न्यूयार्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बढ़ते परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को लेकर एक बार फिर तीखा रुख अपनाया लिया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच से ईरान को चेतावनी देते हुए वैश्विक सुरक्षा के लिए इसके खतरों पर खुलकर बात की।
वैश्विक नेताओं के बीच अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि ईरान लगातार अपनी सैन्य क्षमताओं और लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों को मजबूत कर रहा है, जो वैश्विक स्थिरता और अमेरिका के सहयोगियों के लिए सीधा खतरा पैदा करती हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। ट्रंप के अनुसार, मध्य पूर्व में किसी भी संभावित बड़े संकट को रोकने के लिए कड़े कदम उठाना बेहद जरूरी है।
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच परमाणु समझौतों, क्षेत्रीय गतिविधियों और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि कूटनीति के रास्ते खुले हैं, लेकिन यदि ईरान अपनी जिद पर अड़ा रहता है और अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी करता है, तो अमेरिका अपनी और अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए सभी विकल्पों का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेगा।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय जानकारों और कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ती बयानबाजी से पहले से ही अस्थिर मध्य पूर्व के हालात और अधिक बिगड़ सकते हैं। वहीं, ईरानी अधिकारियों का हमेशा से यह पक्ष रहा है कि उनका मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह से रक्षात्मक है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। तेहरान ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उसके खिलाफ कोई भी सैन्य कार्रवाई की गई, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
संयुक्त राष्ट्र के मंच से आई इस चेतावनी ने यह साफ कर दिया है कि ईरान का परमाणु संकट आने वाले दिनों में वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा का एक सबसे संवेदनशील और बड़ा मुद्दा बना रहेगा।
