ईयू की चुप्पी पर तीखा प्रहार: पूर्व एमईपी मिक वॉलेस ने अमेरिका के प्रति ‘निर्भरता’ पर उठाए सवाल

यूरोपीय संघ (EU) की चुप्पी एक बार फिर वैश्विक राजनीति में बहस का विषय बन गई है। ईरान के खिलाफ कथित अमेरिका-इज़राइल हमलों की निंदा न करने को लेकर मिक वॉलेस, जो यूरोपीय संसद के पूर्व सदस्य रह चुके हैं, ने EU की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

प्रेस टीवी को दिए अपने साक्षात्कार में वॉलेस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यूरोपीय संघ की विदेश नीति स्वतंत्र नहीं है, बल्कि वह पूरी तरह अमेरिका के रणनीतिक हितों से प्रभावित है। उनके अनुसार, यूरोपीय नेताओं की चुप्पी यह दर्शाती है कि EU अंतरराष्ट्रीय मामलों में खुद निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में ईरान के नागरिक क्षेत्रों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक लगभग 1,300 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें दक्षिणी शहर मीनाब के 165 स्कूली बच्चे भी शामिल हैं—एक आंकड़ा जो इस संघर्ष की भयावहता को दर्शाता है।

Iranian Red Crescent Society द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 80,000 से अधिक नागरिक ढांचे प्रभावित हुए हैं, जिनमें 60,000 रिहायशी मकान शामिल हैं। इसके अलावा सैकड़ों स्कूल, चिकित्सा केंद्र और मानवीय सहायता संस्थान भी इस विनाश की चपेट में आए हैं।

वॉलेस ने NATO को अमेरिका के प्रभाव का प्रमुख साधन बताते हुए कहा कि यह गठबंधन यूरोप को उसी दिशा में बनाए रखने का माध्यम है, जहां अमेरिका चाहता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि EU का अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के प्रति रवैया “चयनात्मक” रहा है।

इस मुद्दे पर ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने Ursula von der Leyen पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। यह प्रतिक्रिया मीनाब के शाजारेह तय्यबेह स्कूल पर हुए कथित हमले के बाद आई, जिसमें 165 लोगों की मौत बताई गई।

वहीं Pirhossein Kolivand ने इन हमलों को सुनियोजित बताते हुए कहा कि बड़ी संख्या में महिलाएं और छोटे बच्चे भी इसका शिकार हुए हैं।

हालांकि, वॉलेस का मानना है कि यूरोपीय देश सीधे इस युद्ध में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि EU देश फिलहाल यूक्रेन युद्ध में अपनी भूमिका को प्राथमिकता दे रहे हैं।

अंत में, वॉलेस ने यूरोपीय नेतृत्व पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आज EU ऐसे लोगों के हाथों में है, जो न तो अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करते हैं और न ही नैतिक मूल्यों का पालन।

यह पूरा घटनाक्रम न केवल यूरोपीय संघ की वैश्विक छवि पर सवाल खड़े करता है, बल्कि उन “यूरोपीय मूल्यों” की विश्वसनीयता पर भी चोट करता है, जिनका दावा लंबे समय से किया जाता रहा है।

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