MANUU के एलाइड हेल्थकेयर छात्रों की मांग: NCAHP में कोर्स शामिल हों, रजिस्ट्रेशन की अनिश्चितता दूर हो

हैदराबाद, 22 अक्टूबर 2026: मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (MANUU), हैदराबाद के डिपार्टमेंट ऑफ वोकेशनल स्टडीज़ एंड स्किल डेवलपमेंट के छात्रों ने अपने एलाइड हेल्थकेयर कोर्सेज़ को नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स (NCAHP) के फ्रेमवर्क में शामिल करने और प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया स्पष्ट करने की मांग की है। छात्रों ने राष्ट्रीय मीडिया से भी अपील की है कि वह उनकी चिंताओं को प्रमुखता से उठाए।

छात्रों के अनुसार, B.Voc. और M.Voc. के तहत मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी (MLT), मेडिकल इमेजिंग टेक्नोलॉजी (MIT) तथा इमरजेंसी एंड ट्रॉमा केयर टेक्नोलॉजी (ETT) जैसे प्रोग्राम्स में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों के सामने रजिस्ट्रेशन तथा अपनी योग्यताओं की मान्यता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

करियर और प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन को लेकर चिंता

छात्रों का कहना है कि इन कोर्सेज़ को विश्वविद्यालय के अकादमिक ढांचे के तहत संचालित किया गया है। उनके मुताबिक, पाठ्यक्रम में थ्योरी, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, क्लिनिकल एक्सपोज़र, क्रेडिट सिस्टम और दक्षता विकास जैसे पहलू शामिल हैं। उनका दावा है कि मौजूदा पाठ्यक्रम के कई प्रमुख तत्व NCAHP के निर्धारित मानकों से मेल खाते हैं। छात्रों को आशंका है कि संबंधित कोर्सेज़ को NCAHP फ्रेमवर्क में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किए जाने से उनके प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन, रोजगार, उच्च शिक्षा और करियर प्रोग्रेशन पर असर पड़ सकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि कोर्सेज़ को शामिल न किए जाने के कारण स्पष्ट किए जाएं और पाठ्यक्रम, क्रेडिट सिस्टम, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग तथा क्लिनिकल कंपोनेंट्स का औपचारिक मूल्यांकन किया जाए। साथ ही, मौजूदा छात्रों और ग्रेजुएट्स की रजिस्ट्रेशन पात्रता पर लिखित स्पष्टीकरण जारी किया जाए।

NCAHP अधिकारियों से मुलाकात

छात्रों के मुताबिक, 8 अक्टूबर 2026 को उनके प्रतिनिधियों ने नई दिल्ली में NCAHP के सचिव उमेश बालोंडा से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। प्रतिनिधियों ने MANUU के पाठ्यक्रम की समीक्षा करने, संबंधित कोर्सेज़ को लागू फ्रेमवर्क में शामिल करने और पात्र छात्रों तथा ग्रेजुएट्स के लिए रजिस्ट्रेशन की स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित करने का अनुरोध किया। छात्रों ने यह भी कहा कि नियामकीय बदलावों के दौरान उन विद्यार्थियों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए, जिन्होंने पहले से लागू अकादमिक व्यवस्था के तहत इन प्रोग्राम्स में दाखिला लिया और अपनी पढ़ाई पूरी की है।

अन्य विश्वविद्यालयों के समान कोर्सेज़ पर भी स्पष्टता की मांग

छात्रों ने MANUU के साथ जामिया मिल्लिया इस्लामिया, पांडिचेरी यूनिवर्सिटी और अन्य संस्थानों में संचालित समान एलाइड हेल्थकेयर प्रोग्राम्स के संदर्भ में एक समान और पारदर्शी नीति अपनाने की मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित संस्थानों के कोर्सेज़ का मूल्यांकन स्पष्ट मानदंडों के आधार पर किया जाना चाहिए, ताकि समान शैक्षणिक कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग स्थिति पैदा न हो। उन्होंने NCAHP, यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC), MANUU और संबंधित सरकारी विभागों के बीच समन्वय की भी अपील की है।

सरकार और नियामक संस्थाओं से अपील

छात्रों ने मांग की है कि उनके कोर्सेज़ को NCAHP फ्रेमवर्क में शामिल करने पर पारदर्शी तरीके से विचार किया जाए, मौजूदा छात्रों और ग्रेजुएट्स की रजिस्ट्रेशन पात्रता स्पष्ट की जाए तथा पहले के पाठ्यक्रम के तहत प्राप्त योग्यताओं की मान्यता पर लिखित दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। छात्रों का कहना है कि उनकी मांग नियामकीय मानकों का विरोध करना नहीं, बल्कि अपने पाठ्यक्रमों का निष्पक्ष मूल्यांकन और प्रोफेशनल भविष्य को लेकर स्पष्टता सुनिश्चित करना है।

नोट: यह खबर छात्रों की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी और उनके दावों पर आधारित है। NCAHP, UGC और MANUU का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी शामिल किया जाना चाहिए।

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