गंज शहीदा मस्जिद विवाद पर भारत-पाकिस्तान में जुबानी टकराव, राष्ट्रपति ज़रदारी की टिप्पणी को भारत ने किया खारिज

नई दिल्ली/वाराणसी: वाराणसी स्थित गंज शहीदा मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद ने अब अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक स्वरूप ले लिया है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी द्वारा मस्जिद को हटाए जाने की प्रस्तावित कार्रवाई पर चिंता जताए जाने के बाद भारत ने उनकी टिप्पणी को देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार देते हुए सख्त आपत्ति दर्ज की है।

20 जून 2026 को पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने भारत में मुस्लिम धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने वाराणसी के काशी रेलवे स्टेशन के पास स्थित गंज शहीदा मस्जिद का उल्लेख करते हुए कहा कि मुस्लिम धार्मिक स्थलों को हटाने की घटनाओं से अल्पसंख्यक समुदायों के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।

ज़रदारी ने भारतीय सरकार से ऐसे कदमों पर रोक लगाने, अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने और साझा सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों को हटाने जैसी कार्रवाइयाँ सामाजिक सद्भाव और स्थिरता के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती हैं।

हालांकि, भारत ने इन टिप्पणियों को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति की टिप्पणियाँ पूरी तरह बेबुनियाद हैं और उन्हें भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।

जायसवाल ने अपने बयान में कहा, “भारत पाकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा की गई निराधार टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज करता है। पाकिस्तान का मानवाधिकारों के मामलों में रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है और विभिन्न धर्मों के अल्पसंख्यकों के खिलाफ व्यवस्थित उत्पीड़न का उसका लंबा इतिहास दुनिया के सामने है। ऐसे में राष्ट्रपति ज़रदारी की टिप्पणियाँ केवल एक सुनियोजित राजनीतिक हमला मानी जा सकती हैं।”

क्या है गंज शहीदा मस्जिद विवाद?

12 जून 2026 को रेलवे प्रशासन ने काशी रेलवे स्टेशन के निकट स्थित गंज शहीदा मस्जिद को नोटिस जारी किया। नोटिस में दावा किया गया कि मस्जिद रेलवे की भूमि पर “अवैध रूप से निर्मित” है और काशी रेलवे स्टेशन के विस्तार एवं पुनर्विकास परियोजना के तहत इस भूमि को खाली कराया जाना आवश्यक है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, मस्जिद की दीवार पर चस्पा किए गए इस नोटिस में प्रबंधन समिति को 20 जून 2026 तक परिसर खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर बलपूर्वक ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

कैंट रेलवे स्टेशन के अधीक्षक अर्पित गुप्ता ने कहा कि स्टेशन के विस्तार और निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने के लिए आसपास के अतिक्रमणों को हटाना आवश्यक है।

मस्जिद प्रबंधन समिति का क्या है पक्ष?

गंज शहीदा मस्जिद का प्रबंधन करने वाली इंतेजामिया मस्जिद कमेटी (आईएमसी) ने रेलवे के नोटिस को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है।

आईएमसी के संयुक्त सचिव एस.एम. यासीन ने मस्जिद के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह धार्मिक स्थल लगभग एक हजार वर्ष पुराना है और इसका निर्माण वर्ष 1034 में हुआ था।

उन्होंने कहा, “गंज शहीदा नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यहां दफन कई लोग स्वतंत्रता संघर्ष से जुड़े थे। यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि ऐतिहासिक महत्व का स्थान भी है। रेलवे 1887 में अस्तित्व में आया था और हम उनके नोटिस का जवाब दे रहे हैं।” यासीन ने यह भी बताया कि समिति ने जिला मजिस्ट्रेट से मुलाकात की है, जिन्होंने आश्वासन दिया है कि मस्जिद को जबरन नहीं गिराया जाएगा।

इंतेजामिया मस्जिद कमेटी का दावा है कि गंज शहीदा मस्जिद का उल्लेख 1883-84 के सेटलमेंट मानचित्रों सहित पुराने नक्शों में स्पष्ट रूप से दर्ज है। समिति के अनुसार, रेलवे के नोटिस में जिस मुकदमे का उल्लेख किया गया है, वह मस्जिद परिसर के पूर्वी हिस्से की भूमि से संबंधित है और उसका मस्जिद से कोई सीधा संबंध नहीं है।

कमेटी ने रेलवे के नोटिस को “भ्रामक” बताते हुए कहा है कि संबंधित मुकदमा मस्जिद परिसर से बाहर की भूमि को लेकर है, न कि मस्जिद को लेकर।

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