ग़ज़ा में मानवीय तबाही चरम पर, ज़िंदगी की बुनियादी ज़रूरतें भी नदारद

सिविल डिफेंस का अलार्म: अंतरराष्ट्रीय समुदाय तुरंत हस्तक्षेप करे

ग़ज़ा पट्टी में मानवीय स्थिति एक खतरनाक मोड़ पर पहुँच चुकी है। ग़ज़ा सिविल डिफेंस के प्रवक्ता महमूद बसाल ने चेतावनी दी है कि हालात अब अत्यंत गंभीर और अभूतपूर्व हो चुके हैं, जहाँ जीवन की सबसे बुनियादी आवश्यकताएँ तक पूरी तरह खत्म हो गई हैं।

सोमवार को जारी प्रेस बयान में बसाल ने कहा कि इज़राइली कब्ज़ा प्रशासन, इज़राइली बंदियों के अवशेषों के मुद्दे को बहाना बनाकर ग़ज़ा में आवश्यक मानवीय राहत सामग्री के प्रवेश को रोक रहा है, जिससे संकट और गहराता जा रहा है।

उन्होंने खुलासा किया कि युद्ध की शुरुआत से अब तक हज़ारों फ़िलिस्तीनी शव मलबे के नीचे दबे हुए हैं। इनमें बच्चे, महिलाएँ और विशेष ज़रूरतों वाले लोग शामिल हैं। भारी मशीनरी की अनुपलब्धता के कारण इन शवों को अब तक बाहर नहीं निकाला जा सका है।

बसाल के अनुसार, हज़ारों नागरिक—विशेष रूप से बच्चे, महिलाएँ और बीमार लोग—युद्ध और उसके बाद की परिस्थितियों में ऐसी पीड़ा झेल रहे हैं जो मानव सहनशीलता से परे है। उन्होंने चेताया कि यदि यह स्थिति जारी रही, तो जान-माल का नुकसान और बढ़ेगा और मानवीय त्रासदी और भी विकराल रूप ले लेगी।

ग़ज़ा सिविल डिफेंस ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, मानवाधिकार संगठनों और मध्यस्थों से तत्काल और ठोस कार्रवाई की मांग की है। इसमें रफ़ाह सीमा क्रॉसिंग को पूरी तरह खोलने, मलबा हटाने और शवों की बरामदगी के लिए भारी मशीनरी की अनुमति, मानवीय व चिकित्सीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति, और पुनर्निर्माण कार्य तुरंत शुरू करने की अपील शामिल है।

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