युद्ध की आड़ में ज़मीन पर कब्ज़ा: 2025 में “इज़राइल” की विस्तारवादी नीति का पूरा ब्लू प्रिंट

साल 2025 को, केवल युद्ध और टकराव के साल के तौर पर देखना हक़ीक़त को अधूरा समझना होगा। यह वह साल था जब “इज़राइल” ने युद्ध को एक अस्थायी सैन्य कार्रवाई के बजाय स्थायी भू-विस्तार की रणनीति में तब्दील कर दिया। फ़िलिस्तीन से लेकर लेबनान और सीरिया तक, “सुरक्षा” और “आत्मरक्षा” की भाषा का इस्तेमाल करते हुए ज़मीन पर ऐसे हालात बनाए गए, जो कब्ज़े को अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी बनाते चले गए।

स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 में जो कुछ भी हुआ, वह अचानक लिया गया कोई सैन्य फ़ैसला नहीं था। यह विस्थापन, ज़मीन की तबाही, नागरिकों की वापसी को असंभव बनाने और तथाकथित “बफर ज़ोन” व “मिलिट्री कॉरिडोर” के ज़रिये नक़्शों को नए सिरे से गढ़ने की एक सुविचारित नीति थी। शब्द बदले गए, लेकिन नतीजा वही रहा ज़मीन से लोगों का सफ़ाया और सैन्य नियंत्रण का स्थायीकरण।

भाषा के पीछे छुपा विस्तार

रिपोर्ट बताती है कि “इज़राइल” लगातार “बफर ज़ोन”, “ह्यूमैनिटेरियन कॉरिडोर” और “सिक्योरिटी एरिया” जैसे शब्दों का प्रयोग करता रहा। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ये शब्द मानवीय या रक्षात्मक लगते हैं, लेकिन ज़मीन पर इनका मतलब साफ़ था नागरिकों को हटाना, इलाक़ों को सैन्य नियंत्रण में लेना और भविष्य में बस्तियों के लिए ज़मीन तैयार करना।

एक बार किसी इलाक़े को “सुरक्षा कारणों” से खाली कराया गया, तो वहां सैन्य ढांचे, निगरानी सिस्टम और बेस स्थापित किए गए। जो कदम अस्थायी बताए गए, वही धीरे-धीरे स्थायी कब्ज़े की नींव बनते चले गए।

फ़िलिस्तीन: ग़ज़ा: उजाड़ कर नियंत्रण

2025 में ग़ज़ा “इज़राइल” की इस नीति का सबसे क्रूर उदाहरण बना। “बफर ज़ोन” और “मिलिट्री कॉरिडोर” के नाम पर ग़ज़ा के बड़े हिस्से को नागरिक जीवन के लिए अनुपयोगी बना दिया गया। इसके अलावा इज़राइली नेता अमीखाय एलियाहू ने खुले तौर पर ग़ज़ा पर पूर्ण कब्ज़े और यहूदी बस्तियों की बहाली की मांग की। सैन्य रिपोर्टों में बीत हनून के ऊँचे इलाक़ों पर स्थायी सैन्य निगरानी की योजना सामने आई, ताकि ग़ज़ा के निवासी दोबारा लौट ही न सकें।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2023 के बाद से नागरिक ढांचे को व्यवस्थित तरीके से नष्ट किया गया। जुलाई 2025 तक, UN OCHA ने बताया कि ग़ज़ा के 87.8% क्षेत्र में या तो इज़राइली सेना मौजूद थी या वहां विस्थापन आदेश लागू थे।

“इज़राइल” ने चार सैन्य गलियारों— फ़िलाडेल्फ़ी, मोराग, नेत्ज़ारिम और मागेन-ओज़ — की मौजूदगी स्वीकार की, जबकि एक पांचवां गलियारा जबालिया में पुष्टि किया गया। इन गलियारों और सीमा बफर ज़ोन ने मिलकर ग़ज़ा के लगभग 75% हिस्से को आम नागरिकों से छीन लिया। नेत्ज़ारिम कॉरिडोर में 95% से ज़्यादा इमारतें तबाह कर दी गईं। अगस्त 2025 में, नहल ब्रिगेड के सैनिकों ने खुद माना कि यह तबाही जानबूझकर की गई ताकि मूल निवासियों की वापसी रोकी जा सके। साथ ही, “स्वैच्छिक पलायन” की नीति को आगे बढ़ाया गया, जिसे फरवरी 2025 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन भी मिला। साल के अंत तक, ग़ज़ा को रहने लायक़ न रखने की रणनीति साफ़ तौर पर सामने आ चुकी थी।

पश्चिमी तट: ख़ामोश लेकिन तेज़ विस्तार

पश्चिमी तट में 2025 के दौरान कोई औपचारिक युद्ध नहीं हुआ, लेकिन बसावट विस्तार अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ा। मई 2025 में एरिया C में भूमि पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की गई, जिसे व्यापक रूप से “एनेक्सेशन” की तैयारी माना गया।

वित्त मंत्री बेज़ालेल स्मोट्रिच ने साफ़ कहा कि इस प्रक्रिया का मक़सद क्षेत्र पर इज़राइली नियंत्रण को स्थायी बनाना है। दिसंबर में, सुरक्षा कैबिनेट ने 19 नई बस्तियों को मंज़ूरी दी, जिनमें दो दशकों पहले हटाई गई गानिम और कादिम बस्तियों की वापसी भी शामिल थी। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र महासचिव के अनुसार, 2025 में 47,390 बसावट इकाइयों की योजनाएं आगे बढ़ीं— जो 2024 की तुलना में लगभग दोगुनी थीं।

लेबनान: युद्धविराम के बाद भी कब्ज़ा

2024 के संघर्षविराम के बाद भी दक्षिणी लेबनान में “इज़राइल” की सैन्य गतिविधियां थमी नहींं। सुरक्षा के नाम पर सैन्य चौकियां, निगरानी ढांचे और दीवारें खड़ी की गईं।

2025 तक, “इज़राइल” हमामेस हिल, लब्बूनेह हिल, माउंट ब्लात हिल, अज़्ज़ीय्येह और अल-अवैदा हिल समेत पांच स्थानों पर मौजूद था। UNIFIL की जांच में सामने आया कि एक दीवार निर्माण के कारण 4,000 वर्ग मीटर से अधिक लेबनानी ज़मीन नागरिकों के लिए अनुपयोगी हो गई।

यूएन महासचिव के प्रवक्ता स्टेफ़ान दुजारिक ने पुष्टि की कि ये कदम युद्ध की आड़ में लंबे समय से चली आ रही योजनाओं का हिस्सा थे।

सीरिया: अस्थिरता का फ़ायदा

बशर अल-असद सरकार के पतन के बाद, “इज़राइल” ने दक्षिणी सीरिया में अपनी सैन्य मौजूदगी तेज़ कर दी। गोलान हाइट्स से आगे तथाकथित “बफर ज़ोन” बनाए गए और माउंट हर्मोन पर स्थायी तैनाती की घोषणा की गई। इज़राइली सुरक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने कहा कि सेना अनिश्चितकाल तक माउंट हर्मोन की चोटी पर रहेगी। फरवरी 2025 में इस क्षेत्र को इज़राइली नागरिकों के लिए खोल दिया गया।

विश्लेषकों के मुताबिक, यह 1974 के समझौते को निष्प्रभावी करने की दिशा में एक बड़ा क़दम था।

निष्कर्ष

2025 में “इज़राइल” की नीति प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सुनियोजित विस्तार थी। “सुरक्षा” की भाषा के पीछे छुपकर, ज़मीन पर ऐसे हालात बनाए गए जो बिना औपचारिक ऐलान के सीमाओं को बदलते चले गए।

2025 इस बात की चेतावनी है कि क्षेत्र में जो कुछ हो रहा है, वह अस्थायी युद्ध नहीं बल्कि स्थायी नक़्शा-परिवर्तन की प्रक्रिया है।

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