ग़ज़ा में इलाज के इंतज़ार में 18,500 ज़िंदगियाँ, रोज़ मौत से जूझ रहे सैकड़ों मरीज़: WHO

ग़ज़ा में स्वास्थ्य व्यवस्था गहरे संकट से गुज़र रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी (WHO) ने चेतावनी दी है कि 18,500 से अधिक मरीज़ ऐसे हैं जिन्हें विशेष चिकित्सा देखभाल की ज़रूरत है, लेकिन यह सुविधा फिलहाल ग़ज़ा में उपलब्ध नहीं है। लगातार हमलों और सीमित संसाधनों के कारण हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं।

WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसुस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि WHO और उसके साझेदारों की मदद से सोमवार को रफ़ा क्रॉसिंग के ज़रिये 5 मरीज़ों और उनके साथ 7 परिजनों को मिस्र भेजा गया। उन्होंने कहा कि मार्च 2025 के बाद यह पहला मेडिकल इवैक्यूएशन है, जो हालात की गंभीरता को साफ़ तौर पर दर्शाता है।

डॉ. टेड्रोस ने कहा कि दो वर्षों से अधिक समय से जारी लगातार हमलों के बाद अब ग़ज़ा में मेडिकल इवैक्यूएशन पर निर्भरता कम करना बेहद ज़रूरी हो गया है। इसके लिए उन्होंने तत्काल पुनर्वास और पुनर्निर्माण की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति नहीं बढ़ाई जाती, क्षतिग्रस्त स्वास्थ्य सुविधाओं की मरम्मत नहीं होती और ज़रूरी सेवाओं का विस्तार नहीं किया जाता, तब तक ग़ज़ा में एक मज़बूत और टिकाऊ स्वास्थ्य प्रणाली खड़ी करना संभव नहीं होगा।

WHO प्रमुख ने पश्चिमी तट और पूर्वी यरुशलम की ओर मेडिकल रेफरल मार्गों को तुरंत फिर से खोलने की भी अपील की, ताकि गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों को जीवनरक्षक इलाज तक समय पर पहुंच मिल सके।

इस संकट की भयावह तस्वीर अल-शिफ़ा मेडिकल कॉम्प्लेक्स के निदेशक डॉ. मोहम्मद अबू सलमिया के बयान से और साफ़ होती है। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ मेडिकल समितियां मरीज़ों को उनकी हालत की गंभीरता के आधार पर प्राथमिकता दे रही हैं। उनके अनुसार, लगभग 450 मरीज़ अत्यंत गंभीर स्थिति में हैं, और इलाज के लिए ग़ज़ा से बाहर भेजने में हो रही देरी के कारण लगभग रोज़ मौतें हो रही हैं।

ग़ज़ा में यह संकट सिर्फ़ आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि उन हज़ारों ज़िंदगियों की हकीकत है जो आज भी इलाज की उम्मीद में सांसें गिन रही हैं।

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