संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने एक बेहद दर्दनाक रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक़ पिछले साल दुनिया भर में 383 इंसानी मददगार अपनी जान से हाथ धो बैठे। हैरानी की बात ये है कि इनमें से आधे से ज़्यादा, यानी 181, सिर्फ़ ग़ाज़ा में क़त्ल किए गए। सूडान में भी हालात कम ख़तरनाक नहीं रहे, जहां 60 मददगार मारे गए।
यूएन के इंसानी मदद के चीफ़ टॉम फ़्लेचर ने इसे दुनिया की “लापरवाही और बेरुख़ी का शर्मनाक सबूत” बताया। उन्होंने कहा कि 2022 के मुक़ाबले 2023 में मददगारों पर हमले 31 फ़ीसद बढ़ गए, और इसकी सबसे बड़ी वजह ग़ाज़ा और सूडान जैसे जंग-ज़दा इलाक़े हैं।
फ़्लेचर ने ग़ुस्से और दुख के साथ कहा – “किसी भी मददगार पर हमला, हम सब पर हमला है और उन लोगों पर भी जो हमारी मदद के मुंतज़िर हैं। इतने बड़े पैमाने पर हमले और उस पर कोई जवाबदेही न होना, इंसानियत के लिए बेहद शर्मनाक है।”
ये बयान वर्ल्ड ह्यूमेनिटेरियन डे (World Humanitarian Day) पर आया, जब यूएन उन तमाम बहादुरों को याद करता है जो ज़रूरतमंदों तक राहत पहुँचाते हुए अपनी ज़िंदगी कुर्बान कर देते हैं।
