ईरान पर इसराइल व संयुक्त राज्य अमेरिका के हवाई हमलों और फिर ईरान की जवाबी कार्रवाई से पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में उथलपुथल मची है, और वायु क्षेत्र व परिवहन मार्गों में बड़ा व्यवधान दर्ज किया गया है. परिस्थितियाँ तेज़ी से बिगड़ रही है, हताहत होने वाले आम नागरिकों की संख्या बढ़ रही है और खाड़ी देशों समेत व्यापक क्षेत्र में व्यापक अस्थिरता फैलने की आशंका है. संयुक्त राष्ट्र ने आम नागरिकों, बच्चों और स्वास्थ्य सेवाओं समेत वृहद क्षेत्र पर बढ़ते असर के प्रति गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए इस टकराव पर तुरन्त विराम लगाए जाने की अपील की है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मध्य पूर्व में अनेक मोर्चों पर टकराव के फैलने और हताहत होने वाले आम नागरिकों की संख्या बढ़ने की चेतावनी दी है. यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने न्यूयॉर्क में मंगलवार को पत्रकारों को बताया कि महासचिव, मध्य पूर्व में घटनाक्रम और वृहद क्षेत्र में इसके प्रभावों पर चिन्तित हैं.
खाड़ी क्षेत्र में स्थित देशों में तेल व ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम भी बढ़ रहे हैं. ईरान में, शनिवार से अब तक हुए हवाई हमलों में 1 हज़ार स्थलों के प्रभावित होने की ख़बर है, जिनमें लगभग 790 लोगों की जान गई है और 750 से अधिक घायल हुए हैं.
वहीं, ईरान के जवाबी मिसाइल व ड्रोन हमलों में इसराइल में कम से कम 10 लोगों के मारे जाने और अनेक अन्य के घायल होने का समाचार है. साथ ही, नागरिक प्रतिष्ठानों को क्षति पहुँची है.
तनाव में कमी लाने के लिए कूटनैतिक प्रयास
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मध्य पूर्व में भड़के टकराव व बढ़ते तनाव में कमी लाने के लिए अपने कूटनैतिक प्रयास तेज़ कर दिए हैं.
यूएन प्रवक्ता ने बताया कि मंगलवार को महासचिव ने ईरान के स्थाई प्रतिनिधि अमिर सैयद ईरावनी से मुलाक़ात की, टकराव पर तुरन्त विराम लगाने और क्षेत्रीय स्थिरता के हित में सम्वाद की ओर वापसी की अपील दोहराई.
महासचिव गुटेरेश ने सैन्य टकराव को और बढ़ने से रोकने के लिए ओमान के राजदूत ओमार सैद ओमार अल कथीरी से भी बातचीत की है, और मध्यस्थता प्रयासों में ओमान की भूमिका की सराहना की.
इसके अलावा, अन्य क्षेत्रीय प्रतिनिधियों के साथ भी मुलाक़ात की सम्भावना है ताकि कूटनैतिक सम्पर्क व बातचीत से तनाव घटाने में मदद मिल सके.
हिंसक टकराव से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आगाह किया है कि मध्य पूर्व में हिंसक टकराव का दायरा फैलने से पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर हो रहा है और यह व्यवधान बढ़ता जा रहा है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने लेबनान के दक्षिणी टायर ज़िले में एक विस्फोट में 3 स्वास्थ्यकर्मियों के मारे जाने और 6 अन्य के मारे जाने पर दुख प्रकट किया है. ये स्वास्थ्यकर्मी, विस्फोट में घायल हुए लोगों को बचाने में जुटे थे.
WHO प्रमुख ने कहा कि हताहतों में और अधिक संख्या में स्वास्थ्यकर्मियों के शामिल होने का जोखिम ज़्यादा है. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों की सदैव रक्षा की जानी होगी और अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून का पालन किया जाना आवश्यक है.
महानिदेशक घेबरेयेसस ने संयम व हिंसा पर विराम लगाने की अपील करते हुए कहा कि, “शान्ति, सर्वोत्तम औषधि है.”
ईरान पर हुए हमलो की निन्दा
ईरान पर यूएन मानवाधिकार परिषद द्वारा गठित एक तथ्य-खोजी मिशन ने इसराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा किए हमलों की कठोर निन्दा की है.
ईरान पर स्वतंत्र अन्तरराष्ट्रीय तथ्य-खोजी मिशन को यूएन मानवाधिकार परिषद द्वारा 2022 में स्थापित किया गया था. इस मिशन का दायित्व, ईरान में कथित रूप से मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मामलों की जाँच करना है और यह यूएन सचिवालय से स्वतंत्र रूप से कार्यरत है.
