ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाज़ों की आवाजाही का भविष्य अब भी अनिश्चित है. संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षित मार्ग देने के बदले जहाज़ों से शुल्क वसूलना अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के विरुद्ध है.
गुरुवार को सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए, यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस महीने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते हमलों और जवाबी हमलों पर गहरी चिन्ता जताई. उन्होंने चेतावनी दी कि हालात नहीं बदले, तो इसके पूरे क्षेत्र और दुनिया के लिए “विनाशकारी परिणाम” हो सकते हैं.
विवादों के समाधान पर आयोजित बैठक में उन्होंने कहा, “स्थिति नियन्त्रण से बाहर होती जा रही है और अकल्पनीय हालात की कगार पर पहुँच चुकी है.”
उन्होंने कहा, “एक संकट दूसरे को जन्म देता है और तनाव में हर बढ़ोत्तरी अगली बढ़ोत्तरी का कारण बनती है. जैसे-जैसे यह सिलसिला फैल रहा है, हिंसक टकराव के बीच राजनैतिक उद्देश्य पीछे छूटते जा रहे हैं. अब समयपीछे हटने का है.”
संक्षेप में
- होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाज़ों की आवाजाही लगभग पूरी तरह ठप है.
- लगभग 500 जहाज़ों पर सवार 6 हज़ार समुद्री नाविक अब भी फँसे हुए हैं.
- सुरक्षित मार्ग के बदले जहाज़ों से शुल्क वसूलना अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के विरुद्ध है.
- ऊर्जा की ऊँची क़ीमतों से वैश्विक व्यापार का कुल मूल्य बढ़ा है.
स्थिति की ताज़ा जानकारी देते हुए, संयुक्त राष्ट्र के अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO ) ने यूएन न्यूज़ को बताया कि 12 और 13 जुलाई को लड़ाई फिर शुरू होने और जहाज़ों पर नए हमलों के बाद, इस संकरे जलमार्ग से अब “बहुत कम जहाज़, या शायद एक भी नहीं’ गुज़र रहा है.”
IMO महासचिव आरसेनियो डोमिन्गवेज़ ने फ़ारस की खाड़ी में लंगर डाले लगभग 500 जहाज़ों पर फँसे 6 हज़ार समुद्री नाविकों की स्थिति पर गहरी चिन्ता जताई.
उन्होंने कहा, “हमें याद रखना चाहिए कि ये निर्दोष लोग हैं. उन्हें अपना काम करने का प्रशिक्षण मिला है, युद्ध का नहीं. जहाज़ भी मिसाइलों और ड्रोन से बचाव के लिए तैयार नहीं होते.”
IMO प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि समुद्री नाविक वैश्विक व्यापार में अहम भूमिका निभाते हैं और उनके बिना “जहाज़रानी सम्भव नहीं होगा.”
उन्होंने कहा, “उनके बिना जहाज़ों से ले जाए जाने वाले 90 प्रतिशत सामान अपने अन्तिम गन्तव्य तक नहीं पहुँच पाएँगे और इसका असर हम सभी पर पड़ेगा.”
आरसेनियो डोमिन्गवेज़ ने चेतावनी दी कि हाल के वर्षों में जहाज़रानी क्षेत्र को “अपनी सीमा तक धकेल दिया गया है.” उन्होंने यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के हमले से काला सागर में आए व्यवधान और लाल सागर में जारी अनिश्चितता का उल्लेख किया.
यमन में हूती अलगाववादियों ने सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला करने और बाब अल-मन्देब जलडमरूमध्य को बन्द करने का दावा किया है, जिससे स्वेज़ नहर से आने-जाने वाले जहाज़ों की आवाजाही लगभग रुक गई है.
उन्होंने कहा, “हमारी क्षमता पर भारी दबाव पड़ा है. हिंसक टकराव वाले क्षेत्रों से आने वाले ज़रूरी सामान और युद्ध से प्रभावित देशों के समुदायों के लिए आवश्यक वस्तुओं का कोई विकल्प नहीं है.”
वैश्विक ऊर्जा की जीवनरेखा
शान्ति के समय, खाड़ी क्षेत्र से दुनिया भर में भेजे जाने वाले तेल और गैस का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुज़रता है.
IMO प्रमुख आरसेनियो डोमिन्गवेज़ ने कहा कि हिंसक टकराव समाप्त होने और जलमार्ग सुरक्षित होने तक जहाज़ों को इसे पार करने का प्रयास नहीं करना चाहिए.
उन्होंने कहा, “जलडमरूमध्य के भावी प्रबन्धन पर बहुत कम प्रगति हुई है. बातचीत आगे बढ़ाने के लिए पहले तनाव कम करना ज़रूरी है.”
नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
यूएन एजेंसी की पहली प्राथमिकता उन सभी समुद्री नाविकों को सुरक्षित बाहर निकालना है, जो 28 फ़रवरी को हिंसक टकराव शुरू होने के बाद से जलडमरूमध्य में फँसे हुए हैं. उसी दिन इसराइल और अमेरिका ने ईरान पर बमबारी शुरू की थी.
आरसेनियो डोमिन्गवेज़ ने कहा, “सभी समुद्री नाविकों के सुरक्षित होने के बाद यह सुनिश्चित करना होगा कि क्षेत्र से बारूदी सुरंगें हटा दी गई हैं और जलडमरूमध्य जहाज़ों के लिए सुरक्षित है. इसके बाद चरणबद्ध ढंग से आवाजाही फिर शुरू करनी होगी और प्रतिदिन लगभग 135 जहाज़ों के पुराने स्तर तक लौटना होगा.”
