पेरिस/दोहा, 21 अक्टूबर 2026: फ्रांस में महंगाई के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों और कई शहरों में हुई हिंसा के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत विदेशी नेताओं पर निशाना साधा है। मैक्रों ने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी नेता फ्रांस की आंतरिक परिस्थितियों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर रहे हैं। उन्होंने भ्रामक सूचनाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार फर्जी तस्वीरों के प्रसार पर भी चिंता जताई।
ट्रंप के बयान पर मैक्रों का पलटवार
फ्रांस में हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान कुछ शहरों में तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं सामने आई थीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन घटनाओं को लेकर फ्रांस की इमिग्रेशन नीति की आलोचना की और मैक्रों को सीमाएं बंद करने तथा हालात पर नियंत्रण करने की सलाह दी। ट्रंप ने फ्रांस में जारी अशांति के लिए मुस्लिम प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराने वाले दावे भी किए। इसके जवाब में मैक्रों ने विदेशी नेताओं की टिप्पणियों को अनुचित और गैर-जिम्मेदाराना बताया। जब पत्रकारों ने मैक्रों से पूछा कि क्या उनकी आलोचना ट्रंप की ओर भी थी, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इशारा ट्रंप समेत कई नेताओं की तरफ है।
AI से बनाई गई फर्जी तस्वीरों पर चिंता
मैक्रों ने कहा कि फ्रांस में हुई घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचनाओं के साथ हेरफेर किया गया। उनके मुताबिक, AI की मदद से ऐसी तस्वीरें तैयार की गईं, जिनमें उन घटनाओं को दिखाया गया जो वास्तव में हुई ही नहीं थीं। उन्होंने उन दावों की भी आलोचना की, जिनमें फ्रांस को प्रवासियों और इस्लामी चरमपंथियों की भीड़ से घिरा हुआ बताया गया। मैक्रों ने इन दावों को गलत करार देते हुए कहा कि कुछ विदेशी नेता फ्रांस के बारे में फैलाए जा रहे भ्रामक नैरेटिव को अपने चुनावी और राजनीतिक हितों के लिए आगे बढ़ा रहे हैं।
महंगाई से शुरू हुआ प्रदर्शन, कई शहरों में फैली हिंसा
फ्रांस में बढ़ती जीवन-यापन लागत और आर्थिक परेशानियों को लेकर प्रदर्शन हुए। कई जगह शुरुआत में शांतिपूर्ण रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान बाद में हिंसा, पुलिस के साथ झड़प और लूटपाट की घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं ने फ्रांस की आंतरिक सुरक्षा और सरकार की कानून-व्यवस्था संभालने की क्षमता पर सवाल खड़े किए हैं। सरकार ने आगे होने वाले प्रदर्शनों के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और हिंसा रोकने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की बात कही है। मैक्रों ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा को जायज नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही उन्होंने कहा कि देश की समस्याओं को राजनीतिक लाभ के लिए बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के बजाय जिम्मेदारी से काम करने की जरूरत है।
मैक्रों की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब वह ऊर्जा आपूर्ति और बढ़ती कीमतों से निपटने के उद्देश्य से खाड़ी देशों के दौरे पर हैं। कतर में अपने दौरे के दौरान उन्होंने ऊर्जा उत्पादक देशों के साथ आपूर्ति को लेकर चर्चा की। रिपोर्टों के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन से फ्रांस को हर महीने अतिरिक्त डीजल आपूर्ति के लिए प्रतिबद्धताएं मिली हैं। सऊदी अरब समेत अन्य स्रोतों से भी अतिरिक्त आपूर्ति हासिल करने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। फ्रांस के लिए ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ईंधन की बढ़ती कीमतें आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को और बढ़ा सकती हैं।
मैक्रों और ट्रंप के बीच ताजा बयानबाजी दोनों नेताओं के संबंधों में बढ़ती तल्खी को दर्शाती है। फ्रांस की आंतरिक अशांति को लेकर अमेरिका की टिप्पणियों ने इमिग्रेशन, राष्ट्रीय सुरक्षा और पश्चिमी देशों की राजनीति से जुड़े मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है। इस घटनाक्रम ने एक अहम सवाल भी उठाया है— क्या किसी देश में जारी आंतरिक संकट को विदेशी राजनीतिक विमर्श में इस्तेमाल करना उचित है, खासकर तब जब सोशल मीडिया पर भ्रामक और AI-निर्मित सामग्री भी प्रसारित हो रही हो?
