गाज़ा में ‘येलो लाइन’ बनी नई हकीकत: आधे से ज़्यादा इलाक़े पर नियंत्रण, 21 लाख लोग सिमटे

गाज़ा पट्टी में ज़मीन पर खिंची एक लाइन अब सिर्फ़ नक्शे की रेखा नहीं रही, यह वहां की ज़िंदगी तय करने वाली नई हकीकत बनती जा रही है। “येलो लाइन” के नाम से जानी जाने वाली यह सीमा धीरे-धीरे फैल रही है और इसके साथ ही गाज़ा का भूगोल और लोगों की ज़िंदगी दोनों सिमटते जा रहे हैं।

हालिया विश्लेषण और सैटेलाइट तस्वीरें बताती हैं कि गाज़ा के करीब 54 प्रतिशत हिस्से पर अब इज़राइली नियंत्रण हो चुका है। यह विस्तार सिर्फ़ सैन्य मौजूदगी तक सीमित नहीं है, इमारतों को गिराया जा रहा है, लोगों को उनके घरों से हटाया जा रहा है और कंक्रीट बैरियर व मिट्टी के लंबे-लंबे ढांचे खड़े किए जा रहे हैं, जो इस लाइन को ज़मीन पर और मज़बूत बना रहे हैं।

इस बदलती तस्वीर के बीच, इज़राइल ने गाज़ा में कम से कम 32 सैन्य ठिकाने बना लिए हैं। इनमें से 7 ठिकाने अक्टूबर 2025 के सीज़फायर के बाद तैयार हुए हैं। इन ठिकानों पर बिजली, संचार और इंजीनियरिंग जैसी सुविधाएं मौजूद हैं जो साफ़ संकेत देती हैं कि यह मौजूदगी अस्थायी नहीं, बल्कि लंबे समय के लिए हो सकती है।

लेकिन इस पूरी स्थिति की सबसे भारी कीमत आम लोग चुका रहे हैं। करीब 21 लाख फिलिस्तीनी अब अपने पहले के क्षेत्र के आधे से भी कम हिस्से में रहने को मजबूर हैं। लाखों लोग तंबुओं या जर्जर इमारतों में दिन गुजार रहे हैं, और इसके बावजूद भी मानवीय मदद भी लगातार घटती जा रही है।

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े इस हालात की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं। फरवरी के अंत से अब तक 224 फिलिस्तीनी, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, येलो लाइन के पास या उसके पूर्व में मारे जा चुके हैं। यह घटनाएं एक ऐसे पैटर्न की ओर इशारा करती हैं, जहां खतरनाक इलाकों के करीब आने वाले नागरिक लगातार निशाने पर आ रहे हैं।

मेडिकल संगठनों के मुताबिक, बड़ी संख्या में घायल लोग वे हैं जो सिर्फ़ अपनी रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी करने निकले थे, कोई पानी लेने गया, कोई अपने घर लौटने की कोशिश कर रहा था। लेकिन बदलती सीमा ने ज़रूरी सेवाओं को भी खतरे के दायरे में ला खड़ा किया है।

इस बीच, अमेरिका समर्थित अंतरराष्ट्रीय बल तैनाती का प्रस्ताव अब तक ज़मीन पर नहीं उतर पाया है। वहीं, हमास के निरस्त्रीकरण पर बातचीत जारी है, जबकि इज़राइल गाज़ा के बड़े हिस्से में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है।

इज़राइली सेना का कहना है कि “येलो लाइन” के आसपास उसकी कार्रवाई सीज़फायर के नियमों के तहत है और यह इलाका एक हाई-रिस्क ऑपरेशनल ज़ोन है, जहां सिर्फ़ तत्काल खतरों को निशाना बनाया जाता है।

गाज़ा में खिंची यह “येलो लाइन” अब सिर्फ़ एक सैन्य रणनीति नहीं, बल्कि एक ऐसी सच्चाई बन गई है, जो हर दिन ज़मीन को छोटा और लोगों की ज़िंदगी को और मुश्किल बनाती जा रही है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *