लेबनान, इराक़ और सीरिया में स्वास्थ्य तंत्र के लिए, 20 लाख डॉलर की आपात सहायता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने लेबनान, इराक़ और सीरिया में स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था को समर्थन देने के लिए, आपात कोष से अतिरिक्त 20 लाख डॉलर जारी करने की घोषणा की है. यह सहायता ऐसे समय में दी जा रही है, जब अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर हमले जारी हैं, और इसके जवाब में ईरान की ओर से खाड़ी देशों और व्यापक क्षेत्र में पलटवार हमले हो रहे हैं.

यूएन एजेंसी ने रविवार को बताया कि दानदाताओं के योगदान पर आधारित यह धनराशि, आपात समन्वय, चोट के उपचार व घायलों की देखभाल और रोग निगरानी को मज़बूत करने में मदद करेगी. 

साथ ही, इससे आवश्यक दवाओं और चिकित्सा सामग्री तक पहुँच सुनिश्चित की जा सकेगी.

शान्ति की राह का आग्रह

WHO महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि, हताहतों की बढ़ती संख्या के साथ स्वास्थ्य सेवाओं पर हमले भी बढ़ रहे हैं. “इससे उन स्वास्थ्य प्रणालियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, जिनकी इस समय सबसे अधिक आवश्यकता है.”

उन्होंने सभी पक्षों से अपील करते हुए कहा, “मैं सभी से साहसिक और जीवन बचाने वाले शान्ति मार्ग चुनने का आग्रह करता हूँ.”

WHO की क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर नाना बाल्ख़ि ने कहा कि ऐसे समय में, जब सहायता में पहले से ही उल्लेखनीय कटौती हो रही है, अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए समर्थन बढ़ाना ज़रूरी है.

स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव

लेबनान में, ईरान के समर्थन में हिज़बुल्लाह लड़ाकों द्वारा फिर से शुरू किए गए हमलों और इसके जवाब में, इसराइल द्वारा देश के दक्षिणी हिस्सों तथा राजधानी बेरूत सहित अनेक इलाक़ों पर किए जा रहे भीषण हमलों में, बड़ी संख्या में लोग घायल हो रहे हैं. इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव पड़ रहा है.

WHO महानिदेशक घेबरेयेसस ने शनिवार को बताया था कि दक्षिणी लेबनान में, पिछले 24 घंटों के दौरान 14 स्वास्थ्यकर्मियों का मारा जाना, इस क्षेत्रीय संकट में एक “दुखद घटनाक्रम” है. 

दक्षिणी लेबनान में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर देर रात हुए एक हमले में 12 डॉक्टरों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य स्वास्थ्य केन्द्र पर हमले में दो सहायक चिकित्साकर्मियों की भी जान चली गई.

2 मार्च के बाद से, लेबनान में स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं पर 27 हमले दर्ज किए गए हैं, जिनमें कम से कम 30 लोगों की मौत हुई है.

इराक़ में भी, इन हालात के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है, विशेष रूप से उन इलाक़ों में जो हमलों के दायरे के क़रीब हैं, और जहाँ हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं.

वित्तीय संकट 

WHO के अनुसार, अमेरिका ने स्वास्थ्य सेवाओं में आपात समन्वय, बड़े पैमाने पर हताहत लोगों के लिए आवश्यक व्यवस्था, और अन्य सेवाओं के लिए 5 लाख डॉलर की सहायता प्रदान की है.

मध्य पूर्व में इस संकट के भड़कने से पहले, यूएन स्वास्थ्य एजेंसी को अपनी क्षेत्रीय ज़रूरतों को पूरा करने के लिए, वर्ष 2026 की अपील के तहत 6.33 करोड़ डॉलर की ज़रूरत थी. अब तक, इस अपील के लिए केवल 37 प्रतिशत धनराशि ही उपलब्ध हो पाई है.

सीरिया के लिए 5 लाख डॉलर की सहायता जीवनरक्षक दवाओं और आवश्यक चिकित्सा सामग्री की ख़रीद में इस्तेमाल की जाएगी. यह विस्थापित आबादी की मदद करेगी और रोग निगरानी प्रणाली को भी मज़बूत करेगी.

शान्तिरक्षकों पर हमलों की निन्दा

लेबनान के दक्षिणी हिस्से और उत्तरी इसराइल को अलग करने वाली ‘ब्लू लाइन’ की निगरानी कर रहे यूएन शान्तिरक्षा मिशन (UNIFIL) के शान्तिरक्षकों को, इस सप्ताहान्त गश्त के दौरान, तीन अलग-अलग घटनाओं में फिर से हमले का सामना करना पड़ा है.

यूएन मिशन ने एक वक्तव्य में बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह गोलीबारी किसी सरकार या सेना से नहीं, बल्कि गै़र-सरकारी सशस्त्र गुटों द्वारा UNIFIL की तीन चौकियों के पास की गई.

मिशन ने बताया, “यातार में हुई गोलीबारी शान्तिरक्षकों से केवल 5 मीटर की दूरी पर हुई. दो गश्ती दलों ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की और संक्षिप्त मुठभेड़ के बाद, गश्ती दल ने अपने निर्धारित कार्यों को जारी रखा. कोई भी शान्तिरक्षक घायल नहीं हुआ है.”

UNIFIL ने ज़ोर देकर कहा कि यूएन मिशन के परिचालन क्षेत्र में, किसी भी सशस्त्र समूह द्वारा हथियारों का प्रयोग सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 का उल्लंघन है. इस प्रस्ताव ने 2006 में इसराइली बलों और हिज़बुल्लाह के बीच संघर्ष को समाप्त किया था.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश, हाल ही में लेबनान के दौरे से वापिस लौटे हैं, जहाँ उन्होंने स्पष्ट किया कि यूएन शान्तिरक्षकों और उनकी चौकियों पर किसी भी प्रकार का हमला “पूरी तरह अस्वीकार्य है और इसे तुरन्त रोका जाना चाहिए.”

महासचिव ने अपनी यात्रा के दौरान उन 8 लाख से अधिक प्रभावित लोगों से भी मुलाक़ात की, जिन्हें लड़ाई शुरू होने के बाद अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. उन्होंने दोहराया कि आम नागरिक कभी भी हमलों का निशाना नहीं बनने चाहिए.

Source : UN News Hindi

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *