ग़ाज़ा: GHF से भोजन पाने की आस में अभी तक, 1000 से अधिक लोगों की मौत

ग़ाज़ा: GHF से भोजन पाने की आस में अभी तक, 1000 से अधिक लोगों की मौत
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संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय – OHCHR ने बताया कि 27 मई को तथाकथित ग़ाज़ा मानवतावादी संस्थान (GHF) के संचालन शुरू होने के बाद से, ग़ाज़ा पट्टी में भोजन प्राप्त करने की कोशिश करते हुए, इसराइली सेना द्वारा 1,000 से अधिक फ़लस्तीनी मारे दिए गए हैं.

OHCHR के प्रवक्ता थमीन अल-ख़ीतान ने कहा, “हमने 21 जुलाई तक ग़ाज़ा में भोजन प्राप्त करने की कोशिश करते हुए 1,054 लोगों की मौत दर्ज की है. इनमें से 766 लोग जीएचएफ़ स्थलों के आसपास और 288 लोग, संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य मानवीय संगठनों के सहायता क़ाफिलों के पास मारे गए.”

थमीन अल-ख़ीतान ने बताया कि यह जानकारी “चिकित्सा टीमों, मानवीय और मानवाधिकार संगठनों सहित ज़मीनी स्तर पर कई विश्वसनीय स्रोतों से मिली है. इसे अब भी “हमारी कड़ी कार्यप्रणाली के अनुसार” सत्यापित किया जा रहा है.

GHF के केन्द्रों को अमेरिकी और इसराइली अधिकारियों का समर्थन प्राप्त है और इसने 27 मई को संयुक्त राष्ट्र व अन्य स्थापित ग़ैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को दरकिनार करते हुए, दक्षिणी ग़ाज़ा में काम करना शुरू कर दिया था.

उधर इसराइल द्वारा क़ाबिज़ ग़ाज़ा पट्टी में पिछले 48 घंटों के दौरान, भूख और थकान से यूएन कर्मचारियों के बेहोश होने की चेतावनियाँ मिली हैं जिनके कारण, युद्ध से तबाह हुए इस क्षेत्र में लोगों के जीवन को लेकर चिन्ताएँ बढ़ी हैं.

फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी – UNRWA की संचार निदेशक जूलियट टौमा ने मंगलवार को कहा, “डॉक्टर, नर्स, पत्रकार, मानवीय सहायताकर्मी भूखे पेट रहने के विवश हैं… अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए भूख और थकान के कारण बेहोश हो रहे हैं, जिनमें UNRWA के कर्मचारी भी शामिल हैं.”

जूलियेट टॉमा ने जॉर्डन की राजधानी अम्मान से बात करते हुए, ज़ोर देकर कहा कि भोजन की तलाश “बमबारी जितनी ही घातक हो गई है”.

युद्ध से भीषण रूप में तबाह हुए ग़ाज़ा में, यूएन कर्मी भरसक सहायता मुहैया कराने की कोशिश कर रहे हैं.
© UNRWA

ये भाड़े के सैनिकों का काम नहीं है

जूलियेट टौमा ने कहा, “GHF की तथाकथित खाद्य वितरण योजना क्रूर मौत का एक जाल है. निशानती बन्दूकधारी, भीड़ पर अन्धाधुन्ध गोलियाँ चलाते हैं, मानो उन्हें, लोगों को जान से मारने का लाइसेंस मिला हुआ हो.”

जूलियेट टौमा ने, इस एजेंसी के प्रमुख फ़िलिपे लज़ारिनी के एक बयान का हवाला देते हुए, इसे एक ऐसी योजना बताया जो “पूरी तरह से दंड से मुक्त होकर, लोगों को अपनी गोलियों का शिकार” बना रही है.

उन्होंने कहा, “यह हमारा नई सामान्य स्थिति नहीं हो सकती. मानवीय सहायता मुहैया कराना, भाड़े के सैनिकों का काम नहीं है.”

प्रवक्ता ने ज़ोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र और उसके मानवीय सहयोगियों के पास सुरक्षित, सम्मानजनक और व्यापक सहायता प्रदान करने के लिए विशेषज्ञता, अनुभव और संसाधन उपलब्ध हैं.

उन्होंने कहा, “हमने पिछले युद्धविराम के दौरान इसे बार-बार साबित किया है.”

ग़ाज़ा पट्टी में जीवन स्तर एक नए निम्न स्तर पर पहुँच गया है क्योंकि बुनियादी वस्तुओं की क़ीमतों में लगभग 4 हज़ार प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

ग़ाज़ा के अधिकर निवासियों के घर तबाह हो गए हैं और अधिकतर लोग कई बार विस्थापित हुए हैं. अधिकतर लोगों के पास कोई आय नहीं है और उनके पास आवश्यक वस्तुएँ बिल्कुल नहीं के बराबर बची हैं.

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