किफ़्ल हारिस में घुसपैठ और वेस्ट बैंक में ज़मीन ज़ब्ती: क्या है पूरा मामला, आसान भाषा में समझिए

वेस्ट बैंक के सलफित इलाके के पास स्थित किफ़्ल हारिस कस्बे में रविवार शाम एक बार फिर तनावपूर्ण हालात देखने को मिले। स्थानीय लोगों के मुताबिक़, यहूदी बसने वालों के कई समूह भारी इज़राइली सैन्य सुरक्षा के बीच कस्बे में दाखिल हुए।

इन बसने वालों ने वहां मौजूद इस्लामी धार्मिक स्थलों में तल्मूदी अनुष्ठान किए। इस दौरान इज़राइली सेना ने पूरे इलाके को घेर लिया, कई सड़कों को बंद कर दिया और कस्बे के लोगों की आवाजाही पर पाबंदियां लगा दीं, ताकि बसने वालों की गतिविधियों को बिना किसी बाधा के पूरा कराया जा सके।

यह पहली बार नहीं है

किफ़्ल हारिस में इस तरह की घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं। हर बार बसने वाले धार्मिक स्थलों को निशाना बनाते हैं और सेना की सुरक्षा में आते हैं, जिससे स्थानीय लोगों में डर और तनाव बढ़ता है।

दूसरी बड़ी घटना: ज़मीन ज़ब्त करने का फैसला

इसी दिन एक और अहम फैसला सामने आया। इज़राइली बलों ने जेनिन के दक्षिण में स्थित अल-फुंदुकूमिया गांव की करीब 8,950 वर्ग मीटर ज़मीन को सैन्य इस्तेमाल के लिए अपने कब्ज़े में लेने का निर्णय लिया। इसका मतलब यह है कि उस ज़मीन पर अब स्थानीय फ़िलिस्तीनी लोगों का अधिकार नहीं रहेगा।

बड़ी तस्वीर: क्या चल रहा है वेस्ट बैंक में?

यह घटनाएं अकेली नहीं हैं, बल्कि एक बड़ी नीति का हिस्सा हैं। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार:

  • साल 2025 में 5,571 से ज्यादा दुनम ज़मीन ज़ब्त की गई
  • करीब 2,609 दुनम पर कब्ज़े के लिए 94 आदेश जारी हुए
  • 1,731 दुनम के लिए 3 अधिग्रहण आदेश
  • 1,231 दुनम को “स्टेट लैंड” घोषित किया गया

यानी धीरे-धीरे ज़मीन पर नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है।

घरों पर भी असर

  • 2025 में करीब 1,400 फ़िलिस्तीनी ढांचे गिराए गए
  • इनमें 258 ढांचे यरुशलम में थे
  • 104 मामलों में लोगों को खुद अपने घर गिराने पड़े
  • 991 नए ध्वस्तीकरण आदेश भी जारी किए गए

इसका सीधा असर लोगों के रहने और जीवन पर पड़ रहा है।

बड़ा फैसला: “स्टेट लैंड” नीति

8 फ़रवरी को इज़राइली सरकार ने एक अहम निर्णय लिया, जिसके तहत वेस्ट बैंक के एरिया “C” में फ़िलिस्तीनी ज़मीन को “स्टेट लैंड” घोषित कर कब्ज़ा किया जा सकता है और यह 1967 के बाद पहली बार हुआ है।

इसका उद्देश्य इलाके पर नियंत्रण और मजबूत करना बताया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि: कब्ज़े वाले इलाकों में बस्तियों का विस्तार गैर-कानूनी है यह दो-राष्ट्र समाधान की संभावनाओं को कमजोर करता है फिर भी, लंबे समय से इन गतिविधियों को रोकने की कोशिशें सफल नहीं हुई हैं।

निष्कर्ष (क्या समझें?)

पूरी स्थिति को आसान भाषा में समझें तो: एक तरफ़ धार्मिक स्थलों पर घुसपैठ और सैन्य सुरक्षा में गतिविधियां हो रही हैं दूसरी तरफ़ ज़मीन ज़ब्ती, घरों का ध्वस्तीकरण और नए नियमों के ज़रिए नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है और इन सबका असर सीधे आम फ़िलिस्तीनी लोगों के जीवन पर पड़ रहा है इसके बावजूद, स्थानीय लोग अपनी ज़मीन से जुड़े रहने और विस्थापन का विरोध करने की कोशिश जारी रखे हुए हैं।

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