गाज़ा युद्ध का गहरा असर: 22,000 से ज़्यादा महिलाएं बनीं विधवा, परिवार की अकेली सहारा

गाज़ा पट्टी में जारी युद्ध ने एक गंभीर मानवीय और सामाजिक संकट को जन्म दिया है, जहां अब 22,000 से अधिक महिलाएं विधवा हो चुकी हैं और अपने परिवार की अकेली कमाने वाली बन गई हैं। यह खुलासा फिलिस्तीनी सेंटर फॉर पॉलिसी एंड सर्वे रिसर्च की एक हालिया रिपोर्ट में हुआ है।

Women Breadwinners in the Gaza Strip: War Economy and the Reproduction of Social Poverty” शीर्षक वाले इस अध्ययन के अनुसार, युद्ध में परिवार के मुख्य कमाने वालों की मौत ने पारिवारिक ढांचे को पूरी तरह बदल दिया है। इसके चलते हजारों बच्चे भी अनाथ या अर्ध-अनाथ हो गए हैं।

रिपोर्ट बताती है कि यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब गाज़ा की अर्थव्यवस्था लगभग ध्वस्त हो चुकी है। श्रम बाजार बिखर गया है और महिलाओं में बेरोज़गारी दर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का विस्तार हुआ है, जो मुख्य रूप से सहायता और अस्थिर कार्यों पर निर्भर है। ऐसे में महिलाएं बिना पर्याप्त संसाधनों के अपने परिवार का पालन-पोषण करने को मजबूर हैं।

अध्ययन में यह भी सामने आया है कि महिलाएं अब आर्थिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ देखभाल की दोहरी भूमिका निभा रही हैं। वहीं, प्रभावी सामाजिक सुरक्षा तंत्र के अभाव ने उनकी आर्थिक, मानसिक और सामाजिक चुनौतियों को और बढ़ा दिया है।

रिपोर्ट चेतावनी देती है कि ये परिवर्तन अस्थायी नहीं हैं, बल्कि समाज में गहरे बदलाव का संकेत हैं। यदि आपातकालीन राहत के साथ दीर्घकालिक आर्थिक सशक्तिकरण की नीतियां लागू नहीं की गईं, तो यह स्थिति आने वाली पीढ़ियों तक गरीबी को बढ़ा सकती है।

मैदानी आंकड़े इस त्रासदी की भयावहता को और स्पष्ट करते हैं। लगभग 6,020 परिवार ऐसे हैं, जो अब केवल एक सदस्य पर निर्भर रह गए हैं, जो अक्सर महिला या बच्चा होता है। वहीं, करीब 2,700 परिवार पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं और उनका नाम नागरिक रजिस्टर से मिट चुका है।

महिला मामलों के मंत्रालय के अनुसार, पतियों की मौत और हजारों पुरुषों की गिरफ्तारी के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं बेहद कठिन हालात में अपने परिवार की अकेली जिम्मेदारी उठा रही हैं। यह स्थिति गाज़ा में सामाजिक और आर्थिक पुनर्निर्माण की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है।

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