बिहार के पटना ज़िले की रहने वाली मुनीरा बेग़म ने हिन्दुस्तान की आज़ादी की जंग में अहम किरदार अदा किया। वो हज़रत मख़दूम साहब के खानदान से ताल्लुक़ रखती थीं। साल 1917 में जब महात्मा गाँधी ने चंपारण सत्याग्रह शुरू किया, तो मुनीरा बेग़म ने खुलकर इसमें हिस्सा लिया।
उस वक़्त औरतों के लिए घर से बाहर निकलना आसान नहीं था, लेकिन मुनीरा बेग़म ने सारी रुकावटों को तोड़कर गाँव-गाँव जाकर औरतों को अंग्रेज़ी हुकूमत के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए तैयार किया। उन्होंने महिलाओं को तालीम और हक़ की लड़ाई की अहमियत समझाई।
उनकी कोशिशों से बड़ी तादाद में औरतें आंदोलन से जुड़ीं और अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ मजबूती से खड़ी हुईं। मुनीरा बेग़म का ये जज़्बा आज़ादी की जंग में औरतों की शिरकत को मज़बूत करने की बड़ी मिसाल है।
