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गाज़ा सिटी और उसके आसपास के इलाक़ों में भूख और भुखमरी की स्थिति अब आधिकारिक तौर पर आकाल (famine) मानी जा रही है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतरेस ने इसे “इंसानियत की नाकामी” और एक “इंसान-साज़ तबाही” बताया।
यूएन से जुड़ी संस्था Integrated Food Security Phase Classification (IPC) ने ग़ज़ा की स्थिति को फ़ेज़ 5 तक पहुँचा दिया है। यह वह स्तर है, जिसे दुनिया में भूख और खाद्य संकट का सबसे ख़तरनाक दर्जा माना जाता है। इसका मतलब है कि अब गाज़ा में हालात महज़ मुश्किल नहीं, बल्कि आकाल की हद तक पहुँच चुके हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक़, गाज़ा में 5 लाख से ज़्यादा लोग बेहद ख़तरनाक हालात का सामना कर रहे हैं। उन्हें न तो पर्याप्त खाना मिल रहा है और न ही जीने की बुनियादी ज़रूरतें। लोग भूख, बेबसी और मौत जैसी सूरतों में फँस चुके हैं।
हालाँकि, इज़राइल ने इस रिपोर्ट को “सीधा झूठ” कहकर खारिज कर दिया और दावा किया कि गाज़ा में आकाल जैसी कोई स्थिति नहीं है।
लेकिन गुतरेस का कहना है कि यह कोई प्राकृतिक आफ़त नहीं, बल्कि इंसानों की बनाई हुई त्रासदी है। उन्होंने दुनिया से अपील की है कि इस मानवीय तबाही को रोकने के लिए तुरंत और ठोस क़दम उठाए जाएँ, वरना गाज़ा का भविष्य और भी अंधकारमय हो सकता है।
