करियर कनेक्ट | क्रिकेट अंपायर: मैदान का सबसे अहम निर्णायक कैसे बनें?

क्रिकेट के मैदान पर 22 खिलाड़ी खेलते हैं, लेकिन मैच की दिशा तय करने की ताक़त जिन दो लोगों के हाथ में होती है, वे किसी टीम का हिस्सा नहीं होते। एक सही या ग़लत फ़ैसला पूरा मैच पलट सकता है। और वो हैं — क्रिकेट अंपायर।

अंपायरिंग केवल नियम याद रखने का काम नहीं है। इसके पीछे सालों की मेहनत, ट्रेनिंग, अनुभव और मानसिक मज़बूती छिपी होती है। ऐसे में सवाल उठता है की अंपायर कैसे बनते हैं? क्या इसके लिए क्रिकेट खेलना ज़रूरी है? और इस प्रोफेशन में कमाई कितनी होती है?

तो चलिए जानते है कौन बन सकता है क्रिकेट अंपायर?

अंपायर बनने के लिए किसी ख़ास डिग्री की ज़रूरत नहीं होती। 12वीं पास उम्मीदवार भी इस फ़ील्ड में आ सकते हैं। पूर्व बीसीसीआई और आईसीसी पैनल अंपायर एस.के. बंसल के मुताबिक, “क्रिकेट की अच्छी समझ ज़रूरी है। जिसने कभी क्रिकेट खेला हो, उसे मैदान की परिस्थितियां बेहतर समझ आती हैं, लेकिन सिर्फ़ खिलाड़ी होना ही काफ़ी नहीं है।” हालांकि, अगर किसी ने क्रिकेट नहीं खेला है, तो उसके लिए यह राह थोड़ी मुश्किल हो सकती है।

ज़रूरी स्किल्स क्या हैं?

क्रिकेट के नियमों की गहरी समझ
अच्छा कम्युनिकेशन स्किल
अंग्रेज़ी भाषा का ज्ञान कियुंके (इंटरनेशनल क्रिकेट की कॉमन लैंग्वेज)
मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास
फ़िज़िकल फ़िटनेस

उम्र सीमा क्या है? अंपायरिंग की परीक्षा देने के लिए:

न्यूनतम उम्र: 18 साल
अधिकतम उम्र: 40 साल

अंपायर बनने की प्रक्रिया क्या है?

स्टेप 1: स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन से शुरुआत, इसके लिए सबसे पहले अपने राज्य की क्रिकेट एसोसिएशन में रजिस्ट्रेशन कराना होता है। जैसे: दिल्ली: DDCA, उत्तर प्रदेश: UPCA

अंतरराष्ट्रीय और आईपीएल अंपायर अनिल चौधरी बताते हैं, “रजिस्ट्रेशन के लिए पढ़ाई की कोई बाध्यता नहीं है। बस एसोसिएशन से संपर्क करें और अपनी रुचि ज़ाहिर करें।”

स्टेप 2: लोकल और लीग मैचों में अंपायरिंग, जैसे : शुरुआत में: क्लब मैच, लोकल लीग, जूनियर टूर्नामेंट यहीं से अनुभव बनता है और सीनियर अंपायरों से सीखने का मौक़ा मिलता है।

स्टेप 3: स्टेट लेवल परीक्षा : राज्य क्रिकेट एसोसिएशन अपने पैनल के लिए परीक्षा कराता है। इसके बाद योग्य उम्मीदवारों के नाम बीसीसीआई को भेजे जाते हैं।

स्टेप 4: बीसीसीआई परीक्षा : बीसीसीआई की परीक्षा में तीन चरण होते हैं:

थ्योरी
प्रैक्टिकल
वाइवा

तीनों को मिलाकर 90% अंक लाने पर आगे बढ़ने का रास्ता खुलता है।

अंपायरिंग में प्रमोशन कैसे होता है?

शुरुआत में अंडर-15 और अंडर-19 मैच
फिर रणजी ट्रॉफ़ी, दलीप ट्रॉफ़ी, टी-20
उसके बाद आईपीएल
और फिर इंटरनेशनल क्रिकेट

इस पूरे सफ़र में 5–6 साल लग सकते हैं।

आईसीसी अंपायर कैसे बनते हैं?

आईसीसी का एलीट अंपायर पैनल दुनिया के चुनिंदा बेहतरीन अंपायरों से बनता है। एस.के. बंसल बताते हैं, “बीसीसीआई के सैकड़ों अंपायरों में से सिर्फ़ 2–4 ही इंटरनेशनल लेवल तक पहुंच पाते हैं। वहां गलती की गुंजाइश लगभग शून्य होती है।

क्या पढ़ना ज़रूरी है?

अंपायर बनने के लिए ये किताबें अहम मानी जाती हैं: MCC Laws of Cricket, Tom Smith’s Cricket Umpiring and Scoring, बीसीसीआई की लेटेस्ट प्लेइंग कंडीशंस

फ़िटनेस कितनी ज़रूरी है?

आंखों की रोशनी (चश्मे के साथ भी स्वीकार्य)
वज़न नियंत्रण
7–8 घंटे मैदान में खड़े रहने की क्षमता

अनिल चौधरी कहते हैं, “अगर अंपायर फ़िज़िकली फ़िट नहीं होगा, तो मानसिक रूप से भी थक जाएगा — और वहीं से ग़लतियां शुरू होती हैं।” बीसीसीआई अंपायर साल में औसतन 40–70 दिन मैच करते हैं।

रिटायरमेंट और आगे का रास्ता

आधिकारिक रिटायरमेंट उम्र: 65 साल
ज़्यादातर अंपायर 60 के आसपास रिटायर होते हैं
रिटायरमेंट के बाद बीसीसीआई की ओर से कोई स्थायी पेंशन नहीं

निष्कर्ष

क्रिकेट अंपायरिंग एक सम्मानजनक, चुनौतीपूर्ण और अच्छी कमाई वाला करियर है। लेकिन इसके लिए धैर्य, फिटनेस, अनुशासन और लगातार सीखते रहने की ज़रूरत होती है।

अगर आप मैदान में निष्पक्ष फ़ैसले लेने का साहस रखते हैं, तो यह प्रोफेशन आपके लिए है।

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