सऊदी अरब चीन के नेतृत्व वाले डिजिटल मुद्रा मंच mBridge से अलग

रियाद: सऊदी अरब ने चीन की भागीदारी वाले mBridge सीमा-पार डिजिटल मुद्रा भुगतान मंच में अपनी औपचारिक भागीदारी समाप्त कर दी है। सऊदी केंद्रीय बैंक के अनुसार, उसने 13 मई 2025 को परियोजना का निर्धारित प्रायोगिक चरण पूरा कर लिया था और इसके बाद वह mBridge का सहभागी सदस्य नहीं रहा। सऊदी अरब वर्ष 2023 में mBridge से पर्यवेक्षक के रूप में जुड़ा था और 2024 में इसके प्रायोगिक चरण में पूर्ण सहभागी बना। इस परियोजना में चीन, हांगकांग, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात के केंद्रीय बैंक भी शामिल हैं। इसका उद्देश्य केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्राओं के माध्यम से सीमा-पार भुगतान को तेज, सस्ता और अधिक प्रत्यक्ष बनाना है।

mBridge में ब्लॉकचेन आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके जरिए अलग-अलग देशों की डिजिटल मुद्राओं में सीधे लेन-देन और भुगतान निपटान संभव बनाया जा सकता है। इससे पारंपरिक संवाददाता बैंकिंग व्यवस्था और कुछ मामलों में अमेरिकी डॉलर को मध्यस्थ मुद्रा के रूप में इस्तेमाल करने की जरूरत कम हो सकती है। mBridge को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह चर्चा होती रही है कि ऐसी भुगतान प्रणालियां भविष्य में डॉलर-आधारित सीमा-पार भुगतान व्यवस्था के विकल्प उपलब्ध करा सकती हैं। अमेरिका में भी परियोजना को लेकर चिंता जताई गई है, खासकर चीन की भूमिका और प्रतिबंधों के अनुपालन से जुड़े सवालों को लेकर।

हालांकि, सऊदी केंद्रीय बैंक ने अपने फैसले को अमेरिकी दबाव से नहीं जोड़ा है। रियाद का कहना है कि उसकी भागीदारी मूल रूप से एक तकनीकी और प्रायोगिक अध्ययन का हिस्सा थी और निर्धारित प्रायोगिक चरण पूरा होने के बाद उससे अलग होना पहले से तय योजना के अनुरूप था।

सऊदी अरब का mBridge से अलग होना यह संकेत नहीं देता कि देश ने डिजिटल मुद्रा या आधुनिक सीमा-पार भुगतान तकनीकों में रुचि समाप्त कर दी है। सऊदी केंद्रीय बैंक पहले भी केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा और तेज सीमा-पार भुगतान से जुड़ी तकनीकों का अध्ययन करता रहा है। mBridge भी सऊदी अरब के बाहर जारी है और इसके शेष सहभागी सीमा-पार डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आगे विकसित कर रहे हैं। सऊदी अरब का mBridge से बाहर निकलना ऐसे समय हुआ है जब दुनिया के कई देश तेज और कम लागत वाली सीमा-पार भुगतान प्रणालियों की तलाश कर रहे हैं। रियाद ने इसे निर्धारित तकनीकी परीक्षण पूरा होने के बाद लिया गया निर्णय बताया है, जबकि परियोजना को लेकर डॉलर और वैश्विक भुगतान व्यवस्था पर इसके संभावित प्रभावों की चर्चा जारी है।

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