वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में बढ़ती सैन्य कार्रवाई: क्या हो रहा है और क्यों हालात तनावपूर्ण हैं

वेस्ट बैंक और कब्जे वाले पूर्वी यरुशलम में हालात तेजी से तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। गुरुवार रात से लेकर शुक्रवार सुबह तक इजरायली सेना ने कई शहरों, कस्बों और शरणार्थी शिविरों में एक साथ बड़े पैमाने पर छापेमारी और गिरफ्तारी अभियान चलाया। इन कार्रवाइयों से आम लोगों के बीच डर और अस्थिरता का माहौल और गहरा हो गया है।

सबसे पहले, यरुशलम के उत्तर में स्थित अल-राम इलाके में भारी संख्या में सैनिकों ने एक घर को निशाना बनाया। यह घर एक ऐसे फिलिस्तीनी व्यक्ति के परिवार का था, जिसकी पहले मौत हो चुकी है। सेना ने घर की तलाशी ली और सामान को नुकसान पहुंचाया। इसे उस नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें मारे गए लोगों के परिवारों पर भी दबाव डाला जाता है।

नाब्लुस में स्थिति और ज्यादा गंभीर दिखाई दी। यहां अलग-अलग इलाकों हाइफा स्ट्रीट, बलाटा शरणार्थी शिविर और सूफियान स्ट्रीट में छापेमारी की गई। एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया और कई घरों में घुसकर तलाशी ली गई। स्थानीय लोगों के साथ दुर्व्यवहार की भी खबरें आईं, जिससे तनाव और बढ़ गया।

इसी तरह जेनिन के पास बुरक़िन और क़ल्कीलिया के नबी इलियास गांव में भी सैन्य कार्रवाई हुई। इन जगहों पर सैनिकों ने घरों में घुसकर तलाशी अभियान चलाया।

रामल्ला क्षेत्र में जलाजोन शरणार्थी शिविर और अल-मज़रा अल-शर्किया को निशाना बनाया गया। यहां एक और अलग तरह की घटना सामने आई, कुछ इजरायली बसने वालों ने तुर्मुस अय्या कस्बे के प्रवेश पर झंडे लगाए, जिसे स्थानीय लोगों ने उकसाने वाली कार्रवाई बताया। यह सब सेना की मौजूदगी में हुआ, जिससे लोगों में नाराज़गी और बढ़ी।

दक्षिणी वेस्ट बैंक में भी कार्रवाई जारी रही। बेथलहम के पास ऐदा शरणार्थी शिविर और यत्ता के पास अल-दीरात गांव में घरों की तलाशी ली गई और लोगों को डराया गया।

इन सभी घटनाओं को एक साथ देखें तो साफ होता है कि यह सिर्फ अलग-अलग छापेमारी नहीं, बल्कि एक व्यापक सैन्य दबाव की रणनीति का हिस्सा है, जो कई इलाकों में एक ही समय पर लागू की जा रही है।

इसी दौरान क़लंदिया शरणार्थी शिविर में एक गंभीर घटना हुई। वहां इजरायली सेना के प्रवेश के बाद स्थानीय लोगों के साथ झड़पें हुईं। सैनिकों ने गोलीबारी और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिसमें एक फिलिस्तीनी व्यक्ति के पेट में गोली लग गई। उसे गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया।

कुल मिलाकर, वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम के शरणार्थी शिविरों और शहरों में बार-बार हो रही इन कार्रवाइयों से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और क्षेत्र में अशांति का खतरा बढ़ता जा रहा है।

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