उत्तरप्रदेश के कुशीपुर में 75 वर्षीय सिराजुलहक को आख़िरकार जेल से रिहाई मिल गयी। बेबुनियाद आरोपों की वजह से करीब 16 माह से जेल में बंद सिराजुलहक को उच्च न्यायालय से सशर्त जमानत मिलने के बाद सोमवार को घर पहुंचे। एलआईयू की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद पटहेरवा थाना पुलिस ने पत्नी सोगरा खातून से लंबे अरसे बाद मुलाक़ात की और फिर अपने घर लौटे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, गृह मंत्रालय से मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने पटहेरवा थाना के पिपरा कनक गांव के टोला गगलवा निवासी सिराजुलहक पुत्र नबीहसन के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया था। उन्हें 11 जून 2025 को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेजा गया था।पुलिस का आरोप था कि वह पाकिस्तानी नागरिक हैं और टूरिस्ट वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी भारत में रह रहे थे।
वहीं, स्वजन का कहना है कि देश के विभाजन के बाद उनके पिता और भाई बांग्लादेश में रह गए थे, जबकि सिराजुलहक भारत लौट आए थे और तभी से यहीं रह रहे हैं। बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को देखते हुए उच्च न्यायालय ने उन्हें सशर्त जमानत दी। थानाध्यक्ष अरुण सिंह ने बताया कि न्यायालय की शर्तों की जानकारी देने और जरूरी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के बाद स्वजन को सौंप दिया गया है।
