काहिरा में अंतरराष्ट्रीय मिलादुन्नबी ﷺ एवं इमाम अहमद रज़ा सम्मेलन का भव्य आयोजन

साहत-ए-इमाम अहमद रज़ा अल-क़ादरी के तत्वावधान में भव्य शैक्षिक एवं आध्यात्मिक आयोजन, जामिया अल-अज़हर के प्रतिष्ठित विद्वानों एवं शैखों की भागीदारी, अनेक शैक्षिक एवं शोधपरक पुस्तकों का विमोचन

काहिरा, मिस्र, 19 अगस्त 2026: मिस्र की राजधानी काहिरा में साहत-ए-इमाम अहमद रज़ा अल-क़ादरी के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय मिलादुन्नबी ﷺ एवं इमाम अहमद रज़ा सम्मेलन का आयोजन किया गया। 19 अगस्त, बुधवार को आयोजित इस सम्मेलन में मिस्र के प्रमुख विद्वानों एवं शैखों, जामिया अल-अज़हर के शिक्षकों, भारत से आए उलेमा और विभिन्न देशों से जुड़े विद्वानों एवं छात्रों ने हिस्सा लिया।

यह सम्मेलन मिलाद-ए-मुस्तफ़ा ﷺ और इमाम अहमद रज़ा ख़ान क़ादरी रहमतुल्लाह अलैह की 108वीं वार्षिक याद के अवसर पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम फ़ज़ीलतुल शैख, उस्ताद, डॉक्टर मुहम्मद महना अल-अज़हरी के संरक्षण में हुआ, जबकि इसकी मेज़बानी साहत-ए-इमाम अहमद रज़ा अल-क़ादरी, काहिरा के संस्थापक एवं निदेशक मौलाना शैख़ ग़ुलाम मुहम्मद क़ादरी अल-अज़हरी ने की।

सम्मेलन में वक्ताओं ने पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की सीरत, फ़ज़ाइल व शमाइल, मुहब्बत-ए-रसूल ﷺ, सुन्नत की पैरवी और मौजूदा दौर में शिक्षाओं-ए-नबवी ﷺ की अहमियत पर विचार रखे। इसके साथ ही इमाम अहमद रज़ा ख़ान क़ादरी की धार्मिक, फ़िक़्ही, शोधपरक, शैक्षिक और आध्यात्मिक सेवाओं तथा मुहब्बत-ए-रसूल ﷺ के प्रचार में उनके योगदान को भी रेखांकित किया गया।

कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन

कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताओं में विभिन्न शैक्षिक और शोधपरक पुस्तकों का विमोचन शामिल रहा। इस अवसर पर इमाम अहमद रज़ा की रचनाओं “सुलासा रसाइल फ़ी समाअिल अमवात व अहवालिल अरवाह बादल वफ़ात”, “ख़म्स रसाइल फ़ी तहज़ीबिल अख़लाक़ व हुक़ूक़िल इबाद”, “जुहूदुल इमाम अहमद रज़ा व आसारुहू फ़ित-तफ़्सीर”, “अत-तसव्वुफ़ वल-इमाम अहमद रज़ा अल-क़ादरी” और “अस्समसाम अला मुश्किल फ़ी आयतिल अरहाम” का विमोचन किया गया।

इसके अलावा “तफ़्सीर अशरफ़ी”, जिसे लेख में शैख़ुल इस्लाम हुज़ूर मदनी रहमतुल्लाह अलैह की महत्वपूर्ण तफ़्सीर बताया गया है, तथा दो सौ रिसालों के संग्रह “जहान मख़दूम-ए-आज़म” समेत अन्य शैक्षिक एवं शोधपरक पुस्तकों को भी प्रस्तुत किया गया।

आयोजकों के अनुसार, इन पुस्तकों के प्रकाशन और विमोचन का उद्देश्य भारतीय उपमहाद्वीप की शैक्षिक एवं धार्मिक विरासत को अरब जगत, विशेष रूप से मिस्र और जामिया अल-अज़हर के शैक्षिक वातावरण से जोड़ना है। साहत-ए-इमाम अहमद रज़ा अल-क़ादरी की ओर से उर्दू, अरबी और अन्य भाषाओं में इमाम अहमद रज़ा क़ादरी तथा अहले सुन्नत के बुज़ुर्ग विद्वानों की शैक्षिक सेवाओं को परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है।

छात्रों को पुरस्कार देकर किया गया सम्मानित

कार्यक्रम में साहत-ए-इमाम अहमद रज़ा अल-क़ादरी की ओर से आयोजित शैक्षिक प्रतियोगिता के विजेता छात्रों का भी उत्साहवर्धन किया गया। प्रतियोगिता में प्रथम से तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को उपहार और पुरस्कार दिए गए, जिनमें इमाम अहले सुन्नत की महत्वपूर्ण रचनाएं, जैसे “जद्दुल मुंतार” आदि शामिल थीं।

