गाजा से न्यूयॉर्क तक गूंजी फिलिस्तीन की आवाज़, विश्व नेताओं ने युद्ध और जबरन विस्थापन रोकने की मांग की

न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की आम बहस की शुरुआत के साथ ही फिलिस्तीन का मुद्दा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में आ गया। गाजा में जारी युद्ध, नागरिकों की स्थिति, कब्जे वाले वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार और फिलिस्तीनियों के जबरन विस्थापन को लेकर कई देशों के नेताओं ने चिंता जताई।

मंगलवार को न्यूयॉर्क में शुरू हुई महासभा की बहस में विश्व नेताओं ने गाजा में युद्ध समाप्त करने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संघर्षविराम से जुड़े दायित्वों को लागू करने की मांग की। कई नेताओं ने इजरायली बस्तियों के विस्तार और कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों की स्थिति बदलने के प्रयासों के खिलाफ भी चेतावनी दी।

81वें महासभा सत्र की आम बहस 22 से 26 सितंबर तक चलेगी और 28 सितंबर को फिर शुरू होगी। इसमें दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष, सरकार प्रमुख और वरिष्ठ प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

गुटेरेस बोले—दो-राष्ट्र समाधान को दुनिया की आंखों के सामने खत्म नहीं होने दिया जा सकता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दुनिया के मौजूदा हालात को बेहद गंभीर बताते हुए विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों में तनाव कम करने और युद्ध समाप्त करने की अपील की।

गाजा की स्थिति पर बोलते हुए गुटेरेस ने कहा कि जिसे संघर्षविराम कहा जा रहा है, वह अभी भी वास्तविक शांति नहीं है। उन्होंने इसे कम तीव्रता के साथ जारी लड़ाई के रूप में वर्णित किया और गाजा में जारी मानवीय संकट की ओर ध्यान आकर्षित किया।

गुटेरेस ने 7 अक्टूबर के बाद फिलिस्तीनी क्षेत्रों में हुई व्यापक तबाही और जनहानि का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवनकाल में फिलिस्तीनी क्षेत्रों में विनाश का ऐसा स्तर नहीं देखा।

कब्जे वाले वेस्ट बैंक में बढ़ती हिंसा और इजरायली बस्तियों के विस्तार पर भी उन्होंने चिंता जताई। उनके अनुसार, ये घटनाक्रम शांति की संभावनाओं को कमजोर कर रहे हैं और जबरन विस्थापन की आशंकाएं बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दो-राष्ट्र समाधान की संभावना को समाप्त नहीं होने देने की अपील की।

कतर के अमीर ने गाजा को बताया ‘मानवता के माथे पर दाग’

कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी ने गाजा की स्थिति को “पूरी मानवता के माथे पर दाग” बताया और इसे “हर अर्थ में नरसंहार” करार दिया।

उन्होंने इजरायली सरकार पर संघर्षविराम समझौते के तहत किए गए दायित्वों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। कतर के अमीर ने कहा कि युद्ध की शुरुआत से ही उनका देश मध्यस्थता के प्रयासों में सक्रिय रहा है।

उन्होंने इजरायल से सैन्य अभियान समाप्त करने, गाजा से पीछे हटने और क्षेत्र में नाकाबंदी हटाने सहित संघर्षविराम से जुड़े दायित्वों को पूरा करने की मांग की।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि क्षेत्र में इजरायली सैन्य कार्रवाई का विस्तार पड़ोसी देशों की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

किंग अब्दुल्ला ने जबरन विस्थापन को लेकर चेताया

जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने गाजा में लगातार सैन्य कार्रवाई और नागरिक बुनियादी ढांचे के विनाश पर चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि मौजूदा घटनाक्रम फिलिस्तीनी उपस्थिति को मिटाने और क्षेत्र में एक नई वास्तविकता थोपने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।

किंग अब्दुल्ला ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक की स्थिति को भी बेहद गंभीर बताया। उन्होंने इजरायली बस्तियों के विस्तार और फिलिस्तीनी घरों को गिराए जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बस्तियों के विस्तार के लिए घरों को गिराना महज कानून-व्यवस्था की कार्रवाई नहीं, बल्कि जबरन विस्थापन है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संघर्ष को केवल “मैनेज” करने के बजाय उसके मूल कारणों को दूर करने की अपील की और फिलिस्तीनियों के वैध अधिकारों तथा एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना का समर्थन किया।

