अमेरिका-ईरान युद्ध: होर्मुज़ में बढ़ते हमलों के बीच कूटनैतिक समाधान की अपील

होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) एक अहम वाणिज्यिक नौवहन मार्ग है, जिस पर अमेरिका और ईरान दोनों नियंत्रण का दावा कर रहे हैं. क्षेत्र में हमलों में तेज़ी के बीच संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने सोमवार को तनाव कम करने और कूटनैतिक समाधान तलाशने की अपील की.

हमलों की निन्दा

यूएन महासचिव ने रविवार को अमेरिका और ईरान से बातचीत आगे बढ़ाने की अपील की थी. इसके बाद, अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन(IMO) की परिषद ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नागरिक जहाज़ों पर हाल में हुए हमलों की निन्दा की. इस मार्ग से पहले दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस निर्यात का लगभग पाँचवाँ हिस्सा गुज़रता था.

परिषद ने अपने 137वें सत्र के समापन पर सोमवार को तनाव जल्द कम करने का आहवान किया. एक अलग प्रस्ताव में उसने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय नौवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले जलडमरूमध्यों से जहाज़ों के निर्बाध आवागमन के अधिकार को किसी भी तरह बाधित या निलम्बित नहीं किया जाना चाहिए.

IMO ने यह भी दोहराया कि अहम समुद्री मार्गों पर यातायात नियंत्रित करने के लिए तटीय देशों के सभी क़दम, समुद्र में जीवन की सुरक्षा से जुड़े अन्तरराष्ट्रीय कन्वेंशन और IMO के नियमों के अनुसार होने चाहिए.

आवागमन का अधिकार

परिषद ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य व उसके आसपास नौवहन की मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए क्षेत्र के तटवर्ती देशों के बीच होने वाली किसी भी व्यवस्था में सभी जहाज़ों को बिना भेदभाव और बिना रुकावट गुज़रने का अधिकार मिलना चाहिए.

यह आवागमन IMO द्वारा 1968 में अपनाई गई, अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यातायात पृथक्करण व्यवस्था के ज़रिए होना चाहिए.

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने सोमवार को सोशल मीडिया पर कहा कि जलडमरूमध्य “खुला रहेगा”. उन्होंने यह भी कहा कि वॉशिंगटन ईरानी बन्दरगाहों की नाकाबन्दी फिर से लागू करेगा.

शुल्क वसूलने की योजना

राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका, जलमार्ग का “रक्षक” होने के नाते, वहाँ से गुज़रने वाले सभी सामान पर 20 प्रतिशत शुल्क वसूलेगा. उनके अनुसार, “सुरक्षा और संरक्षा” सुनिश्चित करने के लिए यह शुल्क आवश्यक है.

इसके जवाब में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने सोशल मीडिया पर लिखा कि डॉनल्ड ट्रम्प “बिल्कुल सही” हैं, लेकिन ईरान इससे कम शुल्क लेगा. उन्होंने कहा, “हम निष्पक्ष रहेंगे.”

IMO परिषद ने दोहराया कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून और 1948 के IMO कन्वेंशन के अनुसार, जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाज़ों से कोई शुल्क या अन्य प्रभार नहीं लिया जाना चाहिए.

परिषद ने यूएन महासचिव से सुरक्षित समुद्री यातायात के विकल्प तलाशने और तटवर्ती देशों, अन्य सदस्य देशों व समुद्री उद्योग के साथ मिलकर निर्बाध आवागमन की समन्वित और टिकाऊ बहाली सुनिश्चित करने का भी अनुरोध किया.

संकट के दूरगामी प्रभाव

स्विट्ज़रलैंड स्थित स्वतंत्र संस्था ACAPS की 10 जुलाई को जारी रिपोर्ट के अनुसार, ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’  में कई महीनों से जारी संकट के मानवीय और आर्थिक प्रभाव सामने आ रहे हैं. यह संस्था मानवीय ज़रूरतों का विश्लेषण और आकलन करती है.

विश्व बैंक के अनुसार, फ़रवरी से जलडमरूमध्य लगभग लगातार बन्द रहने के कारण दुनिया भर में वस्तुओं की क़ीमतों में तेज़ बढ़ोतरी हुई है.

युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक ऊर्जा क़ीमतें 24 प्रतिशत बढ़ीं. विश्व बैंक ने अप्रैल में अनुमान लगाया था कि 2026 में उर्वरक की क़ीमतें 30 प्रतिशत से अधिक बढ़ सकती हैं.

क़ीमतों में उछाल

संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास संस्था, UNCTAD के अनुसार, मौजूदा संकट के प्रभाव 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद वस्तुओं की क़ीमतों में आए उछाल जैसे हो सकते हैं. ऊर्जा बाज़ारों में सुधार के कई साल बाद भी उस संकट का असर स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं पर बना हुआ है.

UNCTAD ने चेतावनी दी कि अफ़्रीका में सकल घरेलू उत्पाद (GDP), खाद्य प्रणालियों और सरकारी वित्त पर इसका असर शुरुआती मूल्य वृद्धि के बाद भी लम्बे समय तक जारी रहा. इससे विकास की प्रगति पर गहरे और स्थाई दुष्प्रभाव पड़ने का ख़तरा है.

Source : UN News

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