रोम/नई दिल्ली: फिलिस्तीन में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष रैपोर्टेयर फ्रांसेस्का अल्बानीज ने गाजा में जारी हालात को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इजरायल की सैन्य कार्रवाई को “क्रूरता” बताते हुए कहा कि इसे किसी भी स्थिति में जायज नहीं ठहराया जा सकता।
23 मार्च को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र में पेश अपनी रिपोर्ट “यातना और नरसंहार” में अल्बानीज ने खुलासा किया कि अक्टूबर 2023 के बाद से इजरायल ने करीब 18,500 फिलिस्तीनियों को गिरफ्तार किया, जिनमें 1,500 बच्चे शामिल हैं। रिपोर्ट में हिरासत के दौरान कथित यातना और दुर्व्यवहार के मामलों का भी उल्लेख किया गया है।
द हिंदू को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि गाजा में बमबारी, जबरन गिरफ्तारियां, लोगों को घरों से उठाकर गायब करना और महिलाओं-बच्चों के साथ शोषण जैसी घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने हाल ही में इजरायल द्वारा बनाए गए नए कानून का जिक्र करते हुए कहा कि यह दिखाता है कि इजरायल लगातार अपनी सीमाएं पार कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए अल्बानीज ने इसे “कायर चुप्पी” बताया और कहा कि दुनिया को इस मुद्दे पर खुलकर सामने आना चाहिए।
भारत के रुख पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने भारत और इजरायल के संबंधों, खासकर गाजा युद्ध के दौरान भारत द्वारा दी गई मदद पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल और उसके प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सहायता करके भारत अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कर रहा है और उसे जवाबदेही का सामना करना पड़ सकता है।
अल्बानीज ने यह भी कहा कि भारत के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग राय हैं और सिविल सोसायटी का एक वर्ग फिलिस्तीन के समर्थन में आवाज उठा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस यात्रा और वहां संसद में दिए गए भाषण की काफी चर्चा हुई थी। साथ ही उन्होंने “पुराने संबंधों” की धारणा पर भी सवाल उठाए।
गौरतलब है कि अल्बानीज के इन बयानों ने गाजा संकट, इजरायल की कार्रवाई और भारत की भूमिका को लेकर वैश्विक स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।
