रेड रिबन्स कैंपेन ने ICRC से लगाई गुहार, इजरायली जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों तक तत्काल पहुंच सुनिश्चित करने की मांग

रेड रिबन्स कैंपेन ने इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस (ICRC) से अपील की है कि वह अपने मानवीय अधिकार क्षेत्र के तहत इजरायल की जेलों और हिरासत केंद्रों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों तक तत्काल, नियमित और प्रभावी पहुंच सुनिश्चित कराने के लिए हर संभव प्रयास करे। अभियान का कहना है कि हिरासत में रखे गए लोगों के अधिकारों की रक्षा, उनकी स्थिति की स्वतंत्र जांच और उनके परिवारों से संपर्क बहाल करने के लिए ICRC की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

अभियान ने ICRC के अध्यक्ष और महानिदेशक को भेजे गए एक विस्तृत पत्र में कहा है कि यह अपील मानव गरिमा, पारदर्शिता और हिरासत में मौजूद लोगों के बुनियादी अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से की गई है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ICRC की कार्यप्रणाली तटस्थता, स्वतंत्रता और गोपनीय मानवीय संवाद पर आधारित है और अभियान इन सिद्धांतों में किसी तरह के बदलाव की मांग नहीं कर रहा। उसकी मांग केवल इतनी है कि ICRC अपने मानवीय दायित्वों का इस्तेमाल करते हुए जल्द से जल्द बंदियों तक वास्तविक पहुंच सुनिश्चित करे।

पत्र के मुताबिक, ICRC पहले ही सार्वजनिक रूप से कह चुका है कि 7 अक्टूबर 2023 के बाद से उसे इजरायल की हिरासत में बंद फिलिस्तीनी कैदियों से मिलने की अनुमति नहीं मिली है। संगठन लगातार यह मांग करता रहा है कि बंदियों के ठिकाने की जानकारी दी जाए, उन्हें मानवीय व्यवहार मिले, उनके परिवारों से संपर्क बहाल हो और नियमित जेल निरीक्षण फिर से शुरू किए जाएं।

अभियान ने अपने पत्र में 3 जून 2026 को आए इजरायल के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया है। उसके अनुसार अदालत ने फिलिस्तीनी बंदियों से ICRC की मुलाकात पर लगे व्यापक प्रतिबंध को पर्याप्त कानूनी आधार से रहित मानते हुए उसे हटाने का आदेश दिया था। अभियान का कहना है कि केवल अदालत का फैसला आ जाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे ज़मीन पर लागू करना भी उतना ही जरूरी है। यदि ICRC को अब भी वास्तविक पहुंच नहीं मिलती है, तो अदालत के फैसले का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।

पत्र में कहा गया है कि अभियान और उससे जुड़े लोगों को कई ऐसी रिपोर्टें और गवाहियां मिली हैं जिनमें बंदियों के स्वास्थ्य, हिरासत की परिस्थितियों, कथित दुर्व्यवहार, परिवारों से संपर्क न होने और कुछ कैदियों के ठिकाने को लेकर गंभीर चिंताएं जताई गई हैं। हालांकि अभियान ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये आरोप न तो ICRC और न ही किसी अदालत द्वारा प्रमाणित निष्कर्ष हैं। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और गोपनीय मानवीय जांच की आवश्यकता है।

पत्र में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का भी हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि 19 जुलाई 2024 को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने अपनी सलाहकारी राय में कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र में इजरायल की निरंतर मौजूदगी को गैरकानूनी बताया था। अभियान के अनुसार, यह राय हर व्यक्तिगत हिरासत मामले पर फैसला नहीं देती, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत बंदियों को मिलने वाले संरक्षण के महत्व को और मजबूत करती है।

अभियान ने चौथे जिनेवा कन्वेंशन के अनुच्छेद 143 और ICRC के प्रथागत अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के नियम 124 का उल्लेख करते हुए कहा है कि ICRC को हिरासत में रखे गए लोगों तक नियमित पहुंच मिलनी चाहिए, ताकि उनकी हिरासत की परिस्थितियों का स्वतंत्र आकलन किया जा सके और परिवारों से उनका संपर्क बहाल कराया जा सके।

पत्र में ICRC द्वारा विश्वसनीय जेल निरीक्षण के लिए निर्धारित पांच आवश्यक शर्तों का भी जिक्र किया गया है। इनमें सभी संबंधित बंदियों तक पहुंच, हिरासत के सभी स्थानों का निरीक्षण, जरूरत पड़ने पर बार-बार दौरे करने की अनुमति, बंदियों से बिना किसी गवाह के निजी बातचीत और सभी बंदियों की पूरी सूची उपलब्ध कराना या उसे तैयार करने की अनुमति शामिल है। अभियान का कहना है कि यदि केवल कुछ जेलों या कुछ चुनिंदा कैदियों तक सीमित या निगरानी में पहुंच दी जाती है, तो उसे प्रभावी मानवीय निगरानी नहीं माना जा सकता।

रेड रिबन्स कैंपेन ने ICRC से आग्रह किया है कि वह इजरायली अधिकारियों के साथ तत्काल संवाद कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को व्यावहारिक रूप से लागू कराए, सभी संबंधित कैदियों और हिरासत केंद्रों तक पूर्ण पहुंच हासिल करे, बंदियों की पहचान, कानूनी स्थिति, स्वास्थ्य और ठिकाने की अद्यतन जानकारी प्राप्त करे तथा जहां संभव हो, उनके परिवारों से संपर्क बहाल कराने के प्रयास जारी रखे।

इसके साथ ही अभियान ने ICRC से अनुरोध किया है कि वह कथित दुर्व्यवहार, चिकित्सीय समस्याओं, भोजन और स्वच्छता की स्थिति, एकांतवास, भीड़भाड़ और अन्य मानवीय चिंताओं का स्वतंत्र और गोपनीय मूल्यांकन करे। पत्र में यह भी कहा गया है कि ICRC अभियान को 14 दिनों के भीतर लिखित जवाब दे और जहां तक उसकी गोपनीय प्रक्रिया अनुमति देती है, यह बताए कि क्या उसके मानकों के अनुरूप जेलों तक पहुंच बहाल हो चुकी है या अभी भी अधूरी है।

अभियान का कहना है कि नियमित और स्वतंत्र जेल निरीक्षण केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि हिरासत में मौजूद लोगों की सुरक्षा, उनके अधिकारों की रक्षा और उनके परिवारों को सही जानकारी उपलब्ध कराने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि सार्थक मानवीय पहुंच बहाल नहीं होती है, तो इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार तंत्र, राजनयिक प्रतिनिधियों और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के समक्ष उठाने का विकल्प खुला रहेगा। हालांकि अभियान ने स्पष्ट किया है कि उसका प्राथमिक उद्देश्य किसी प्रकार का सार्वजनिक टकराव नहीं, बल्कि फिलिस्तीनी बंदियों तक वास्तविक मानवीय पहुंच और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कराना है।

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