CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रक्रिया को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बोर्ड की मूल्यांकन व्यवस्था, टेंडर प्रक्रिया और री-इवैल्यूएशन फीस को लेकर केंद्र सरकार तथा CBSE पर कई सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार नहीं हुई, जिससे हजारों छात्रों के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
राहुल गांधी ने छात्र सार्थक सिद्धांत की सोशल मीडिया पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि CBSE द्वारा अगस्त में जारी किए गए नए टेंडर में कई महत्वपूर्ण शर्तों को हटा दिया गया था। उनके अनुसार, पहले उत्तर पुस्तिकाओं को ऑटोमैटिक रोबोटिक स्कैनर से 300 DPI गुणवत्ता में स्कैन करने की व्यवस्था थी, लेकिन बाद में स्कैनिंग गुणवत्ता घटाकर 200 DPI कर दी गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि धुंधली कॉपियां, स्कैनिंग के दौरान गायब हुए पन्ने और कुछ उत्तर पुस्तिकाओं का सही तरीके से डिजिटल रिकॉर्ड न होना केवल तकनीकी खामी नहीं, बल्कि किसी विशेष वेंडर को फायदा पहुंचाने वाली प्रक्रिया का परिणाम हो सकता है। राहुल गांधी ने इसे छात्रों के साथ हुआ “धोखा” बताया और कहा कि गलत मूल्यांकन की सबसे बड़ी कीमत विद्यार्थियों को चुकानी पड़ रही है।
छात्रों की शिकायतों ने बढ़ाई चिंता
इस पूरे मामले की चर्चा तब और तेज हुई जब कई छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं से जुड़ी कथित गड़बड़ियों को सार्वजनिक किया। छात्र सार्थक सिद्धांत ने कथित तौर पर स्कैन की गई कॉपियों की तस्वीरें साझा करते हुए सवाल उठाया कि यदि कॉपियां स्कैनर से स्कैन हुई थीं, तो उनमें ‘ड्रॉप शैडो’ और फोल्ड के निशान कैसे दिखाई दे रहे हैं।
वहीं, छात्र वेदांत ने दावा किया कि री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के दौरान उन्हें जो फिजिक्स की उत्तर पुस्तिका दिखाई गई, उसके पहले पन्ने पर उनकी लिखावट थी, लेकिन आगे के पन्नों पर किसी अन्य छात्र की हैंडराइटिंग नजर आ रही थी। वेदांत की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसके बाद कई अन्य छात्रों ने भी इसी तरह की शिकायतें सामने रखीं।
छात्रों से मुलाकात में राहुल ने सुनीं समस्याएं
राहुल गांधी ने हाल ही में CBSE के कुछ छात्रों से मुलाकात की और उनकी शिकायतें सुनीं। बातचीत के दौरान छात्रों ने आरोप लगाया कि उत्तर पुस्तिकाओं से जुड़े सवाल उठाने पर उन्हें सोशल मीडिया पर एंटी-नेशनल, डीप स्टेट एजेंट, आतंकवादी और पाकिस्तानी तक कहा गया।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि छात्र केवल अपनी उत्तर पुस्तिकाओं और परिणामों से जुड़े सवाल पूछ रहे हैं। उन्होंने कहा कि समस्या को स्वीकार करने और उसका समाधान खोजने की बजाय सवाल पूछने वाले छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है।
री-इवैल्यूएशन फीस पर भी उठाए सवाल
राहुल गांधी ने री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिका जांच के लिए ली जाने वाली फीस को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी छात्र के अंक मूल्यांकन में हुई गलती के कारण प्रभावित हुए हैं, तो सुधार के लिए भी छात्रों को ही भुगतान करना पड़ रहा है।
उन्होंने दावा किया कि एक छात्र को अपनी उत्तर पुस्तिका की समीक्षा और संबंधित प्रक्रियाओं के लिए 2000 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में छात्र ऐसे आवेदन कर रहे हैं और इस स्थिति में आर्थिक बोझ भी विद्यार्थियों पर ही पड़ रहा है।
कांग्रेस ने डेटा सुरक्षा को लेकर भी जताई चिंता
इस विवाद में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी हस्तक्षेप करते हुए आरोप लगाया कि 12वीं कक्षा के करीब 20 लाख छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थीं। उन्होंने इसे संभावित डेटा लीक का मामला बताते हुए छात्रों की निजता और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा पर सवाल उठाए।
COEMPT कंपनी को लेकर भी बहस
राहुल गांधी ने OSM प्रक्रिया का कार्य संभाल रही कंपनी COEMPT पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कंपनी का पूर्व नाम ग्लोबरेना था और पूछा कि उसे CBSE का ठेका किन परिस्थितियों में दिया गया। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि कंपनी के चयन में सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया गया या नहीं।
रिपोर्ट के अनुसार, COEMPT एडूटेक हैदराबाद की कंपनी है और तेलंगाना, कर्नाटक तथा पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में डिजिटल मूल्यांकन से जुड़े कार्य कर चुकी है। वर्ष 2019 में, जब कंपनी ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी, तब तेलंगाना बोर्ड परीक्षा के डेटा प्रोसेसिंग से जुड़े विवादों में उसका नाम सामने आया था।
CBSE ने आरोपों को बताया भ्रामक
CBSE ने राहुल गांधी के सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि COEMPT एडूटेक को कॉन्ट्रैक्ट देने में सभी निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया। बोर्ड के अनुसार लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।
CBSE का कहना है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और सटीक बनाती है। इससे अंक जोड़ने और डेटा एंट्री जैसी त्रुटियों की संभावना कम होती है। हालांकि, परिणाम घोषित होने के बाद कुछ छात्रों ने सर्वर डाउन होने, भुगतान संबंधी समस्याओं और धुंधले स्कैन पन्नों जैसी शिकायतें दर्ज कराई हैं।
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर छात्रों, विपक्ष और CBSE के बीच बहस जारी है। छात्रों की शिकायतों, राजनीतिक आरोपों और बोर्ड के स्पष्टीकरण के बीच यह मुद्दा देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
