मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भी, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को ग़ाज़ा की स्थिति से नज़र नहीं हटानी चाहिए. यह बात मंगलवार को निकोलय म्लैदेनॉव ने सुरक्षा परिषद में कही, जोकि ग़ाज़ा पट्टी के लिए, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के ‘शान्ति बोर्ड’ (Board of Peace) के शीर्ष अधिकारी हैं.
ग़ाज़ा पट्टी के लिए शान्ति बोर्ड के उच्च प्रतिनिधि के रूप में, सुरक्षा परिषद में, निकोलय म्लैदेनॉव की यह पहली उपस्थिति थी.
मंगलवार की बैठक, सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2334 (2016) के कार्यान्वयन के बारे में विचार करने के लिए बुलाई गई थी.
यह प्रस्ताव मांग करता है कि इसराइल से, उसके क़ब्जे वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र में सभी यहूदी बस्ती सम्बन्धी गतिविधियों को तुरन्त बन्द कर देने की मांग करता है.
सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव – 2803 (2025) को अपनाए जाने के लगभग चार महीने बाद, मंगलवार की बैठक आयोजित की गई थी.
इस प्रस्ताव ने ग़ाज़ा युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका समर्थित ‘व्यापक योजना’ (Comprehensive Plan) का समर्थन किया था, जिसमें ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ को एक संक्रमणकालीन प्रशासन के रूप में स्वीकार किया गया और एक अस्थाई ‘अन्तरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल’ (ISF) स्थापित करने का अधिकार दिया गया.

निकोलय म्लैदेनॉव ने कहा कि अमेरिकी 20-सूत्रीय योजना का पहला चरण काफ़ी हद तक पूरा हो चुका है जिसके तहत, अक्टूबर (2025) में इसराइल और हमास के बीच युद्धविराम हुआ था. …और चुनौतियों के बावजूद युद्धविराम क़ायम भी है.
इस योजना के तहत, ग़ाज़ा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति (NCAG) का गठन किया गया है और इसने सिविल पुलिस के हज़ारों उम्मीदवारों की जाँच प्रक्रिया में प्रगति की है.
उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय समिति केवल अन्तरिम आधार पर अधिकार का प्रयोग करती है. अन्तिम लक्ष्य एक संशोधित फ़लस्तीनी प्राधिकरण है जो ग़ाज़ा और पश्चिमी तट पर शासन करने में सक्षम हो, और अन्ततः फ़लस्तीनी आत्मनिर्णय व देश की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो.”
ISF के लिए शान्तिरक्षकों का योगदान
इसके अलावा, इंडोनेशिया, मोरक्को, कज़ाख़्स्तान, कोसोवो और अल्बानिया ने, ISF के लिए अपने सैनिक भेजने की प्रतिबद्धता जताई है. वहीं, उनके कार्यालय ने, सशस्त्र समूहों का निरस्त्रीकरण किए जाने और समाज में उनके घुलने-मिलनेके लिए, अमेरिका, मिस्र, तुर्की और क़तर के साथ मिलकर एक व्यापक ढाँचा तैयार किया है.
यह ढाँचा औपचारिक रूप से सभी सम्बन्धित पक्षों को प्रस्तुत कर दिया गया है और फ़िलहाल इस गम्भीर चर्चा चल रही है.
सुरक्षा परिषद के सदस्यों से “हमास और सभी फ़लस्तीनी गुटों को बिना देरी के इस ढाँचे को स्वीकार करने के लिए अपने पास मौजूद सभी साधनों का उपयोग करने” का अनुरोध भी किया गया है.

निकोलय म्लैदेनॉव ने कहा कि “व्यापक योजना को पूरी तरह लागू किया जाना ही एकमात्र रास्ता है जो इसराइल को स्थाई सुरक्षा प्रदान करता है.”
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यदि ग़ाज़ा हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के नियंत्रण में रहता है, तो फ़लस्तीनी आत्मनिर्णय और एक स्वतंत्र फ़लस्तीनी राष्ट्र की स्थापना का कोई विश्वसनीय मार्ग नहीं हो सकता.
यहूदी बस्तियों के निर्माण में तेज़ी
मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के उप विशेष समन्वयक रमीज़ अलअकबरोव ने प्रस्ताव 2334 (2016) के कार्यान्वयन पर महासचिव की नवीनतम त्रैमासिक रिपोर्ट भी, सुरक्षा परिषद में प्रस्तुत की.
रिपोर्ट से मालूम होता है कि 13 मार्च तक, इसराइली बस्ती गतिविधियाँ उच्च स्तर पर जारी रहीं.
इसराइली अधिकारियों ने अपने क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र – पश्चिमी तट और पूर्वी येरूशेलम में 6 हज़ार से अधिक आवास इकाइयों को आगे बढ़ाया या स्वीकृति दी.
फ़लस्तीनी स्वामित्व वाली इमारतों को ढहाने की प्रक्रिया भी तेज़ हुई, जबकि फ़लस्तीनी लोगों को उनके घरों व सम्पत्तियों से बेदख़ल किए जानै और उनके ख़िलाफ़ हिंसा की घटनाएँ भी जारी रहीं.
कुल मिलाकर, पश्चिमी तट में इसराइली सुरक्षा बलों के अभियानों, सशस्त्र संघर्षों और यहूदी बाशिन्दों के हमलों के दौरान 32 फ़लस्तीनी मारे गए, जिनमें सात बच्चे थे.
विशाल विस्थापन
इस बीच, ग़ाज़ा में लगभग 14 लाख लोग 1,200 स्थानों पर विस्थापित हैं, और बहुत से लोगों को अत्यन्त भीड़भाड़ वाली और असुरक्षित स्थितियों में रह रहना पड़ रहा है.
रमीज़ अलअकबरोव ने रिपोर्ट में शामिल महासचिव की कुछ टिप्पणियाँ भी प्रस्तुत कीं. इनमें अमेरिका के नेतृत्व वाली योजना के दूसरे चरण के आरम्भ के सम्बन्ध में उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने ग़ाज़ा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति की स्थापना को एक “महत्वपूर्ण क़दम” बताया है.
उन्होंने कहा, “यह बहुत अहम है कि सभी पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं का पूरी तरह से पालन करें ताकि ग़ाज़ा में पुनर्निर्माण (recovery) की प्रक्रिया आगे बढ़ सके और साथ ही दो-राष्ट्र समाधान की ओर एक विश्वसनीय राजनैतिक पटल विकसित हो सके.”
Source : UN News
