नई दिल्ली: भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में लंबे समय से चली आ रही तल्खी के बीच अब बातचीत का एक नया रास्ता खुलता दिखाई दे रहा है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान अगले हफ्ते नई दिल्ली आ सकते हैं। दिल्ली और ढाका में इस संभावित दौरे की तैयारियां चल रही हैं। अगर कार्यक्रम तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है, तो प्रधानमंत्री बनने के बाद यह रहमान की पहली भारत यात्रा होगी।
दो दिन के इस संभावित दौरे का सबसे अहम पहलू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात होगी। दोनों नेताओं के बीच बातचीत में व्यापार से लेकर ऊर्जा, सीमा प्रबंधन, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं।
रिश्तों में आई दूरी के बीच नई शुरुआत की कोशिश
अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तनाव बढ़ा। शेख हसीना का भारत में रहना और ढाका की ओर से उनके प्रत्यर्पण की मांग इस तनाव का बड़ा कारण बना हुआ है।
इसके बावजूद हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच बातचीत के संकेत मिले हैं। अप्रैल में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलील उर रहमान ने भारत आकर एस. जयशंकर से मुलाकात की थी। इसके बाद 10 अगस्त को भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने ढाका में तारिक रहमान से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने रिश्तों में सुधार के रास्तों पर बातचीत की।
शेख हसीना का मुद्दा रहेगा संवेदनशील
मोदी और रहमान की बातचीत में शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी अहम हो सकता है। हसीना 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश छोड़कर भारत आई थीं। बाद में बांग्लादेश के एक ट्रिब्यूनल ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में मौत की सजा सुनाई और ढाका ने भारत से उनके प्रत्यर्पण की औपचारिक मांग की।
भारत ने कहा है कि इस अनुरोध पर कानूनी और राजनयिक माध्यमों से विचार किया जा रहा है। हाल ही में नई दिल्ली में हसीना की पत्रकारों से वर्चुअल बातचीत के बाद यह विवाद फिर सामने आया था।
बातचीत सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं
दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधारने की राह में कई आर्थिक और व्यावहारिक मुद्दे भी हैं। व्यापार, ट्रांजिट, ऊर्जा सहयोग, सीमा प्रबंधन और कनेक्टिविटी पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत की जरूरत है।
इसके अलावा गंगा जल बंटवारा संधि भी आने वाले महीनों में बड़ा मुद्दा बन सकती है। 1996 में हुई यह संधि दिसंबर में समाप्त होने वाली है, इसलिए इसके नवीनीकरण को लेकर चर्चा महत्वपूर्ण होगी।
कुल मिलाकर, अगर तारिक रहमान का दिल्ली दौरा होता है, तो यह सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं होगी। यह भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव के दौर के बाद रिश्तों को नई दिशा देने की एक अहम कोशिश साबित हो सकती है।
