पश्चिमी तट के सलफीत ज़िले में हुई एक गोलीबारी की घटना ने पहले से ही तनावग्रस्त माहौल को और भड़का दिया है। देइर इस्तिया कस्बे के पास, फ़िलिस्तीनी ज़मीन पर बने “एमेक डोरोन” सेटलमेंट आउटपोस्ट के नज़दीक एक फ़िलिस्तीनी युवक को गोली मार दी गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
इज़राइली पक्ष का दावा है कि युवक कथित तौर पर चाकूबाज़ी की कोशिश कर रहा था। बताया गया कि वह वहां मौजूद सेटलर्स के पास गया, उनसे अरबी में बातचीत की, और जब उसे वहां से जाने को कहा गया तो उसने इनकार कर दिया। आरोप है कि इसी दौरान उसने चाकू निकाला, जिसके बाद एक सेटलर ने उस पर गोली चला दी।
इज़राइली ऑक्युपेशन फोर्स (IOF) ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें संदिग्ध हमले की सूचना मिलने के बाद उनके जवान मौके पर पहुंचे थे।
लेकिन यह घटना सिर्फ एक गोलीकांड तक सीमित नहीं रही, इसके तुरंत बाद पूरे इलाके में सुरक्षा सख्त कर दी गई। क़लकिलिया शहर के आसपास कई पाबंदियां लगा दी गईं। शहर के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर चेकपॉइंट बनाकर लोगों की आवाजाही रोक दी गई, जबकि पूर्वी गेट को पूरी तरह बंद कर दिया गया। इससे आम लोगों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई और सड़कों पर लंबा जाम लग गया।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब क़लकिलिया के पूर्व में “अल-हसामिस” कृषि क्षेत्र में इज़राइली बलों ने छापेमारी की। यहां किसानों को उनके काम के दौरान रोका गया, हिरासत में लेकर पूछताछ की गई! जिससे साफ है कि असर अब आम नागरिकों तक पहुंच चुका है।
इसके अलावा, अज़्ज़ून कस्बे, असला गांव और क़लकिलिया-नाबलुस सड़क पर भी सैन्य गश्त तेज़ कर दी गई, हालांकि किसी गिरफ्तारी की खबर नहीं है।
निष्कर्ष :
यह पूरी घटना बताती है कि वेस्ट बैंक में हालात सिर्फ “तनावपूर्ण” नहीं बल्कि लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। एक ओर गोलीबारी की घटनाएं सामने आ रही हैं, तो दूसरी ओर सख्त सैन्य कार्रवाई आम लोगों की ज़िंदगी को प्रभावित कर रही है—जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और गहरी होती जा रही है।