वक्ताओं ने छात्रों में अध्ययन, शोध, सीरत-ए-रसूल ﷺ और इमाम अहमद रज़ा की शैक्षिक सेवाओं के प्रति रुचि पैदा करने के लिए ऐसी गतिविधियों को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में भारत और पाकिस्तान के अलावा अन्य देशों से जुड़े उलेमा और छात्र भी शामिल हुए।

इमाम अहमद रज़ा के मिशन को आगे बढ़ाने पर जोर

सम्मेलन में कहा गया कि साहत-ए-इमाम अहमद रज़ा अल-क़ादरी, काहिरा की शैक्षिक, शोधपरक, प्रकाशन और प्रशिक्षण संबंधी गतिविधियां इमाम अहमद रज़ा क़ादरी के शैक्षिक मिशन को अरब जगत और अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक क्षेत्रों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

कार्यक्रम में शामिल अज़हर के विद्वानों ने उम्मीद जताई कि काहिरा स्थित यह शैक्षिक केंद्र भविष्य में भी इमाम अहमद रज़ा और भारतीय उपमहाद्वीप के अन्य प्रमुख विद्वानों की शैक्षिक सेवाओं को अरबी भाषा में दुनिया के सामने लाने और विभिन्न शैक्षिक क्षेत्रों के बीच संपर्क मजबूत करने में योगदान देता रहेगा।

सम्मेलन में मिस्र, भारत, जॉर्डन, सीरिया, नाइजीरिया समेत विभिन्न देशों से आए कई विद्वानों और शैखों ने भाग लिया। इनमें मुस्तशार, शैख़ुल अज़हर, फ़ज़ीलतुल उस्ताद डॉक्टर मुहम्मद महना अल-अज़हरी, फ़ज़ीलतुल शैख़ युसरी जब्र अल-अज़हरी, फ़ज़ीलतुल शैख़ डॉक्टर अतिया मुस्तफ़ा अल-अज़हरी, फ़ज़ीलतुल शैख़ डॉक्टर इब्राहीम हदहुद अल-अज़हरी, फ़ज़ीलतुल शैख़ डॉक्टर जमाल फ़ारूक़ दक़ाक़ अल-अज़हरी, फ़ज़ीलतुल शैख़ मरवान कातिब (जॉर्डन), फ़ज़ीलतुल शैख़ मुख़लिफ़ अली अल-क़ादरी (दमिश्क, सीरिया), फ़ज़ीलतुल शैख़ डॉक्टर जमील इब्राहीम अल-अज़हरी, फ़ज़ीलतुल शैख़ डॉक्टर अहमद ममदूह अल-अज़हरी, फ़ज़ीलतुल शैख़ डॉक्टर अब्दुल करीम अल-अज़हरी, फ़ज़ीलतुल शैख़ डॉक्टर महमूद आबिदीन अल-अज़हरी, फ़ज़ीलतुल शैख़ डॉक्टर हानी तमाम अल-अज़हरी, फ़ज़ीलतुल शैख़ डॉक्टर अहमद अल-बसीली अल-अज़हरी, फ़ज़ीलतुल शैख़ मुहम्मद ख़ामिस अल-अज़हरी (नाइजीरिया), फ़ज़ीलतुल शैख़ डॉक्टर मरवान शाबान अल-अज़हरी, फ़ज़ीलतुल शैख़ डॉक्टर अल-हुसैन अल-बुख़ारी अल-अज़हरी और फ़ज़ीलतुल शैख़ डॉक्टर अहमद आबिद अल-अज़हरी आदि शामिल रहे।

भारत से छात्रों के उत्साहवर्धन के लिए पहुंचे विद्वानों में फ़ज़ीलतुल शैख़ सैयद मुहम्मद अल-क़ादरी, फ़ज़ीलतुल शैख़ सैयद जामी अशरफ़ी और फ़ज़ीलतुल शैख़ रियाज़ अलीमी अशरफ़ी समेत अन्य विद्वान एवं शैख़ शामिल थे।

कार्यक्रम के अंत में इस्लामी दुनिया, मिस्र, उम्मत-ए-मुस्लिमा और पूरी मानवता के लिए विशेष दुआ की गई। प्रतिभागियों ने साहत-ए-इमाम अहमद रज़ा अल-क़ादरी और इसके संस्थापक मौलाना ग़ुलाम मुहम्मद क़ादरी अल-अज़हरी की शैक्षिक एवं आध्यात्मिक कोशिशों की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे शैक्षिक, शोधपरक और प्रकाशन संबंधी कार्यक्रमों के आयोजन की उम्मीद जताई।

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