राजनीति बहुत निर्मम होती है इसलिए इसकी समीक्षा भी।

(शकील अख्तर)

तृणमूल कांग्रेस अब कभी खड़ी नहीं हो पाएगी।

मगर एक और टूट के बाद भी शिवसेना उद्धव ठाकरे को बीजेपी खत्म नहीं कर सकती।

शिवसेना उद्धव ठाकरे रहेगी और अपनी वापसी की संभावनाओं के साथ।

क्यों?
क्योंकि जनता में उसके प्रति सहानुभूति है जिसे मोदी और अमित शाह खत्म नहीं कर पाए।

तृणमूल की तरह ही जदयू भी खत्म हो गई है। अगले लोकसभा या विधानसभा चुनाव में पहले लोकसभा ही होंगे यह दोनों पार्टियों कहीं नहीं दिखेंगी।

शरद पवार की पार्टी भी अपना अस्तित्व नहीं बचा पाएगी।

फिलहाल बसपा और आम आदमी पार्टी के बारे में कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं। मगर यह दोनों भी अपने पुराने शिखर पर अब कभी नहीं पहुंच सकतीं। ‌

बसपा का मामला बहुत ही अलग है। ‌ यहां इसकी प्रमुख मायावती खुद ही अपनी पार्टी खत्म कर रही हैं। लेकिन अपने सुरक्षा और सुविधा के लिए यह इंप्रेशन बनाए रखना चाहती हैं कि दलित वोटों पर उनका नियंत्रण है।

और लास्ट मोदी का उद्देश्य इन सबको खत्म करना या तोड़ना नहीं था यह तो रास्ते में आ गईं तो निपटाते चले गए।

उनका लक्ष्य था कांग्रेस को खत्म करना जो 12 साल में जरा भी नहीं कर पाए उल्टे आज की तारीख में कांग्रेस 2014 और 2019 के मुकाबले बहुत ज्यादा ताकतवर हो गई है।

2004 की तरह वापसी के तेवर में।

उस समय उम्मीदों का केंद्र सोनिया थीं आज राहुल हैं।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *