यूरो-मेड की चेतावनी: ग़ाज़ा में फ़िलिस्तीनियों को जबरन “ग्रीन सिटी” में बंद करने की अमेरिका–इज़राइल की योजना

ग़ाज़ा/रफ़ाह: यूरो-मेड मानवाधिकार निगरानी संस्था ने ग़ाज़ा पट्टी में फ़िलिस्तीनियों को लेकर अमेरिका और इज़राइल की एक तथाकथित “ग्रीन सिटी” योजना पर गंभीर चिंता जताई है। संस्था के अनुसार यह कोई मानवीय समाधान नहीं, बल्कि फ़िलिस्तीनियों को उनके घरों और इलाक़ों से जबरन हटाकर सैन्य नियंत्रण वाले बंद क्षेत्रों में कैद करने की साज़िश है।

यूरो-मेड के मुताबिक़, पिछले दो वर्षों से विस्थापित फ़िलिस्तीनियों को ग़ाज़ा के दक्षिणी हिस्से रफ़ाह में कारवां जैसी अस्थायी इमारतों में बसाने की तैयारी की जा रही है। यह इलाक़ा पहले से ही पूरी तरह इज़राइली सेना के कब्ज़े में है, जहाँ मलबा हटाने, ज़मीन समतल करने और निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि ग़ाज़ा को “रेड ज़ोन” और “ग्रीन ज़ोन” में बाँट दिया गया है। इन दोनों के बीच एक तथाकथित “येलो लाइन” बनाई गई है, जिसके पास जाने या उसे पार करने वालों पर गोली मारने की नीति लागू की गई है। हाल के हफ्त़ों में इस सीमा को और आगे बढ़ाया गया है, जिससे इज़राइली सैन्य नियंत्रण वाला इलाक़ा ग़ाज़ा के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से तक फैल गया है।

यूरो-मेड के अनुसार प्रस्तावित ग्रीन सिटी में एक वर्ग किलोमीटर से भी कम जगह में लगभग 25,000 फ़िलिस्तीनियों को रखा जाएगा। चारों ओर बाड़, चेकपोस्ट और सख़्त निगरानी होगी, तथा आवाजाही केवल सुरक्षा जांच के बाद ही संभव होगी। संस्था ने इस योजना को अंतरराष्ट्रीय क़ानून का खुला उल्लंघन और फ़िलिस्तीनी जनता के आत्मनिर्णय के अधिकार पर सीधा हमला बताया है।

यूरो-मेड ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे ऐसी योजनाओं को तुरंत ख़ारिज करें और ग़ाज़ा की नाकेबंदी हटाने के लिए प्रभावी दबाव बनाएँ।

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