उन्होंने कहा, “ये गारंटी मिलने के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य के भावी प्रबन्धन पर बातचीत आगे बढ़ाई जाएगी और पूरी प्रक्रिया अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के अनुरूप होगी.”
बातचीत जारी
ऐसी गारंटी मिलने की सम्भावना पर IMO महासचिव ने कहा कि दोनों पक्षों ने कुछ “क़दम” उठाए हैं और कई वर्षों बाद अब वे फिर बातचीत कर रहे हैं.
आरसेनियो डोमिन्गवेज़ ने बताया कि हिंसक टकराव समाप्त करने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच पिछले महीने हुआ समझौता ज्ञापन अब भी लागू है. यही समझौता 14-सूत्री योजना पर आगे की बातचीत और ज़रूरी स्पष्टीकरण का आधार है.
उन्होंने किसी देश का नाम लिए बिना कहा कि संयुक्त राष्ट्र के व्यापक प्रयासों के साथ-साथ कई अन्य देश भी द्विपक्षीय वार्ता में शामिल हैं.
उन्होंने कहा, “उम्मीद है कि इससे हालात को दो सप्ताह पहले की स्थिति में वापस लाने और आगे प्रगति करने में मदद मिलेगी.”
समुद्री मार्ग की स्वतन्त्रता
IMO प्रमुख ने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून किसी देश को जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले व्यापारिक जहाज़ों से शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं देता.
उन्होंने मलक्का और सिंगापुर जलडमरूमध्यों के प्रबन्धन से जुड़े वर्ष 2007 के समझौते को एक सफल उदाहरण बताया.
उन्होंने कहा, “उस व्यवस्था में किसी तरह का शुल्क या फ़ीस नहीं है. यह बात बिल्कुल स्पष्ट होनी चाहिए.”
नागरिक निशाना नहीं हैं
इससे जुड़ी एक अन्य ख़बर में, स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने गुरुवार को अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू हुए हिंसक टकराव की निन्दा की. उन्होंने कहा कि इसका असर खाड़ी देशों पर भी पड़ा है और आम नागरिकों की जान गम्भीर ख़तरे में है.
मानवाधिकार परिषद द्वारा नियुक्त 10 विशेषज्ञों ने एक संयुक्त वक्तव्य में ईरान के नागरिक बुनियादी ढाँचे पर हमलों की ख़बरों का उल्लेख किया. इनमें देश के दक्षिणी बन्दरगाहों पर हमले और चाबहार शहर में बिजली आपूर्ति ठप होना शामिल है.
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ “प्रक्षेपास्त्र” बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास भी गिरे. रेल मार्गों और आग़ तेकेह ख़ान पुल को नुक़सान पहुँचा, जबकि एक विलवणीकरण संयंत्र पर हमले के कारण कथित रूप से 10 हज़ार लोगों की जल आपूर्ति बन्द हो गई.
उन्होंने कहा, “स्थानीय अधिकारियों और ईरानी मीडिया ने सेमनान हवाई अड्डे, गेहूँ के एक भंडारगृह, बोतलबन्द पानी के कारख़ाने और अहवाज़ में बच्चों के कैंसर अस्पताल से सटे इलाक़ों पर हमलों की भी जानकारी दी है. इसके कारण मरीज़ों को अस्पताल से निकालना पड़ा.”
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, हिंसक टकराव फिर शुरू होने के बाद से 50 लोगों की मौत हुई है और 500 से अधिक घायल हुए हैं.
विशेषज्ञों ने कहा, “जान गंवाने वालों में मछुआरे, हमलों की चपेट में आए रात की पाली के कर्मचारी और अनौपचारिक बस्तियों के निवासी शामिल हैं – ऐसे लोग जो पहले से ही समाज के हाशिए पर हैं और लम्बे समय से बुनियादी सेवाओं से वंचित रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि ईरान के लोग “एक बार फिर अमेरिका के नए हमलों और अपनी सरकार के आन्तरिक दमन के बीच फँस गए हैं.”
स्वतंत्र विशेषज्ञ संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारी नहीं होते हैं और उन्हें अपने काम के लिए कोई वेतन नहीं मिलता.
होर्मुज़ संकट से वैश्विक व्यापार के मूल्य में उछाल
अन्तरराष्ट्रीय व्यापार के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, अमेरिका-ईरान हिंसक टकराव के बीच वर्ष 2026 की पहली छमाही में वस्तुओं का वैश्विक व्यापार 13.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गया. यह वर्ष 2025 की इसी अवधि की तुलना में 12.5 प्रतिशत अधिक है.
संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास संस्था, UNCTAD ने कहा कि यह बढ़ोत्तरी सामान की मात्रा बढ़ने से नहीं, बल्कि अमेरिका-ईरान युद्ध से सीधे जुड़ी ऊँची क़ीमतों के कारण हुई है.
इसी अवधि में सेवाओं के व्यापार में भी 10.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई. इससे वैश्विक व्यापार के कुल मूल्य में लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर का इज़ाफ़ा हुआ है और वर्ष के अन्त तक इसके रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने की सम्भावना है.
