गाज़ा के समर्थन में इटली थमा: सड़कों पर उतरे हजारों लोग, “सुमुद फ्लोटिला” पर हमले से भड़का गुस्सा

इटली में सोमवार को गाज़ा के समर्थन और “ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला” पर हुए इज़राइली हमले के विरोध में देशव्यापी आम हड़ताल ने पूरे देश की रफ्तार थाम दी। परिवहन, शिक्षा और लॉजिस्टिक्स जैसे कई अहम सेक्टर इस हड़ताल से प्रभावित रहे। मजदूर यूनियनों और सामाजिक संगठनों ने मिलकर इस विरोध का आह्वान किया था।

“स्टॉप एवरीथिंग” के नारे के साथ रोम, मिलान, नेपल्स और कई अन्य शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने गाज़ा में जारी हिंसा के खिलाफ आवाज़ बुलंद की और फ़िलिस्तीन के समर्थन में जमकर नारे लगाए। लोगों के हाथों में फ़िलिस्तीनी झंडे थे और भीड़ “फ्री फिलिस्तीन” के नारों से गूंज उठी।

राजधानी रोम में प्रदर्शनकारियों ने इटली सरकार से इज़राइल के साथ कथित “मिलीभगत” खत्म करने की मांग की। लोगों का कहना था कि सरकारें हथियारों पर खर्च बढ़ा रही हैं, जबकि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे जरूरी क्षेत्रों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

हड़ताल का असर आम लोगों की जिंदगी पर भी साफ दिखाई दिया। रोम की मेट्रो लाइन C और नेपल्स की लाइन 1 प्रभावित रहीं, जबकि मिलान में कई उपनगरीय ट्रेन सेवाएं रोक दी गईं। लिवोर्नो बंदरगाह के कर्मचारियों ने भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

प्रदर्शन में शामिल स्पेनिश-फ़िलिस्तीनी कार्यकर्ता सैफ अबू किश्क ने बताया कि हालिया हमले में फ्लोटिला की कुछ नौकाएं जब्त कर ली गईं, लेकिन इसके बावजूद कार्यकर्ताओं का हौसला टूटा नहीं है। उन्होंने कहा कि गाज़ा तक पहुंचने और वहां के लोगों के साथ एकजुटता दिखाने का अभियान जारी रहेगा।

अबू किश्क ने इज़राइली कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय और समुद्री कानून का उल्लंघन बताया। उनका कहना था कि पश्चिमी देशों की चुप्पी और समर्थन की वजह से ऐसे हमले लगातार हो रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे गाज़ा के समर्थन में आवाज़ उठाते रहें।

इतालवी प्रदर्शनकारी एंड्रिया ज़िक्कारो ने कहा कि फ्लोटिला पर हमला बेहद खतरनाक संकेत है। उन्होंने आरोप लगाया कि दुनिया “युद्ध की अर्थव्यवस्था” की तरफ बढ़ रही है, जहां इंसानों की जरूरतों से ज्यादा हथियारों को महत्व दिया जा रहा है।

एक अन्य प्रदर्शनकारी नतालिया मांचिनी ने कहा कि फ्लोटिला पर हमला “एक और अपमान” है, जिसने पश्चिमी लोकतंत्र के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया गया कि “ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला” ने तुर्की के मरमारिस बंदरगाह से 54 नौकाओं के साथ गाज़ा की नाकेबंदी तोड़ने के उद्देश्य से यात्रा शुरू की थी। सोमवार को इज़राइली नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इन नौकाओं को रोकना शुरू कर दिया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।

इससे पहले 29 अप्रैल को भी क्रेट द्वीप के पास एक समान फ्लोटिला पर हमला किया गया था। उस अभियान में 39 देशों के 345 लोग शामिल थे। उस दौरान 21 नौकाओं को जब्त कर लगभग 175 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था।

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