फैक्ट चेक: सूरत में सतीश मराठे की हत्या को मुस्लिमों से जोड़ने वाला दावा भ्रामक

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ लोग एक व्यक्ति पर लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला करते नजर आ रहे हैं। वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि गुजरात के सूरत में सामाजिक कार्यकर्ता सतीश मराठे की मुस्लिम युवकों की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि हत्या में शामिल लोग सूरत की झुग्गियों में रहने वाले बांग्लादेशी मुस्लिम थे और सतीश मराठे इन झुग्गियों की जांच तथा उन्हें हटाने की मांग कर रहे थे।

उदयवीर सिंह चंदेल नामक यूजर ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ‘गुजरात के सूरत में सामाजिक कार्यकता सतीश मराठे नामक युवक की, मुस्लिम युवकों ने झुग्गी के पास ले जाकर, दर्दनाक हत्या फरसा से काटकर मार डाला, अभी तक दो युवकों जिसमें अरबाज, करीम बैरोन की गिरफ्तारी हुई है। बताया जा रहा है कि ये झुग्गी वाले बांग्लादेशी है। जिसकी जांच सतीश मराठे करा रहे थे, और झुग्गी हटाने को कहा था, फ़िर झुग्गी वाले मुस्लिम युवकों ने लूटपाट कर हत्या कर दी।’

इसी तरह ANIL GIRI – X CLASSES नामक यूजर ने लिखा, ‘गुजरात के सूरत में,, सामाजिक कार्यकता सतीश मराठे युवक की, मुस्लिम युवकों ने, झुग्गी के पास ले जाकर, दर्दनाक हत्या कर दी और फरसा से काट डाला,, अभी तक दो युवकों जिसन अरबाज,, करीम बैरोन की गिरफ्तारी हुई है,, बताया जा रहा है कि ये झुग्गी वाले, बांग्लादेशी है, जिसकी जांच सतीश मराठे करा रहे थे, और झुग्गी हटाने को कहा था,, फ़िर झुग्गी वाले मुस्लिम युवकों ने लूटपाट कर हत्या कर दी,,, हिन्दू ,,#गुजरात #हत्या‘

सोशल मीडिया पर कई अन्य यूजर्स ने भी इसी दावे के साथ वीडियो साझा किया है।

फैक्ट चेक

Times Headline की जांच में सामने आया कि वायरल वीडियो के साथ किया जा रहा सांप्रदायिक दावा सही नहीं है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस के बयान के मुताबिक, सतीश मराठे की हत्या के मामले में किसी मुस्लिम आरोपी का नाम सामने नहीं आया है।

जांच के दौरान सूरत के भेस्तान पुलिस स्टेशन प्रभारी संजय देसाई से भी संपर्क किया गया। उन्होंने वायरल दावे को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि मामले में कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है और एक भी आरोपी मुस्लिम नहीं है। पुलिस के मुताबिक, हत्या के मामले में राहुल मंडल को मुख्य आरोपी बताया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई जानकारी के अनुसार, सूरत के भेस्तान इलाके में सतीश उर्फ सतीश मराठे पर कई हमलावरों ने धारदार हथियारों से हमला किया था। घटना का वीडियो भी सामने आया, जिसमें हमलावरों को तलवार, धारिया और चाकू जैसे हथियारों से हमला करते देखा जा सकता है।

News18 मराठी की रिपोर्ट के मुताबिक, सतीश की हत्या की साजिश पहले से तैयार की जा रही थी। रिपोर्ट में राहुल मंडल के निर्देश पर हथियार उपलब्ध कराने और सतीश की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए GPS ट्रैकर लगाए जाने का भी उल्लेख किया गया है। ट्रैकर को कथित तौर पर उनकी कार में ड्राइवर की सीट के नीचे लगाया गया था।

महाराष्ट्र टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सतीश को मारने की दो कोशिशें पहले नाकाम हो चुकी थीं। इसके बाद आरोपियों ने GPS के जरिए उनकी गतिविधियों पर नजर रखी। रिपोर्ट के मुताबिक, सतीश जब भेस्तान इलाके में पहुंचे तो पहले से घात लगाए हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया।

लोकमत की रिपोर्ट के अनुसार, वारदात के बाद महाराष्ट्र सीमा की ओर भागने की कोशिश कर रहे कई आरोपियों को सूरत क्राइम ब्रांच और तापी एलसीबी की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में केतन उर्फ सनी शिरसाठ, राहुल उर्फ बटको, करण उर्फ पुदुल हीरामली दुबे, अजीत उर्फ जस्टिन गोस्वामी, आकाश बटको और चार नाबालिग शामिल बताए गए हैं। रिपोर्ट में मुख्य साजिशकर्ता राहुल मंडल की गिरफ्तारी की प्रक्रिया और रिंकू नामक आरोपी के फरार होने की जानकारी भी दी गई है।

भेस्तान पुलिस स्टेशन प्रभारी संजय देसाई ने Times Headline से बातचीत में भी स्पष्ट किया कि इस हत्याकांड का कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले में गिरफ्तार या नामजद आरोपियों में एक भी मुस्लिम नहीं है। पुलिस के मुताबिक, राहुल मंडल इस मामले का मुख्य आरोपी है और उसके अलावा कई अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है।

निष्कर्ष

सूरत में सतीश मराठे की हत्या की घटना वास्तविक है, लेकिन इसे मुस्लिम समुदाय, बांग्लादेशी मुस्लिमों या झुग्गी में रहने वाले मुस्लिमों से जोड़कर वायरल किया जा रहा दावा भ्रामक है। पुलिस के बयान और उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, मामले में कोई मुस्लिम आरोपी नहीं है। हत्या के मामले में राहुल मंडल को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी की गई है।

इसलिए वायरल वीडियो के आधार पर हत्या को सांप्रदायिक रंग देकर किया जा रहा दावा तथ्यों से मेल नहीं खाता।

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