एर्दोगन बोले—गाजा बच्चों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा कब्रिस्तान

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने गाजा में जारी युद्ध पर तीखी चिंता जताई और कहा कि दुनिया इस मानवीय संकट से आंखें नहीं मूंद सकती।

उन्होंने उन देशों से फिलिस्तीन को मान्यता देने पर पुनर्विचार करने की अपील की, जिन्होंने अभी तक फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता नहीं दी है।

एर्दोगन ने गाजा को “दुनिया का सबसे बड़ा बच्चों का कब्रिस्तान” बताया और युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में बच्चों के अंग कटने का उल्लेख किया।

उन्होंने कब्जे वाले वेस्ट बैंक और यरुशलम में बढ़ती बस्ती हिंसा तथा मुस्लिम और ईसाई धार्मिक स्थलों तक पहुंच से जुड़ी पाबंदियों पर भी चिंता जताई।

तुर्की के राष्ट्रपति ने एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के समर्थन को दोहराते हुए 1967 की सीमाओं और पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाए जाने की स्थिति का समर्थन किया।

लूला ने कहा—फिलिस्तीनी पीढ़ियां युद्ध का दर्द झेलेंगी

ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने कहा कि गाजा युद्ध का दर्द और मानसिक आघात आने वाली कई पीढ़ियों तक फिलिस्तीनियों के साथ रहेगा।

उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार पर गाजा में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ “नरसंहार” करने का आरोप लगाया।

लूला ने संयुक्त राष्ट्र की युद्धों को रोकने और कमजोर लोगों की रक्षा करने की क्षमता पर भी सवाल उठाए और सुरक्षा परिषद में जारी गतिरोध की आलोचना की।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के समर्थन में भी बात रखी और अदालत तथा उसके सदस्यों पर दबाव की आलोचना की।

वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों के विस्तार पर उन्होंने कहा कि इससे दो-राष्ट्र समाधान को लागू करना लगातार कठिन होता जा रहा है।

अरब और मुस्लिम देशों ने कहा—गाजा फिलिस्तीनी क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा

मिस्र, कतर, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की और इंडोनेशिया के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान में इजरायल के उन कदमों की निंदा की, जिन्हें उन्होंने फिलिस्तीनी क्षेत्र पर नियंत्रण मजबूत करने और उसे अपने में मिलाने की दिशा में उठाए गए अवैध कदम बताया।

संयुक्त बयान में यरुशलम के मुस्लिम और ईसाई पवित्र स्थलों की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति को प्रभावित करने वाले कदमों पर भी चिंता जताई गई।

मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि गाजा फिलिस्तीनी क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा बना रहना चाहिए। उन्होंने गाजा और वेस्ट बैंक, जिसमें पूर्वी यरुशलम भी शामिल है, को एक संयुक्त फिलिस्तीनी राजनीतिक ढांचे में फिर से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

संयुक्त बयान में अमेरिका से भी सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभाने की अपील की गई, ताकि सभी पक्ष संघर्षविराम और व्यापक राजनीतिक रोडमैप से जुड़े अपने दायित्वों को पूरा करें।

UNGA में फिलिस्तीन फिर बना प्रमुख मुद्दा

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की शुरुआत में अलग-अलग देशों की नीतियों और दृष्टिकोणों में अंतर के बावजूद फिलिस्तीन का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया।

विश्व नेताओं के संबोधनों में गाजा में युद्ध समाप्त करने, नागरिकों की सुरक्षा, जबरन विस्थापन का विरोध, इजरायली बस्तियों के विस्तार को लेकर चिंता और फिलिस्तीनी क्षेत्रों की एकता बनाए रखने जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

जैसे-जैसे महासभा की आम बहस आगे बढ़ेगी, गाजा, वेस्ट बैंक और यरुशलम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने प्रमुख मुद्दों में बने रहने की संभावना है। साथ ही, फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष के राजनीतिक समाधान और दो-राष्ट्र समाधान की दिशा में अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों पर भी चर्चा जारी रहने की उम्मीद है।

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