गाज़ा में मंगलवार को उभरा जनसैलाब सिर्फ़ एक विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि एक गहरी बेचैनी और ग़ुस्से की गूंज थी। इंटरनेशनल कमेटी ऑफ़ द रेड क्रॉस के दफ़्तर के बाहर इकट्ठा हुए फ़िलिस्तीनी क़ैदियों के परिवार, पूर्व बंदी और अधिकार समूह साफ़ संदेश दे रहे थे की “क़ैदी निष्पादन क़ानून” को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
हाथों में क़ैदियों की तस्वीरें, झंडे और ग़ुस्से से भरे नारे… ये सब इस बात का प्रतीक थे कि यह मुद्दा सिर्फ़ क़ानून का नहीं, बल्कि ज़िंदगी और इंसाफ़ का है। प्रदर्शनकारियों ने इस प्रस्तावित क़ानून को न सिर्फ़ अन्यायपूर्ण बताया, बल्कि इसे सीधे तौर पर क़ैदियों की ज़िंदगी के लिए ख़तरा करार दिया।
हमास के प्रवक्ता हाज़ेम क़ासिम ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यह क़ानून अंतरराष्ट्रीय मानवीय मानकों की खुली अवहेलना है। उनका आरोप था कि इज़राइल पहले ही क़ैदियों के साथ यातना और चिकित्सा उपेक्षा के ज़रिए मौत का कारण बनता रहा है! और अब यह क़ानून उस सिलसिले को और खुला वैध रूप देने जैसा है।
उन्होंने न सिर्फ़ फ़िलिस्तीनी जनता से बल्कि पूरी दुनिया से उठ खड़े होने की अपील की और साथ ही दूतावासों के बाहर विरोध, संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग और मानवाधिकार संगठनों को सक्रिय होने की पुकार। साथ ही रेड क्रॉस को भी आईना दिखाते हुए कहा गया कि सिर्फ़ बयान देने से काम नहीं चलेगा, अब ठोस कदम उठाने होंगे।
रैली में मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी इस क़ानून को “अभूतपूर्व” और “ख़तरनाक” बताया। उनका कहना था कि यह कदम हज़ारों क़ैदियों की ज़िंदगी को सीधे जोखिम में डाल सकता है और फिर भी दुनिया खामोश है।
पूर्व क़ैदी माजदी आबेद ने जेलों के अंदर की स्थिति को उजागर करते हुए अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय चुप्पी पर तीखा सवाल उठाया। वहीं, महमूद अल दहदूह की पत्नी नजाह अल रिफ़ी की आवाज़ में डर साफ़ झलक रहा था महीनों से पति की कोई खबर नहीं, और अब यह नया क़ानून… चिंता का स्तर और गहरा हो चुका है।
सबसे तीखी बात शायद यह रही कि यह विरोध सिर्फ़ एक दिन की नाराज़गी नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने साफ़ कर दिया कि जब तक यह क़ानून वापस नहीं लिया जाता, तब तक आवाज़ उठती रहेगी।
यह पूरा घटनाक्रम एक असहज सवाल छोड़ता है! क्या अंतरराष्ट्रीय क़ानून और मानवाधिकार सिर्फ़ कागज़ों तक सीमित रह गए हैं? और अगर नहीं, तो फिर इस बढ़ते संकट पर दुनिया की चुप्पी आखिर क्यों?
