लंदन स्थित ब्रिटिश म्यूज़ियम ने अपनी प्राचीन मध्य-पूर्व गैलरियों में प्रदर्शित कुछ मानचित्रों और विवरणों से “पैलेस्टाइन” शब्द हटाने का निर्णय लिया है। यह दावा ब्रिटेन के अख़बार The Telegraph की एक रिपोर्ट में किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार यह फैसला प्रो-इज़राइल संगठनों यानी (जो इज़राइल के समर्थन में) है उनकी ओर से उठाई गई आपत्तियों और दबाव के बाद लिया गया है। यूके स्थित संगठन UK Lawyers for Israel ने संग्रहालय प्रबंधन को पत्र लिखकर इस शब्द के उपयोग पर आपत्ति जताई थी। संगठन का तर्क था कि पूर्वी भूमध्यसागर के तटीय क्षेत्र को हजारों वर्षों के ऐतिहासिक संदर्भ में “पैलेस्टाइन” के रूप में दर्शाना ऐतिहासिक बदलावों को नजरअंदाज करता है और एक भ्रामक निरंतरता का आभास देता है।
समाचार के मुताबिक, प्राचीन मिस्र और फोनीशियन सभ्यता से संबंधित कुछ मानचित्रों और डिस्प्ले पैनलों में पहले इस क्षेत्र को “पैलेस्टाइन” के रूप में दर्शाया गया था। कुछ स्थानों पर कुछ समुदायों को “पैलेस्टाइन मूल” का भी बताया गया था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि संग्रहालय ने निष्कर्ष निकाला कि इस संदर्भ में “पैलेस्टाइन” शब्द एक उपयुक्त ऐतिहासिक भौगोलिक अर्थ नहीं रखता। इसके बाद कुछ व्याख्यात्मक सामग्रियों से इस शब्द को हटाने का निर्णय लिया गया।
इन बदलावों के तहत हिक्सोस से संबंधित विवरण में भी संशोधन किया गया। जहां पहले उन्हें “पैलेस्टाइन मूल” का बताया गया था, वहां अब “कनानी मूल” (Canaanite origin) लिखा गया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि यह निर्णय आगंतुकों की प्रतिक्रिया और सर्वेक्षणों से प्राप्त सुझावों से भी प्रभावित हुआ।
इस कदम के बाद ऐतिहासिक शब्दावली के उपयोग और संग्रहालयों में इतिहास की प्रस्तुति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
