हैदराबाद की तायबा बेगम खेदीव जंग ने उस दौर में इतिहास रचा, जब महिलाओं की शिक्षा को समाज में स्वीकार नहीं किया जाता था। वर्ष 1873 में जन्मी तायबा बेगम भारत की पहली मुस्लिम महिला ग्रेजुएट बनीं। उन्होंने सामाजिक बंधनों और पर्दा प्रथा जैसी कठिन चुनौतियों के बावजूद घर से पढ़ाई जारी रखी और मद्रास विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अपना जीवन समाज सेवा और महिला सशक्तिकरण को समर्पित कर दिया। उन्होंने महिलाओं की स्थिति सुधारने और शिक्षा के महत्व को बढ़ावा देने के लिए लेखन कार्य भी किया। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक अनवारी बेगम ने महिलाओं के जीवन से जुड़े कई सामाजिक मुद्दों को सामने रखा।
साल 1907 में तायबा बेगम ने लेडी अमीना हैदरी और सरोजिनी नायडू के साथ मिलकर हैदराबाद में महबूबिया गर्ल्स स्कूल की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा उन्होंने गरीब और जरूरतमंद लड़कियों के लिए आठ स्कूल शुरू किए।
तायबा बेगम का मानना था कि शिक्षा हर लड़की का अधिकार है, चाहे वह किसी भी धर्म या वर्ग से हो। उनका संघर्ष, दूरदर्शिता और समाज सेवा आज भी महिलाओं की शिक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को आगे बढ़ने का साहस देती रहेगी।