मिशन ने सचेत किया है कि ये हमले, किसी देश की क्षेत्रीय अखंडता और राजनैतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल का प्रयोग है, जोकि संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निषिद्ध है.
मानवाधिकार विशेषज्ञों ने बुधवार को जिनीवा में जारी एक वक्तव्य में सभी पक्षों को ध्यान दिलाया है कि अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी और मानवाधिकार क़ानून का सदैव सम्मान किया जाना होगा. सैन्य बलों और नागरिकों के बीच भेद करना होगा और आम नागरिकों की रक्षा सुनिश्चित की जानी होगी.
तथ्य-खोजी मिशन ने हिंसक टकराव के दौरान ईरान के मिनाब में लड़कियों के एक प्राइमरी स्कूल के बमबारी की चपेट में आने की ख़बरों पर क्षोभ व्यक्त किया है. इस घटना में 150 से अधिक छात्राओं व शिक्षकों के मारे जाने की रिपोर्ट है.
ईरान के जवाबी हमलो पर अलार्म
तथ्य-खोजी मिशन ने ईरान द्वारा अपने पड़ोसी देशों पर जवाबी हमले किए जाने पर गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए आगाह किया है कि इन हमलों में आम नागरिकों की मौत हो रही है और पूरे क्षेत्र में नागरिक प्रतिष्ठानों को क्षति पहुँच रही है.
मानवाधिकार विशेषज्ञों ने ज़ोर देकर कहा कि सभी पक्ष, अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी और मानवाधिकार क़ानून से बंधे हैं, जिनमें हिंसक टकराव के दौरान आम नागरिकों व नागरिक प्रतिष्ठानों की रक्षा करने का दायित्व भी है.
उन्होंने चेतावनी दी है कि सैन्य टकराव में तेज़ी आने से ईरान और व्यापक क्षेत्र में आम नागरिकों के लिए जोखिम बढ़ेगा, जिसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने सभी पक्षों से हमलों को तुरन्त रोके जाने का आग्रह किया है.

लेबनान में बिगड़ते हालात
उधर, लेबनान में संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने बताया है कि बढ़ते हमलों व टकराव के बीच, पिछले 24 घंटों में 7 बच्चों की मौत हो गई है और 38 बच्चे घायल हुए हैं.
यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब हिज़्बुल्लाह को निशाना बनाकर किए गए इसराइली हवाई हमलों का सिलसिला, लेबनान के अनेक इलाक़ों में फिर से तेज़ हो गया है. इन हमलों से बड़े पैमाने पर लोगों का विस्थापन हुआ है और पहले से नाज़ुक मानवीय हालात और बिगड़ गए हैं.
ख़बरों के अनुसार, इसराइल ने दक्षिणी लेबनान के अनेक समुदायों को अपने इलाक़े ख़ाली करने के आदेश जारी किए हैं, जिससे देश की लगभग 5 प्रतिशत आबादी प्रभावित हुई है. इसमें लितानी नदी के दक्षिण में रहने वाले लगभग 2.5 लाख लोग शामिल हैं.
पिछले 24 घंटों में, लगभग 18 हज़ार बच्चों सहित 60 हज़ार लोग नए सिरे से विस्थापित हुए हैं, जिससे पहले से विस्थापन का शिकार हज़ारों लोगों की संख्या में इज़ाफ़ा हुआ है.
देश भर में कम से कम 300 शरण स्थलों में 12 हज़ार से अधिक परिवारों ने शरण ली है, जबकि कई स्थल पहले ही अपनी पूरी क्षमता पर पहुँच चुके हैं.
यूनीसेफ़ के लेबनान प्रतिनिधि मार्कोलुइजी कॉर्सी ने कहा, “कोई भी बच्चा कभी भी मारा नहीं जाना चाहिए और न ही उसे शारीरिक और मानसिक हिंसा के निशानों को जीवन-पर्यन्त सहने के लिए छोड़ना चाहिए.”
यूनीसेफ़ के सहायता प्रयासों के तहत 10 लाख ज़रूरतमन्द लोगों तक सहायता पहुँचाने के लिए 4.8 करोड़ डॉलर की आवश्यकता है, लेकिन अब तक केवल 16 प्रतिशत धनराशि ही प्राप्त हुई है.
Source : UN News Hindi
