इसराइल ने हमास पर युद्धविराम समझौते का उल्लंघन का आरोप लगाते हुए ग़ाज़ा में मानवीय सहायता की आपूर्ति को सीमित करने की घोषणा की है. उधर, यूएन मानवतावादी कार्यालय ने विश्व भर में बढ़ती आवश्यकताओं के मद्देनज़र, दानदाताओं से अपना वित्तीय समर्थन बढ़ाने का आग्रह किया है.
इसराइल के अनुसार, अब तक केवल चार मृत बन्धकों के शवों को लौटाया गया है, जोकि हाल ही में हुए युद्धविराम समझौते का उल्लंघन है. इस वजह से इसराइल ने ग़ाज़ा में मानवीय सहायता की आपूर्ति को सीमित करने की घोषणा की है.
संयुक्त राष्ट्र और अन्य अन्तरराष्ट्रीय संगठनों के साथ समन्वय करने वाली इसराइली सैन्य एजेंसी ने मंगलवार को यह जानकारी दी है.
उसके द्वारा जारी वक्तव्य के अनुसार, बुधवार से केवल 300 ट्रकों को ही ग़ाज़ा में मानवीय सहायता की आपूर्ति के लिए प्रवेश की अनुमति दी जाएगी, हालांकि पहले 600 ट्रकों पर सहमति हुई थी. इसके साथ ही, बाज़ारों के लिए सामान की आपूर्ति भी रोक दी जाएगी.
इसराइली एजेंसी के अनुसार, ग़ाज़ा में ईंधन और गैस आपूर्ति की अनुमति तब तक नहीं दी जाएगी, जब तक यह मानवीय आवश्यकताओं के सिलसिले में न हो.
ग़ाज़ा में यूएन मानवतावादी कार्यालय की प्रवक्ता ओल्गा चेरेवको ने बताया कि उनका संगठन दोनों पक्षों को युद्धविराम समझौते का पूर्ण रूप से पालन करने के लिए प्रोत्साहित करना जारी रखेगा.
“हमारी यह आशा है कि बन्धकों के शवों को सौंपा जाएगा और युद्धविराम को लागू रखा जाएगा.”
OCHA कार्यालय ने फ़िलहाल 60 दिनों के लिए अपनी योजना तैयार की है, जिसके तहत हज़ारों टन मानवीय सहायता सामग्री ग़ाज़ा के लिए रवाना की गई है.
यूएन उप प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में पत्रकारों को बताया कि युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक संयुक्त राष्ट्र और अन्य मानवीय सहायता संगठनों के लिए ग़ाज़ा में आवाजाही पहले से आसान हुई है, विशेष रूप से उन इलाक़ों में जहाँ से इसराइली सेना लौट चुकी है.
उन्होंने सचेत किया कि ग़ाज़ा के विभिन्न इलाक़ों में बिना फटे हुए विस्फोटक, आयुध सामग्री बिखरी हुई है, जिससे विस्थापित फ़लस्तीनियों और मानवीय सहायताकर्मियों के लिए ख़तरा है.
हिंसक टकराव के बाद इसके साथ-साथ विस्थापन, ध्वस्त बुनियादी ढाँचे, बदहाल बुनियादी सेवाओं समेत अन्य चुनौतियों से निपटा जाना ज़रूरी है.
सहायता अभियान के लिए धनराशि की दरकार

वर्ष 2025 के अन्तिम महीनों में, यूएन मानवीय सहायता संगठनों ने दानदाताओं से वित्तीय समर्थन बढ़ाने का आग्रह किया है ताकि उन क्षेत्रों में मानवतावादी कार्य जारी रखे जा सकें, जहाँ सहायता बजट में कटौती से राहत प्रयास प्रभावित हुए हैं.
मानवीय सहायता मामलों में समन्वय के लिए यूएन कार्यालय ने बताया कि 2025 में जीवनरक्षक गतिविधियों के लिए 45.3 अरब डॉलर की आवश्यकता थी, मगर सितम्बर तक केवल 21 प्रतिशत धनराशि (9.6 अरब डॉलर) को जुटा पाना ही सम्भव हो पाया.
पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में यह 40 प्रतिशत की बड़ी गिरावट को दर्शाता है.
यूएन कार्यालय ने ज़ोर देकर कहा है कि धनराशि की कमी से दुनिया भर में लाखों लोगों पर गहरा असर हो रहा है, जो स्वास्थ्य देखभाल, भोजन और शिक्षा से वंचित हैं.
अफ़ग़ानिस्तान में इस वर्ष 420 से अधिक स्वास्थ्य केन्द्रों को बन्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा है, जिससे 30 लाख लोग के पास ज़रूरी देखभाल सेवा उपलब्ध नहीं है.
सोमालिया में खाद्य सहायता में कटौती की गई है, और इस वर्ष नवम्बर में केवल 3.5 लाख लोगों को ही समर्थन मिल पाएगा, जबकि अगस्त में 10 लाख से अधिक लोगों को सहायता मुहैया कराई जा रही थी. वहीं, बांग्लादेश में पाँच लाख रोहिंग्या शरणार्थी बच्चे शिक्षा से दूर हो गए हैं.
इन चुनौतियों के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र अपने साझेदार संगठनों के साथ मिलकर ज़रूरतमन्दों तक मदद पहुँचाने के लिए हरसम्भव प्रयासों में जुटे हैं.
यूएन मानवतावादी कार्यालय ने दानदाताओं से अपील की है कि मानवीय सहायता में निवेश को बढ़ाना होगा, एक ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर विशाल आवश्यकताएँ हैं, और ज़िन्दगियों की रक्षा के लिए समर्थन अहम है.
Source: UN News Hindi
