न्यूयॉर्क | 24 सितंबर 2026
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने ग़ज़ा में जारी इज़राइली सैन्य कार्रवाई को लेकर इज़राइल की कड़ी आलोचना की। सांचेज़ ने कहा कि उनकी सरकार ग़ज़ा में जारी “Genocide” की बिना किसी शर्त के निंदा करती है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस संकट पर दोहरे मानदंड अपनाने से बचने की अपील की। सांचेज़ ने अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान, अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं का समर्थन और कथित उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।
फिलिस्तीन को लेकर स्पेन की नीति
ग़ज़ा युद्ध को लेकर स्पेन की मौजूदा नीति पहले से ही इज़राइल के लिए आलोचनात्मक रही है। मई 2024 में स्पेन ने आयरलैंड और नॉर्वे के साथ फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता दी थी। इसके बाद मैड्रिड ने इज़राइल के साथ सैन्य संबंधों पर कुछ प्रतिबंधात्मक कदम उठाए और यूरोपीय संघ के भीतर ग़ज़ा की स्थिति को लेकर इज़राइल के साथ संबंधों की समीक्षा की मांग भी की। सांचेज़ का यह बयान ऐसे समय आया है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में ग़ज़ा युद्ध और फिलिस्तीनी क्षेत्रों की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय नेताओं की ओर से लगातार चिंता व्यक्त की जा रही है।
कई वैश्विक नेताओं ने उठाया ग़ज़ा का मुद्दा
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने भी इज़राइल की कार्रवाई की आलोचना करते हुए उसकी कथित “genocidal mentality” का उल्लेख किया। वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने ग़ज़ा में मौत और तबाही के पैमाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की और इसे अपने वर्षों के मानवीय कार्यों के दौरान देखे गए सबसे गंभीर संकटों में से एक बताया।
ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने भी नेतन्याहू सरकार पर ग़ज़ा में genocide का आरोप लगाया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने संबोधन में ग़ज़ा की मानवीय स्थिति और वेस्ट बैंक में इज़राइली नीतियों का मुद्दा उठाया। संयुक्त राष्ट्र महासभा का मौजूदा सत्र ऐसे समय हो रहा है जब ग़ज़ा युद्ध, वेस्ट बैंक की स्थिति, फिलिस्तीनी राज्य के भविष्य और अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस तेज़ है।
