षति पहुँची है, खेतीबाड़ी पर निर्भर घर-परिवारों को विस्थापित होना पड़ा है, कृषि सम्बन्धी सामग्री की लागत बढ़ रही है और असुरक्षा व्याप्त होने से खाद्य उत्पादन पर असर हो रहा है. इस संकट से, लेबनानी घर-परिवारों में सभी आबादी समूह प्रभावित हैं.
लेबनान, अनेक मोर्चों पर समस्याओं का सामना कर रहा है, जिससे परिस्थितियाँ बिगड़ी हैं. असुरक्षा व विस्थापित से आजीविका व आय अवसरों में व्यवधान आया है, सप्लाई चेन पर दबाव हैं और हिंसक टकराव से प्रभावित इलाक़ों में बाज़ारों तक समान पहुँच नहीं है.
वहीं, मुद्रास्फीति और खाद्य क़ीमतों में उछाल आने से लोगों द्वारा वस्तुएँ ख़रीद पाने, उनकी क्रय क्षमता पर असर हुआ है, मानवीय सहायता का स्तर घटा और धनराशि की कमी से परिवारों के लिए गुज़र-बसर कर पाना कठिन होता जा रहा है. मध्य पूर्व क्षेत्र में जटिल परिस्थितियाँ इस संकट को और गम्भीर बना रही हैं. व्यापार मार्गों में आए व्यवधान, ईंधन और परिवहन की क़ीमतों में वृद्धि से हालात और बिगड़े हैं.
भरपेट भोजन न मिलने की चुनौती
विस्थापितों और पहले से ही संवेदनशील हालात में जीवन व्यतीत कर रही आबादी के लिए स्थिति विशेष रूप से ख़राब है. 3.62 लाख सीरियाई शरणार्थी और लगभग 1 लाख फ़लस्तीनी शरणार्थी संकट या उससे ख़राब स्तर पर खाद्य असुरक्षा का शिकार हो सकते हैं.
मौजूदा हालात में, घर-परिवार अपनी बुनियादी भोजन आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ हैं और उन्हें भोजन की गुणवत्ता व मात्रा घटाने या किसी समय भोजन ही न करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. कुछ लोग क़र्ज़ ले रहे हैं या फिर गुज़र-बसर के अति-आवश्यक सामान को बेच रहे हैं.
लेबनान में WFP प्रतिनिधि और देशीय निदेशक ऐलिसन ओमान लावी ने चिन्ता जताई कि अतीत में IPC विश्लेषण में नाज़ुक स्थिति की चेतावनी दी गई थी और दुर्भाग्यवश, यही सच साबित होता दिखाई दे रहा है.
“बड़ी कठिनाई से दर्ज की गई बेहतरी, तेज़ी से दिशा बदल रही है. जो परिवार किसी तरह से गुज़र-बसर कर रहे थे, वे अब हिंसक टकराव, विस्थापन और बढ़ती क़ीमतों के एक साथ होने से संकट के गर्त में धँस रहे हैं. भोजन की व्यवस्था कर पाना बहुत कठिन हो गया है.”
कृषि के लिए नाज़ुक स्थिति
खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) का कहना है कि लेबनान में ग्रामीण इलाक़ों व कृषि-खाद्य प्रणालियों में स्थिति नाज़ुक होती जा रही है, और गहरे झटकों की वजह से कृषि सम्बन्धी आजीविका व खाद्य सुरक्षा पर असर हुआ है.
अध्ययन में स्पष्ट किया गया है कि फ़िलहाल स्थिति, किसी भी तरह के झटके के प्रति बहुत संवेदनशील है. मानवीय सहायता, ज़रूरतमन्दों तक बेहतर पहुँच, सुरक्षा व आर्थिक माहौल में स्थिरता के बिना आगे आने वाले महीनों में खाद्य असुरक्षा और बिगड़ सकती है.
खाद्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे वसंत के मौसम में बुआई के लिए दिन बीतते जा रहे हैं, जोखिम भी बढ़ रहे हैं. किसानों को ज़रूरी समर्थन के अभाव में कृषि उत्पादन में गिरावट आने, खाद्य असुरक्षा के गहराने और मानवीय सहायता आवश्यकताओं में उछाल आने की आशंका है.
यह विश्लेषण, हाल ही में हुए हिंसक टकराव के तुरन्त बाद की स्थिति को दर्शाता है, और मध्य पूर्व क्षेत्र में इसके व्यापक प्रभावों को समझने के लिए अभी कुछ और समय लग सकता है. यानि, दबाव बढ़ने की वजह से स्थिति अभी और बिगड़ सकती है या फिर पहले के अनुमान की तुलना में और लम्बे समय तक जारी रह सकती है.
इसके मद्देनज़र, यूएन एजेंसी ने किसानों को आपात कृषि समर्थन देने का आग्रह किया है, ताकि स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सके.
साथ ही, सबसे निर्बल आबादी की सुरक्षा के लिए समय पर मानवीय राहत मुहैया कराना, आजीविका सम्बन्धी सहायता प्रदान कराना अहम होगा, ताकि एक गहरे खाद्य सुरक्षा संकट से बचा जा सके.
Source : UN News
