लेबनान: हिंसक टकराव के दौरान, मानवाधिकारों के गम्भीर उल्लंघन मामलों पर चिन्ता

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय की एक नई रिपोर्ट में इसराइली सेना और लेबनान में हिज़बुल्लाह लड़ाकों के बीच हाल ही में भड़के हिंसक टकराव में आम नागरिकों के मानवाधिकारों के उल्लंघन मामलों पर जानकारी साझा की गई है. यूएन कार्यालय के अनुसार, लड़ाई के दौरान जीवन, स्वास्थ्य, शिक्षा, भोजन, आवास, कामकाज, स्वतंत्र आवाजाही समेत अन्य अधिकारों पर गहरा असर हुआ है.

यूएन कार्यालय ने अपने विश्लेषण के आधार पर बताया है कि इसराइली सैन्य बलों द्वारा बड़े पैमाने पर छेड़ी गई कार्रवाई, गोलाबारी और ज़मीनी अभियान में स्वास्थ्यकर्मियों समेत आम नागरिकों पर सीधे तौर पर किए गए हमलों की भी घटनाएँ हुई हैं. 

ऐसे अनेक मामलों में जानकारी जुटाई गई है, जिनमें इसराइली हमलों में बहुमंज़िला रिहायशी इमारतें पूर्ण रूप से ध्वस्त हो गईं और पूरे परिवार ख़त्म हो गए. OHCHR का मानना है कि ऐसी घटनाएँ, अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून का गम्भीर उल्लंघन हैं, और इस तरह के हमले युद्धविराम की घोषणा के बाद भी जारी रहे. 

वहीं, हिज़बुल्लाह ने इसराइल को निशाना बनाकर रॉकेट हमले किए, जिससे इमारतों और नागरिक प्रतिष्ठानों को क्षति पहुँची है. इन हमलों को भी अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के उल्लंघन की श्रेणी में रखा जा सकता है.

रिपोर्ट के अनुसार, इसराइली हमलों से पहले आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए अक्सर कोई कारगर चेतावनी नहीं दी गई. आम लोगों को अस्पष्ट रूप से जगह ख़ाली करने और अपने घर छोड़कर जाने के निर्देश दिए गए और देश का क़रीब 14 प्रतिशत हिस्सा इन आदेशों से प्रभावित था. 

इसराइल और हिज़बुल्ला के बीच लड़ाई के दौरान 10 लाख से अधिक लेबनानी नागरिक विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए. इसराइल से लगी सीमा के पास दक्षिणी लेबनान में 45 इलाक़ों में अब भी जगह छोड़कर जाने के आदेश लागू हैं.

यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने ज़ोर देकर कहा है कि जो विस्थापित आम नागरिक अपने घर लौटना चाहते हैं, उन्हें ऐसा करने की आज़ादी होनी चाहिए.

OHCHR ने लेबनान में स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों, अग्रिम पांत के राहतकर्मियों और पत्रकारों पर हुए हमलों में भी जानकारी जुटाई है. 

बुधवार को एक हमले में, लेबनान की पत्रकार अमाल ख़लील के मारे जाने की ख़बर है, और फ़ोटोग्राफ़र ज़ेनाब फ़राज घायल हुई हैं.

बताया गया है कि उन्हें बचाने के लिए लेबनान रैड क्रॉस की टीम को इसराइली सेना की ओर से अवरोधों का सामना करना पड़ा, और उन्हें घटनास्थल तक पहुँचने में देरी हुई.

जवाबदेही का आग्रह

यूएन कार्यालय ने ध्यान दिलाया है कि चिकित्साकर्मियों, पत्रकारों समेत अन्य नागरिकों को अन्तरराष्ट्रीय मानव कल्याण क़ानून के अन्तर्गत संरक्षण प्राप्त है, और उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जाना, एक युद्ध अपराध हो सकता है. 

इसराइली हमलों में कृषि योग्य भूमि को जलाए जाने या उसे दूषित किए जाने की भी जानकारी मिली है और आम नागरिकों की आजीविका पर असर पड़ा है और भोजन, कामकाज व स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार का उल्लंघन हुआ है. ऐसी रिपोर्टें हैं कि इसराइली सेना द्वारा व्हाईट फ़ॉसफ़ोरस से बनी आयुध सामग्री का इस्तेमाल किया, जिसके हानिकारक नतीजे होते हैं.  

इस बीच, सामुदायिक तनाव बढ़ रहा है और भेदभावपूर्व रवैये की वजह से विस्थापित आम लोगों के लिए घर ढूंढना व अति-आवश्यक सेवाओं को हासिल कर पाना कठिन साबित हो रहा है.

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने मानवाधिकारों के उल्लंघन के सभी मामलों की त्वरित, स्वतंत्र व निष्पक्ष जाँच कराए जाने और दोषियों की जवाबदेही तय करने का आग्रह किया है.

उन्होंने सभी पक्षों से अपील की है कि संघर्षविराम पर बनी सहमति को स्थाई युद्धविराम में बदलना होगा ताकि स्थाई शान्ति की बुनियाद को तैयार किया जा सके.

Source : UN News

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