नई दिल्ली, 22 जून: राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में मदरसों, मस्जिदों, दरगाहों और अन्य धार्मिक स्थलों के खिलाफ चल रही प्रशासनिक कार्रवाइयों को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी पर मुस्लिम यूथ ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (एमवाईओ) ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आवश्यक हो सकती है, लेकिन इसके नाम पर दशकों पुराने धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाए जाने का आभास नहीं होना चाहिए।
संगठन ने कहा कि जिन संस्थानों का स्थानीय समाज के धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है, उनके खिलाफ किसी भी कार्रवाई से पहले निष्पक्ष जांच, कानूनी प्रक्रिया और प्रभावित पक्षों को सुनने का अवसर सुनिश्चित किया जाना चाहिए। एमवाईओ का मानना है कि पारदर्शिता और न्यायपूर्ण प्रक्रिया ही लोगों का विश्वास बनाए रख सकती है और सामाजिक सौहार्द को मजबूत कर सकती है।
एमवाईओ ने राजस्थान सरकार और संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि सभी कार्रवाइयों में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए, ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा कानून के दायरे में रहकर ही कोई कदम उठाया जाए।
संगठन ने कहा कि भारत की ताकत उसकी लोकतांत्रिक परंपरा, संवैधानिक मूल्यों और सभी धर्मों के प्रति सम्मान की भावना में निहित है। ऐसे समय में जब देश विकास और प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है।
एमवाईओ ने सभी पक्षों से शांति, संयम, न्याय और सामाजिक सौहार्द को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की है।
