इरादों में हो दम तो मुमकिन है हर मंज़िल: कश्मीर की साइका लतीफ़ ने 4 महीने में हाथ से लिखा मुकम्मल कुरान

जम्मू-कश्मीर: कहते हैं कि अगर मन में सच्ची लगन और अटूट विश्वास हो, तो इंसान नामुमकिन को भी मुमकिन कर दिखाता है। जम्मू-कश्मीर के टंगमर्ग की रहने वाली साइका लतीफ़ ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है, जिसकी चर्चा आज पूरी घाटी और सोशल मीडिया पर गर्व के साथ हो रही है।

चार महीने की तपस्या और अटूट सब्र, साइका लतीफ़ ने मात्र चार महीनों के अल्प समय में पूरे कुरान शरीफ को उसके उर्दू तर्जुमे यानी (अनुवाद) के साथ अपने हाथों से लिखकर एक नया इतिहास रच दिया है। जहाँ आज की पीढ़ी डिजिटल दुनिया में व्यस्त है, वहीं साइका ने अपनी आस्था और लेखन कला के प्रति समर्पण दिखाते हुए इस बड़े काम को कर दिखाया है।

आमतौर पर कुरान शरीफ को हाथ से लिखने में वर्षों का समय लग जाता है, लेकिन साइका ने दिन-रात की मेहनत से इसे सिर्फ 120 दिनों में पूरा किया| उन्होंने अरबी मूल पाठ के साथ-साथ उसके अर्थ को समझने के लिए उर्दू अनुवाद को भी शामिल किया है, जो उनकी गहरी समझ को दर्शाता है। साइका की यह उपलब्धि केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धैर्य (सब्र), समय प्रबंधन और कठिन परिश्रम की एक मिसाल है।

गर्व से ऊंचा हुआ टंगमर्ग का सिर, कियुंके जैसे ही साइका की यह खबर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आई, उन्हें ‘टंगमर्ग की बेटी’ के नाम से सराहा जाने लगा। उनकी इस क़ाबिले-फ़ख्र कामयाबी पर स्थानीय लोग उन्हें दुआएं दे रहे हैं। साइका की यह कहानी हमें सिखाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद, यदि संकल्प दृढ़ हो, तो बड़ी से बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है।

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