संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता टीमों ने बताया है कि लेबनान में नाज़ुक युद्धविराम लागू रहने के बावजूद, लोगों की हत्याओं व विस्थापन का सिलसिला रुका नहीं है और दक्षिणी इलाक़े में इसराइली हमलों के कारण गाँव के गाँव इतनी बुरी तरह तबाह हो गए हैं कि उन्हें पहचाना मुश्किल हो रहा है.
लेबनानी अधिकारियों के अनुसार, 2 मार्च से लेबनान में स्थित हिज़्बुल्लाह लड़ाकों और इसराइली सेना के बीच लड़ाई के बाद 2,700 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.
यूएन वीमैन (UN Women) के अरब देशों के क्षेत्रीय निदेशक मोएज़ दोरैद ने गुरूवार को बताया कि 17 अप्रैल को युद्धविराम लागू होने के बाद से, लेबनान में मारे गए 380 से अधिक लोगों में 25 महिलाएँ हैं.
यह स्थिति उन ख़तरों को उजागर करती है “जिनका महिलाओं को, युद्धविराम की कथित सुरक्षा के बीच अपने घरों को वापिस लौटने के प्रयासों के दौरान सामना करना पड़ता है.”
मोएज़ दोरैद ने लेबनान की राजधानी बेरूत से वीडियो लिंक के ज़रिए जिनीवा में पत्रकारों से कहा, “इसराइल के लगातार हवाई हमले, निकासी के आदेश, कुछ क्षेत्रों में वापिस लौटने पर प्रतिबन्ध और आवाजाही पर पाबन्दी का मतलब है कि अधिकांश लोग अब भी अपने घरों को वापस नहीं लौट सकते. अनुमान के मुताबिक़, पाँच लाख से अधिक महिलाएँ और लड़कियाँ अब भी विस्थापित हैं.”
पेट भरने के लिए जंगली चीज़ों का सहारा
मोएज़ दोरैद ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से “इन महिलाओं, लड़कियों, पुरुषों और लड़कों के साथ खड़े होने का आग्रह किया ताकि उम्मीद बहाल की जा सके.”
संयुक्त राष्ट्र अधिकारी ने ज़ोर दिया कि लेबनान के लोगों ने पिछले दशकों में जिन युद्धों और संघर्षों का सामना किया है, उनके विपरीत “इस वर्तमान युद्ध ने बहुत से लोगों के बीच उम्मीद को ही ख़त्म कर दिया है, क्योंकि दक्षिणी लेबनान में घर और ज़मीनें नष्ट हो गई हैं.”
उन्होंने बताया कि किस तरह, बढ़ती खाद्य असुरक्षा के बीच एक महिला को “अपने परिवार का पेट भरने के लिए जंगली जड़ी-बूटियाँ खोजने के लिए” मजबूर होना पड़ा.
यह चिन्ताजनक स्थिति, खाद्य असुरक्षा विशेषज्ञों के आकलनों के अनुरूप है. ये आकलन बताते हैं कि आने वाले महीनों में अतिरिक्त 1 लाख 44 हज़ार महिलाओं और लड़कियों को संकट-स्तर की भूख या उससे भी बदतर स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, जिससे यह कुल संख्या लगभग 6 लाख 39 हज़ार हो जाएगी.
आज लेबनान में भोजन, पानी, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और बुनियादी सेवाओं तक पहुँच ख़तरनाक रूप से बाधित हो गई है. लगभग 12 लाख लोग विस्थापित हुए हैं, और इसराइल के बेदख़ली आदेशों के कारण पूरे समुदाय उजड़ गए हैं. ये आदेश अब देश के पहले से कहीं अधिक बड़े हिस्से में लागू हो रहे हैं.
फिर भी शान्ति नहीं
युद्धविराम लागू होने के बावजूद शान्ति स्थापित नहीं हुई है. हज़ारों लोग चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों, घरों को व्यापक नुक़सान और बिना फटे गोला-बारूद (unexploded ordnance) के जोखिमों के बीच वापस लौट रहे हैं.
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के एक सहायक कार्यकारी निदेशक मैथ्यू होलिंगवर्थ ने कहा है कि इस युद्ध के दौरान WFP ने दक्षिणी लेबनान में साढ़े 84 हज़ार व्यक्तियों की सहायता के लिए 19 क़ाफ़िलों के आवागमन पर बातचीत की है. लेकिन स्वीकृत क़ाफ़िले ज़रूरत की तुलना में केवल एक अंश मात्र हैं.
उन्होंने आगे बताया, “आमतौर पर, सहायता क़ाफ़िलों के गुज़रने की अनुमति के लिए इसराइल को भेजे जाने अनुरोधों में से, 50 प्रतिशत से भी कम को मंज़ूरी मिल रही है. इसलिए, हम दुर्गम क्षेत्रों में ऐसे कई सहायता क़ाफ़िले भेजना चाहते हैं… हमें बस बहुत अधिक काम करने की आवश्यकता है.”
यूएन वीमैन ने, 2 मार्च से, 15 हज़ार से अधिक महिलाओं और लड़कियों को सीधे सहायता प्रदान की है, जिसकी पहुँच उनके समुदायों के 70 हज़ार से अधिक लोगों तक है.
मोएज़ दोरैद ने कहा, “ऐसी विकट परिस्थितियों में, मैंने उन महिलाओं और महिला संगठनों की अविश्वसनीय सहनशीलता भी देखी है जो मानवीय सहायता पहुँचा रहे हैं, आजीविका का समर्थन कर रहे हैं और पूरे लेबनान में सामाजिक एकजुटता को बढ़ा रहे हैं.”
उन्होंने बताया कि एजेंसी, 500 से अधिक महिला नेताओं का समर्थन कर रही है “ताकि समुदायों को संकट से निपटने, लोगों को सहायता से जोड़ने, तत्काल ज़रूरतों की पहचान करने, तनाव कम करने और यह सुनिश्चित करने में मदद मिल सके कि स्थानीय राहत और बहाली के प्रयासों में महिलाओं की आवाज़ सुनी जाए.”
Source : UN News
