फ़िलिस्तीनियों के प्रति इज़रायली ज़ुल्म की इंतिहा, 1,000 फिलिस्तीनियों को अल-अक्सा मस्जिद में नमाज़ पढ़ने से रोका

इजरायली क़ब्ज़ा अधिकारियों ने यरूशलम के लगभग 1,000 फिलिस्तीनी निवासियों को अल-अक्सा मस्जिद में प्रवेश करने से रोकने के आदेश जारी किए हैं। यह कदम, फ़िलिस्तीनी नमाज़ियों पर प्रतिबंध और मस्जिद की इस्लामी पहचान और लंबे वक़्त से चली आ रही धार्मिक स्थिति को बदलने के प्रयासों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है।

यरूशलम यहूदीकरण विरोधी आयोग के प्रमुख नासिर अल-हिदमी ने चेतावनी दी कि इजरायल अल-अक्सा मस्जिद में नई व्यवस्था थोपने के प्रयासों को तेज कर रहा है और यहूदी त्योहारों का फायदा उठाकर सुरक्षा उपायों को कड़ा कर रहा है तथा फिलिस्तीनियों की पहुंच को प्रतिबंधित कर रहा है। उन्होंने कहा कि यरूशलम को प्रभावी रूप से एक “सैन्य बैरक” में बदल दिया गया है, जबकि इज़राइली सेटलर्स मस्जिद परिसर के अंदर यहूदी धार्मिक ईबादत कर रहे हैं, जिनमें प्रेयर,   नाँचने और ताली बजाना शामिल है।

यरूशलम मामलों के शोधकर्ता अब्दुल्ला मारूफ ने भी चेतावनी दी कि इजरायली क़ब्ज़ा बल मस्जिद के धार्मिक और सामाजिक स्वरूप के लिए खतरा हैं। उन्होंने एक घटना का हवाला दिया जिसमें अधिकारियों ने एक जनाजे को अल-अक्सा मस्जिद में नमाज़ के लिए दाख़िल करने से रोक दिया था। मरूफ ने इस प्रतिबंध को एक अभूतपूर्व कदम बताते हुए समझाया कि इजरायली नीतियां मस्जिद की भूमिका को सीमित धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित करने और मुस्लिम ईबादत और प्रवेश पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास करती हैं। अल-हिदमी ने बाब अल-रहमा और अल-अक्सा मस्जिद के पूर्वी हिस्से को निशाना बनाने की योजनाओं के बारे में भी चेतावनी दी और चिंता ज़ाहिर की कि वक़्त और जगह के आधार पर विभाजन थोपने के प्रयासों के तहत परिसर के कुछ हिस्सों को यहूदीयों की ईबादत के लिए मुक़र्रर किया गया है।

उन्होंने इजरायली अधिकारियों, खास तौर से राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गिवीर द्वारा बार-बार की गई घुसपैठ की ओर भी इशारा किया और उन पर मस्जिद परिसर का राजनीतिक और चुनावी उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।

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